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रामलीला का मजाक बनाने पर एम्स के छात्रों ने मांगी माफी
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नई दिल्ली। रामलीला का मजाक बनाने पर दिल्ली एम्स के छात्रों को माफी मांगनी पड़ी। दशहरा पर्व पर एम्स के हॉस्टल के पास मैदान में हुए कार्यक्रम में रामलीला मंचन करते हुए कई आपत्तिजनक टिप्पणियां की गईं। इसका वीडियो सोशल मीडिया पर आते ही तेजी से वायरल हो गया। इसके बाद एम्स प्रबंधन से सख्त कार्रवाई की मांग शुरू हो गई। रविवार दोपहर एम्स के छात्रों ने सार्वजनिक तौर पर माफी मांगते हुए भविष्य में ऐसा कार्यक्रम नहीं करने की बात कही।
एम्स के छात्र संगठन ने सोशल मीडिया पर पोस्ट जारी करते हुए कहा कि एमबीबीएस प्रथम वर्ष के छात्रों ने यह कार्यक्रम किया था। इसके बारे में प्रबंधन को जानकारी नहीं दी गई। हर साल अलग-अलग पर्व पर एम्स में धार्मिक आयोजन होते हैं। उसी के तहत यह कार्यक्रम रखा गया था। संगठन ने कहा कि उनका मकसद किसी भी धर्म पर सवाल खड़े करना या उसका मजाक बनाना नहीं है। इसे गलती समझते हुए माफ कर दिया जाए।
उधर, सोशल मीडिया पर इस वीडियो को लेकर कई तरह की टिप्पणियां आती रहीं। इसके बाद भी एम्स प्रबंधन ने देर रात तक न कोई बयान जारी किया और न ही किसी अधिकारी ने इस मामले में कोई हस्तक्षेप किया। एम्स से मिली जानकारी के अनुसार, प्रबंधन के संज्ञान में मामला आने के बाद तुरंत संबंधित छात्रों से माफी मांगने को कहा गया था। हालांकि सवाल यह भी है कि एम्स के कई छात्र सोशल मीडिया पर संस्थान के नाम से यूट्यूब चैनल और सोशल मीडिया अकाउंट चला रहे हैं। इन्हें लेकर भी अब सवाल खड़े होने लगे हैं। सोशल मीडिया पर लिखा गया कि एम्स प्रबंधन ने अब तक इन पर संज्ञान नहीं लिया है। न ही छात्रों को इनसे दूरी बनाने और चिकित्सा शिक्षा पर ध्यान बढ़ाने के लिए कहा गया है।
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‘बचपना समझ इस बार कर
दें माफ, दोबारा नहीं करेंगे’
रामायण के चरित्रों को कथित मॉर्डर्न अंदाज देते हुए मजाकिया लहजे में पेश करने वाले प्रथम वर्ष के एक छात्र ने वीडियो जारी कर माफी मांगी और कहा कि यह आयोजन बचपने में किया गया था। बाद में उन्होंने इसका विडियो देखा तो खुद भी शर्मिंदा हुए। इस छात्र ने कहा कि मैं और मेरे साथी माफी मांगते हुए आश्वासन देते हैं कि ऐसा कभी दोबारा नहीं होगा। उसने आगे कहा कि एम्स के हिंदूफोबिक होने और यहां हिंदू त्योहारों का सम्मान नहीं करने की बात पूरी तरह गलत है। हम यहां सभी भारतीय त्योहार पूरी गरिमा और सम्मान के साथ मनाते हैं। ऐसे में यह बात सच नहीं है कि हम हिंदू विरोधी हैं। हम सभी देवी-देवताओं का सम्मान करते हैं। उधर, एम्स प्रशासन के एक अधिकारी ने कहा कि छात्रों ने खुद ही यह आयोजन किया। इसकी कोई आधिकारिक सूचना नहीं थी। इस विषय पर संबंधित छात्रों के साथ चर्चा की गई थी। इसके बाद छात्रों ने माफी वाला ट्वीट किया।
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एम्स के छात्र संगठन ने सोशल मीडिया पर पोस्ट जारी करते हुए कहा कि एमबीबीएस प्रथम वर्ष के छात्रों ने यह कार्यक्रम किया था। इसके बारे में प्रबंधन को जानकारी नहीं दी गई। हर साल अलग-अलग पर्व पर एम्स में धार्मिक आयोजन होते हैं। उसी के तहत यह कार्यक्रम रखा गया था। संगठन ने कहा कि उनका मकसद किसी भी धर्म पर सवाल खड़े करना या उसका मजाक बनाना नहीं है। इसे गलती समझते हुए माफ कर दिया जाए।
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उधर, सोशल मीडिया पर इस वीडियो को लेकर कई तरह की टिप्पणियां आती रहीं। इसके बाद भी एम्स प्रबंधन ने देर रात तक न कोई बयान जारी किया और न ही किसी अधिकारी ने इस मामले में कोई हस्तक्षेप किया। एम्स से मिली जानकारी के अनुसार, प्रबंधन के संज्ञान में मामला आने के बाद तुरंत संबंधित छात्रों से माफी मांगने को कहा गया था। हालांकि सवाल यह भी है कि एम्स के कई छात्र सोशल मीडिया पर संस्थान के नाम से यूट्यूब चैनल और सोशल मीडिया अकाउंट चला रहे हैं। इन्हें लेकर भी अब सवाल खड़े होने लगे हैं। सोशल मीडिया पर लिखा गया कि एम्स प्रबंधन ने अब तक इन पर संज्ञान नहीं लिया है। न ही छात्रों को इनसे दूरी बनाने और चिकित्सा शिक्षा पर ध्यान बढ़ाने के लिए कहा गया है।
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दें माफ, दोबारा नहीं करेंगे’
रामायण के चरित्रों को कथित मॉर्डर्न अंदाज देते हुए मजाकिया लहजे में पेश करने वाले प्रथम वर्ष के एक छात्र ने वीडियो जारी कर माफी मांगी और कहा कि यह आयोजन बचपने में किया गया था। बाद में उन्होंने इसका विडियो देखा तो खुद भी शर्मिंदा हुए। इस छात्र ने कहा कि मैं और मेरे साथी माफी मांगते हुए आश्वासन देते हैं कि ऐसा कभी दोबारा नहीं होगा। उसने आगे कहा कि एम्स के हिंदूफोबिक होने और यहां हिंदू त्योहारों का सम्मान नहीं करने की बात पूरी तरह गलत है। हम यहां सभी भारतीय त्योहार पूरी गरिमा और सम्मान के साथ मनाते हैं। ऐसे में यह बात सच नहीं है कि हम हिंदू विरोधी हैं। हम सभी देवी-देवताओं का सम्मान करते हैं। उधर, एम्स प्रशासन के एक अधिकारी ने कहा कि छात्रों ने खुद ही यह आयोजन किया। इसकी कोई आधिकारिक सूचना नहीं थी। इस विषय पर संबंधित छात्रों के साथ चर्चा की गई थी। इसके बाद छात्रों ने माफी वाला ट्वीट किया।