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एग्रीगेटर स्कीम 2021: पीक ऑवर्स में मनमाना किराया नहीं वसूल पाएंगी कैब कंपनियां, नई नीति में रहेगा ये नियम
Tue, 25 Jan 2022 02:24 AM IST
Vikas Kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Vikas Kumar
Updated Tue, 25 Jan 2022 02:24 AM IST
सार
दिल्ली के परिवहन मंत्री कैलाश गहलोत ने कहा कि मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल के नेतृत्व में हम ईवी नीति के सफल क्रियान्वयन के अपने वादों को पूरा कर रहे हैं। दिल्ली देश का पहला राज्य है, जहां राइड एग्रीगेटर्स और डिलीवरी सेवाओं के लिए ईवी को अनिवार्य कर दिया गया है।
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कैलाश गहलोत
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
दिल्ली सरकार ने एग्रीगेटर स्कीम 2021 पर चर्चा और परामर्श के लिए सोमवार को एक वर्चुअल कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया। इसमें फैसला लिया गया कि अब दिल्ली में मोबाइल एप आधारित टैक्सी संचालक कंपनियां मांग (पीक डिमांड ऑवर्स) बढ़ने पर किराया (सर्ज प्राइसिंग) नहीं बढ़ा पाएंगी। साथ ही सर्ज प्राइसिंग सरकार की ओर से तय बेस फेयर के दोगुना से ज्यादा नहीं होना चाहिए। इसके अलावा एप आधारित टैक्सी कंपनियों को अपने बेड़े में इलेक्ट्रिक वाहन भी शामिल करने होंगे।
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इससे पहले देखा गया है कि एप आधारित टैक्सी कंपनियां मांग बढ़ने पर अपना किराया बढ़ा दिया करती हैं। इस पर रोक लगाने के लिए सरकार के पास कोई प्रावधान नहीं था लेकिन अब सरकार ने इस पर अंकुश लगाने के लिए प्रावधान बना दिया है। इस प्रावधान के अंतर्गत अब बेस किराया सरकार तय करेगी। इसके आधार पर ही सर्ज प्राइसिंग होगी।
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सरकार ने यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्रावधान बनाया है कि कैब की रीयल टाइम लोकेशन और शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई के लिए 24 घंटे काम करने वाला नियंत्रण कक्ष बनाना अनिवार्य होगा। साथ ही कैब में पैनिक बटन अनिवार्य होगा और 3.5 से कम रेटिंग वाले ड्राइवरों को एग्रीगेटर्स द्वारा प्रशिक्षण के लिए भेजना होगा। इसके अलावा कंपनी के लिए जो भी चालाक कैब चला रहा है उसकी पूरी जानकारी परिवहन विभाग के साथ साझा करनी होगी। यह योजना की अधिसूचना जारी होने के तीन माह के अंदर करना होगा।
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एग्रीगेटर के लिए ई-वाहन खरीदना अनिवार्य
वर्चुअल मीटिंग के दौरान दिल्ली सरकार के एग्रीगेटर स्कीम-2021 के विभिन्न पहलुओं पर प्रकाश डाला गया। दिल्ली सरकार का लक्ष्य है कि योजना की शुरुआती तीन महीने में एग्रीगेटर्स की तरफ से नए दोपहिया और तिपहिया वाहनों का 10 फीसद वाहन इलेक्ट्रिक हो। योजना के पहले वर्ष में एग्रीगेटर्स के बेड़े में 50 फीसदी दोपहिया और तिपहिया वाहनों का होना अनिवार्य है। इसी तरह शुरुआाती तीन महीने में पांच फीसदी चार पहिया वाहनों को इलेक्ट्रिक में बदलना होगा। पहले वर्ष में बेड़े में शामिल होने वाले 25 फीसदी चार पहिया वाहनों का इलेक्ट्रिक होना अनिवार्य होगा।
बैठक में दिल्ली के परिवहन मंत्री कैलाश गहलोत ने कहा कि मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल के नेतृत्व में हम ईवी नीति के सफल क्रियान्वयन के अपने वादों को पूरा कर रहे हैं। दिल्ली देश का पहला राज्य है, जहां राइड एग्रीगेटर्स और डिलीवरी सेवाओं के लिए ईवी को अनिवार्य कर दिया गया है। हाल ही में एक वेबसाइट भी लॉन्च की गई है।
ईवी तंत्र में साझेदारी और सहयोग की आवश्यकता पर प्रकाश डालते हुए परिवहन विभाग के प्रमुख सचिव-सह-आयुक्त आशीष कुंद्रा ने कहा कि हम बढ़ते वायु प्रदूषण के मुद्दे को हल करने के लिए शहर में इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध हैं। इस पूरी प्रक्रिया को आसान रखना चाहते हैं। ड्राफ्ट योजना दिल्ली सरकार के इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने की प्रतिबद्धता को दर्शाती है। इस योजना पर प्राप्त प्रतिक्रिया और सुझावों से हमें इन इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए अनुकूल वातावरण बनाने में मदद मिलेगी।