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Delhi News : एम्स निदेशक डॉ. गुलेरिया ने कहा- विज्ञान, प्रौद्योगिकी और मानविकी पर प्रभाव का त्रिकोण है अनुसंधान

Thu, 02 Jun 2022 05:56 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Thu, 02 Jun 2022 05:56 AM IST
सार

अंबेडकर विश्वविद्यालय के शोध उत्सव कार्यक्रम में पहुंचे एम्स निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया। डॉ. गुलेरिया ने कहा कि चौथी औद्योगिक क्रांति भौतिक वास्तविकता (फिजिकल रियलिटी) से आभासी वास्तविकता (वर्चुअल रियलिटी) में स्थानांतरित हो गई है। 
 

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AIIMS Director Dr. Guleria said – Research is a triangle of influence on science, technology and humanities
डॉ. रणदीप गुलेरिया, निदेशक, दिल्ली एम्स - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

अनुसंधान मूल रूप से विज्ञान, प्रौद्योगिकी और मानविकी पर प्रभाव का त्रिकोण है। विज्ञान के विभिन्न क्षेत्रों में अपार विकास हुआ है। हालांकि, इसने असमानता और नैतिकता के विभिन्न प्रश्नों को भी जन्म दिया है, जिन्हें संतुलित करना महत्वपूर्ण है। उक्त बातें एम्स निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया ने कही। वह बुधवार को अंबेडकर विश्वविद्यालय में आयोजित शोध उत्सव कार्यक्रम में बोल रहे थे। 

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  डॉ. गुलेरिया ने कहा कि चौथी औद्योगिक क्रांति भौतिक वास्तविकता (फिजिकल रियलिटी) से आभासी वास्तविकता (वर्चुअल रियलिटी) में स्थानांतरित हो गई है। इस औद्योगिक क्रांति का विकास और विस्तार पिछली क्रांति की तुलना में तेज है और इसका अधिक प्रभाव पड़ा है। उन्होंने कहा कि शोधकर्ताओं को इसके प्रभाव को देखकर अध्ययन करना चाहिए। हालांकि, इन सभी विकास के साथ हम विज्ञान की कला से दूर जा रहे हैं।
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गुलेरिया ने कहा कि उन्नत तकनीक को पर्यावरण की स्थिति व जलवायु परिस्थितियों को सामाजिक मूल्यों में मिलाना होगा नहीं तो विकास पर असर पड़ेगा। उन्होंने कहा कि नई सदी में मानव जाति के विकास के साथ नई समस्याओं का भी जन्म हुआ है। पिछले 22 वर्षों से  लोगों ने दो महामारी और विभिन्न वायरस का प्रकोप देखा है। यह व्यापार में वृद्धि, यात्रा, कनेक्टिविटी और नए स्थानों पर अतिक्रमण के कारण हुआ है। इसलिए एक स्वास्थ्य के अवधारणा की आवश्यकता है। एक स्वास्थ्य न केवल इंसानों के स्वास्थ्य पर बल्कि जानवरों, पर्यावरण और धरती के स्वास्थ्य पर भी असरदार है। 
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शोध उत्सव में कुलपति प्रो. अनु सिंह लाठेर ने कहा कि शोध कार्य का उद्देश्य लोगों की वास्तविक समस्याओं तक पहुंचना है। उन्होंने कहा कि एसटीईएम (विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित) से स्टीम (विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग, कला और गणित) में  बदलाव हो रहा है, जिससे कला और मानविकी को एक क्षेत्र में लाया जा रहा है।


कुलपति ने कहा कि आज भारत में 100 से अधिक यूनिकॉर्न हैं। यह इंटरनेट की पहुंच, स्टार्ट अप को समर्थन, ऑफलाइन से ऑनलाइन लेनदेन में बदलाव के कारण संभव हो पाया है। आज हम औद्योगिक क्रांति 4.0 के युग में हैं। अनुसंधान के क्षेत्र में लाभ और आगे बढ़ने के लिए इको सिस्टम अभी उपयुक्त है।उन्होंने कहा कि अनुसंधान के कुछ उभरते क्षेत्र एआई, प्रो-बायोटिक्स और जैव-प्रौद्योगिकी हैं। 

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