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30 साल से लंबित मांग पर मुहर: दिल्ली के लिए अलग इंजीनियरिंग कैडर को केंद्र की मंजूरी, 3214 पद होंगे अलग

Wed, 09 Sep 2026 08:16 PM IST
Digvijay Singh अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, दिल्ली Published by: Digvijay Singh Updated Wed, 09 Sep 2026 08:16 PM IST
सार

केंद्र सरकार ने दिल्ली पीडब्ल्यूडी के 3214 स्वीकृत इंजीनियरिंग पदों को सीपीडब्ल्यूडी कैडर से अलग कर स्वतंत्र दिल्ली पीडब्ल्यूडी इंजीनियरिंग कैडर बनाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। 

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Approval for a demand pending for 30 years Centre clears separate engineering cadre for Delhi 3214 posts be se
सीएम रेखा गुप्ता - फोटो : @gupta_rekha (सोशल मीडिया)

विस्तार

केंद्र सरकार ने दिल्ली पीडब्ल्यूडी के 3214 स्वीकृत इंजीनियरिंग पदों को सीपीडब्ल्यूडी कैडर से अलग कर स्वतंत्र दिल्ली पीडब्ल्यूडी इंजीनियरिंग कैडर बनाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। ये मुद्दा करीब तीन दशक से लंबित था। दिल्ली सरकार ने कैबिनेट में निर्णय लेकर इस दिशा में पहल की थी। अब केंद्र की मंजूरी के बाद इसे लागू करने का रास्ता साफ हो गया है।

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अब तक दिल्ली पीडब्ल्यूडी का इंजीनियरिंग ढांचा मुख्य रूप से सीपीडब्ल्यूडी कैडर पर निर्भर था। पीडब्ल्यूडी के इंजीनियरिंग विंग की 36 श्रेणियों में 3214 स्वीकृत पद सीपीडब्ल्यूडी कैडर के तहत आते थे। ऐसे में इंजीनियरों की नियुक्ति और प्रशासनिक व्यवस्था में दिल्ली की जरूरत के मुताबिक तत्काल निर्णय लेने की गुंजाइश सीमित रहती थी। अलग कैडर बनने के बाद दिल्ली सरकार इन पदों और इंजीनियरिंग तंत्र को अपनी विकास प्राथमिकताओं के अनुरूप व्यवस्थित कर सकेगी।
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निर्माण परियोजनाओं को मिलेगा सीधा फायदा
दिल्ली में आने वाले समय में नए सचिवालय, 11 जिलों में मिनी सचिवालय, मंडियों, खेल मैदानों और दूसरे सरकारी भवनों के निर्माण की योजना है। इसके अलावा सड़कों, पुलों और दूसरी आधारभूत परियोजनाओं का काम भी लगातार चलना है। ऐसे में अपने इंजीनियरिंग कैडर से इन परियोजनाओं के लिए इंजीनियरों की उपलब्धता, तैनाती और काम की निगरानी बेहतर तरीके से की जा सकेगी। इससे परियोजनाओं को समय पर आगे बढ़ाने में भी मदद मिलने की उम्मीद है।
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जवाबदेही तय करना होगा आसान
अलग कैडर का एक बड़ा असर इंजीनियरिंग अधिकारियों की जवाबदेही पर पड़ेगा। निर्माण कार्य में खामी या अनियमितता सामने आने पर संबंधित अधिकारी की भूमिका और जिम्मेदारी तय करने की प्रक्रिया को दिल्ली सरकार अपनी प्रशासनिक व्यवस्था से सीधे जोड़ सकेगी। काम की निगरानी और अधिकारियों के प्रदर्शन का आकलन भी अधिक प्रभावी तरीके से किया जा सकेगा। सरकार का दावा है कि इससे निर्माण कार्यों में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी।


केंद्र सरकार की मंजूरी का स्वागत, अलग इंजीनियरिंग कैडर दिल्ली के विकास को नई गति देगा। इससे निर्माण कार्यों में तेजी आएगी, जवाबदेही और पारदर्शिता बेहतर होगी। दिल्ली को अपने इंजीनियरिंग तंत्र को अपनी जरूरत के अनुसार मजबूत करने का अवसर मिलेगा। यह दिल्ली को विकसित, सुरक्षित और विश्वस्तरीय राजधानी बनाने की दिशा में ऐतिहासिक कदम है। - रेखा गुप्ता, मुख्यमंत्री


 


 
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