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टीका लगने के 45 दिन बाद बनेगी एंटीबॉडी
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नई दिल्ली। राजधानी में टीकाकरण की शुरुआत हो चुकी है। सोमवार तक 7,917 लोग वैक्सीन लगवा चुके हैं। डॉक्टरों का कहना है कि पहली डोज लेने वालों में 45 दिन बाद संक्रमण के खिलाफ रोग प्रतिरोधक क्षमता (एंटीबॉडी) बनेगी। वैक्सीन लगवाने वाले सभी लोगों को इस अवधि के दौरान खास ख्याल रखने की जरूरत है।
सफदरजंग अस्पताल के कम्यूनिटी मेडिसन विभाग के अध्यक्ष डॉक्टर जुगल किशोर बताते हैं कि कोरोना की वैक्सीन लगते ही तुरंत शरीर में एंटीबॉडी नहीं बनती है। इसमें कई सप्ताह का समय लगता है। उन्होंने कहा कि जिन स्वास्थ्य कर्मचारियों को पहली डोज लगी है, उन्हें 28 दिन बाद दूसरी डोज लगेगी। दूसरी डोज लगने के 15 दिन बाद शरीर में एंटीबॉडी बनती है। इस हिसाब से देखें तो जिन लोगों ने अभी तक टीके लगवाएं हैं उनमें डेढ़ महीने के बाद ही एंटीबॉडी बनेगी। लिहाजा, टीका लगने के 45 दिन तक लोगों को अपना खास ख्याल रखने की जरूरत है। डॉक्टर ने कहा इस दौरान किसी संक्रमित के संपर्क में आने पर वायरस फैल सकता है। डॉक्टर किशोर ने कहा कि वैक्सीन के ट्रायल के दौरान की यह देखा गया है कि वैक्सीनेशन के बाद कितनी एंटीबॉडी बन रही है। इसलिए रोग प्रतिरोधक क्षमता का का पता लगाने के लिए लोगों को एंटीबॉडी टेस्ट कराने की कोई जरूरत नहीं है।
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टीकाकरण के बाद हुई समस्या को न करें नजरअंदाज
एम्स अस्पताल के डॉक्टर विजय गुर्जर ने कहा कि टीके के विषय में कई अफवाह चल रही है। अनुमान के मुताबिक टीकाकरण भी कम हो रहा है। उन्होंने कहा कि इस महामारी के खिलाफ यही एक बेहतर इलाज है। इसलिए सभी को वैक्सीन लगवानी चाहिए। उन्होंने कहा कि टीका लगने के बाद इसके दुष्प्रभाव की चिंता के कारण लोग घबरा रहे है, लेकिन ऐसा नहीं होना चाहिए। दु्ष्प्रभाव अगर हुआ भी है तो जरूरी है कि इसे नजरअंदाज न करे, और समय से डॉक्टर से संपर्क कर ले। उन्होंने कहा कि वैक्सीन के बाद अगर बुखार, एलर्जी हुई है तो इसमें कोई घबराने की बात नहीं है।
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दूसरी डोजभी लेना जरूरी
अपोलो अस्पताल के डॉक्टर प्रवीण कुमार के अनुसार जिन लोगों ने वैक्सीन की पहली डोज ले ली है। उन्हें बिना लापरवाही बरते दूसरी डोज भी जरूर लेनी होगी। डॉक्टर के अनुसार, पहली डोज इंसान के शरीर में एंटीबॉडी के उत्पादन को उत्तेजित करती है। जबकि, दूसरी डोज शरीर में एंटीबॉडी के स्तर को बनाती है। और उसके स्तर को बनाए रखती है। वैक्सीन की पहली खुराक संक्रमण से आंशिक सुरक्षा प्रदान करती है। बेहतर सुरक्षा के लिए दोनो खुराक लेना बहुत जरूरी है।
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सफदरजंग अस्पताल के कम्यूनिटी मेडिसन विभाग के अध्यक्ष डॉक्टर जुगल किशोर बताते हैं कि कोरोना की वैक्सीन लगते ही तुरंत शरीर में एंटीबॉडी नहीं बनती है। इसमें कई सप्ताह का समय लगता है। उन्होंने कहा कि जिन स्वास्थ्य कर्मचारियों को पहली डोज लगी है, उन्हें 28 दिन बाद दूसरी डोज लगेगी। दूसरी डोज लगने के 15 दिन बाद शरीर में एंटीबॉडी बनती है। इस हिसाब से देखें तो जिन लोगों ने अभी तक टीके लगवाएं हैं उनमें डेढ़ महीने के बाद ही एंटीबॉडी बनेगी। लिहाजा, टीका लगने के 45 दिन तक लोगों को अपना खास ख्याल रखने की जरूरत है। डॉक्टर ने कहा इस दौरान किसी संक्रमित के संपर्क में आने पर वायरस फैल सकता है। डॉक्टर किशोर ने कहा कि वैक्सीन के ट्रायल के दौरान की यह देखा गया है कि वैक्सीनेशन के बाद कितनी एंटीबॉडी बन रही है। इसलिए रोग प्रतिरोधक क्षमता का का पता लगाने के लिए लोगों को एंटीबॉडी टेस्ट कराने की कोई जरूरत नहीं है।
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टीकाकरण के बाद हुई समस्या को न करें नजरअंदाज
एम्स अस्पताल के डॉक्टर विजय गुर्जर ने कहा कि टीके के विषय में कई अफवाह चल रही है। अनुमान के मुताबिक टीकाकरण भी कम हो रहा है। उन्होंने कहा कि इस महामारी के खिलाफ यही एक बेहतर इलाज है। इसलिए सभी को वैक्सीन लगवानी चाहिए। उन्होंने कहा कि टीका लगने के बाद इसके दुष्प्रभाव की चिंता के कारण लोग घबरा रहे है, लेकिन ऐसा नहीं होना चाहिए। दु्ष्प्रभाव अगर हुआ भी है तो जरूरी है कि इसे नजरअंदाज न करे, और समय से डॉक्टर से संपर्क कर ले। उन्होंने कहा कि वैक्सीन के बाद अगर बुखार, एलर्जी हुई है तो इसमें कोई घबराने की बात नहीं है।
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दूसरी डोजभी लेना जरूरी
अपोलो अस्पताल के डॉक्टर प्रवीण कुमार के अनुसार जिन लोगों ने वैक्सीन की पहली डोज ले ली है। उन्हें बिना लापरवाही बरते दूसरी डोज भी जरूर लेनी होगी। डॉक्टर के अनुसार, पहली डोज इंसान के शरीर में एंटीबॉडी के उत्पादन को उत्तेजित करती है। जबकि, दूसरी डोज शरीर में एंटीबॉडी के स्तर को बनाती है। और उसके स्तर को बनाए रखती है। वैक्सीन की पहली खुराक संक्रमण से आंशिक सुरक्षा प्रदान करती है। बेहतर सुरक्षा के लिए दोनो खुराक लेना बहुत जरूरी है।