{"_id":"61954b0ead37e37da325b658","slug":"answer-sought-from-the-center-on-the-issue-of-information-about-ips-officers-under-rti-ashram-news-noi6163891114","type":"story","status":"publish","title_hn":"2006 मुंबई ट्रेन विस्फोट मामला : आरटीआई में आईपीएस अधिकारियों के बारे में जानकारी मुद्दे पर केंद्र से जवाब तलब","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
2006 मुंबई ट्रेन विस्फोट मामला : आरटीआई में आईपीएस अधिकारियों के बारे में जानकारी मुद्दे पर केंद्र से जवाब तलब
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
नई दिल्ली। उच्च न्यायालय ने बुधवार को 2006 मुंबई ट्रेन विस्फोट मामले की जांच में शामिल आईपीएस अधिकारियों के बारे में जानकारी के लिए सूचना के अधिकार (आरटीआई) अधिनियम के तहत जानकारी देने से इनकार करने संबंधी मुद्दे को चुनौती याचिका पर केंद्र से जवाब मांगा है।
न्यायमूर्ति रेखा पल्ली ने अधिकारियों के भ्रष्टाचार और उनके मानवाधिकारों के उल्लंघन का आरोप लगाने वाले एहतेशाम कुतुबुद्दीन सिद्दीकी की दो याचिकाओं पर गृह मंत्रालय और कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग के केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी को नोटिस जारी किया है।
याचिकाकर्ता वर्तमान में नागपुर जेल में बंद है। याची के अधिवक्ता अर्पित भार्गव ने तर्क रखा कि उनके मुवक्किल को मुंबई की अदालत द्वारा ‘झूठे और मनगढ़ंत सबूतों’ के आधार पर गलत तरीके से दोषी ठहराया गया और मौत की सजा सुनाई गई। मुंबई हाईकोर्ट ने अभी सजा की पुष्टि नहीं की।
विज्ञापन
आरोप लगाया कि जांच की निगरानी करने वाले आईपीएस अधिकारी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से फर्जी साक्ष्य गढ़ने में शामिल होने के साथ-साथ बिना विचार अभियोजन की मंजूरी दे रहे थे।
याचिकाकर्ता ने कहा कि सितंबर 2018 में उनके अनुरोध में यूपीएससी फॉर्म की प्रति और उसके साथ जुड़े अन्य सभी दस्तावेज और 16 आईपीएस अधिकारियों की नियुक्ति से संबंधित सभी दस्तावेज गृह मंत्रालय के अधिकारी ने देने से इनकार कर दिया था। अधिकारी ने तर्क रखा कि इस खुलासे को आरटीआई अधिनियम की धारा 8 (1) (जे) के तहत एक व्यक्ति की निजता की व्यक्तिगत जानकारी के तहत देने से छूट दी गई है।
अदालत को बताया गया कि नवंबर 2019 में मुख्य सूचना आयोग की एक बड़ी पीठ ने अस्वीकृति को बरकरार रखा था। याची ने कहा उसे यह जानकारी पाने का अधिकार है।
विज्ञापन
न्यायमूर्ति रेखा पल्ली ने अधिकारियों के भ्रष्टाचार और उनके मानवाधिकारों के उल्लंघन का आरोप लगाने वाले एहतेशाम कुतुबुद्दीन सिद्दीकी की दो याचिकाओं पर गृह मंत्रालय और कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग के केंद्रीय लोक सूचना अधिकारी को नोटिस जारी किया है।
विज्ञापन
याचिकाकर्ता वर्तमान में नागपुर जेल में बंद है। याची के अधिवक्ता अर्पित भार्गव ने तर्क रखा कि उनके मुवक्किल को मुंबई की अदालत द्वारा ‘झूठे और मनगढ़ंत सबूतों’ के आधार पर गलत तरीके से दोषी ठहराया गया और मौत की सजा सुनाई गई। मुंबई हाईकोर्ट ने अभी सजा की पुष्टि नहीं की।
विज्ञापन
आरोप लगाया कि जांच की निगरानी करने वाले आईपीएस अधिकारी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से फर्जी साक्ष्य गढ़ने में शामिल होने के साथ-साथ बिना विचार अभियोजन की मंजूरी दे रहे थे।
याचिकाकर्ता ने कहा कि सितंबर 2018 में उनके अनुरोध में यूपीएससी फॉर्म की प्रति और उसके साथ जुड़े अन्य सभी दस्तावेज और 16 आईपीएस अधिकारियों की नियुक्ति से संबंधित सभी दस्तावेज गृह मंत्रालय के अधिकारी ने देने से इनकार कर दिया था। अधिकारी ने तर्क रखा कि इस खुलासे को आरटीआई अधिनियम की धारा 8 (1) (जे) के तहत एक व्यक्ति की निजता की व्यक्तिगत जानकारी के तहत देने से छूट दी गई है।
अदालत को बताया गया कि नवंबर 2019 में मुख्य सूचना आयोग की एक बड़ी पीठ ने अस्वीकृति को बरकरार रखा था। याची ने कहा उसे यह जानकारी पाने का अधिकार है।