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मनीष सिसोदिया के साथ आरोपी पक्ष मुकदमे में जानबूझकर कर रहे देरी : ईडी
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ईडी ने आबकारी नीति मामले में मनीष सिसोदिया की जमानत याचिका का किया विरोध
अदालत ने मामले की अगली सुनवाई बुधवार के लिए स्थगित की
नितिन राजपूत
नई दिल्ली। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने शनिवार को अदालत को बताया कि दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया सहित अन्य आरोपी आबकारी नीति मामले में मुकदमे में जानबूझकर देरी कर रहे हैं। ईडी पक्ष की ओर से वकील जोहेब हुसैन ने सिसोदिया की ओर से दायर जमानत याचिका का विरोध किया। साथ ही, राउज एवेन्यू कोर्ट की विशेष न्यायाधीश कावेरी बावेजा के सामने अपनी दलीलें दीं। वहीं, अधिवक्ता मोहित माथुर ने सिसोदिया की ओर से इस पर बहस की। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई बुधवार के लिए स्थगित की है।
हुसैन ने अदालत को बताया कि मुकदमे में देरी की सबसे बड़ी वजह भी सिसोदिया की ओर से लगातार जमानत की मांग करना है। उन्होंने कहा कि मामले में देरी आरोपी पक्ष के कारण हो रही है। ईडी की तरफ से कोई समस्या नहीं आ रही है। आरोपियों की तरफ से अब तक 95 आवेदन दायर किए जा चुके हैं। इनमें से सिसोदिया की तरफ से 6 आवेदन दायर किए गए। यह ईडी का समय बर्बाद करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
मनी लॉन्ड्रिंग का अपराध सिसोदिया के बिना संभव नहीं हो सकता था : ईडी
हुसैन ने कहा कि सिसोदिया उस शराब नीति के लिए जिम्मेदार थे, जिसे कई आरोपी व्यक्तियों द्वारा अपराध की लूटी गई आय को स्थापित करने और थोक लाभ को बढ़ाने के उद्देश्य से तैयार किया था। हुसैन ने सिसोदिया की जमानत याचिका का विरोध करते हुए यह भी दलीलें दीं कि आबकारी नीति मामले में मनी लॉन्ड्रिंग का अपराध सिसोदिया के बिना संभव नहीं हो सकता था। ईडी ने आरोप लगाया कि थोक वितरकों ने 581 करोड़ रुपये की निश्चित फीस हासिल की थी। इससे नई आबकारी नीति में मुनाफा 5 से बढ़कर 12 प्रतिशत हो गया था, जिसे बाद में खत्म किया गया। थोक विक्रेताओं की ओर से कमाए गए बड़े मुनाफे के चलते ही सुप्रीम कोर्ट ने अक्तूबर में सिसोदिया की याचिका खारिज की थी। ईडी ने अदालत को बताया कि ये अतिरिक्त मुनाफा करीब 338 करोड़ रुपये का था।
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विजय नायर के सिसोदिया से थे गहरे संपर्क : ईडी
हुसैन ने अदालत को बताया कि अपराध के सबूत नष्ट कर दिए गए हैं। विजय नायर सिसोदिया और आम आदमी पार्टी के अन्य बड़े नेताओं के निर्देशों के तहत काम कर रहे थे। नायर आप का कोई सामान्य कार्यकर्ता नहीं, बल्कि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के करीबी सहयोगी थे और उनका सिसोदिया के साथ गहरा संपर्क था। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई बुधवार के लिए स्थगित की है।
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अदालत ने मामले की अगली सुनवाई बुधवार के लिए स्थगित की
नितिन राजपूत
नई दिल्ली। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने शनिवार को अदालत को बताया कि दिल्ली के पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया सहित अन्य आरोपी आबकारी नीति मामले में मुकदमे में जानबूझकर देरी कर रहे हैं। ईडी पक्ष की ओर से वकील जोहेब हुसैन ने सिसोदिया की ओर से दायर जमानत याचिका का विरोध किया। साथ ही, राउज एवेन्यू कोर्ट की विशेष न्यायाधीश कावेरी बावेजा के सामने अपनी दलीलें दीं। वहीं, अधिवक्ता मोहित माथुर ने सिसोदिया की ओर से इस पर बहस की। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई बुधवार के लिए स्थगित की है।
हुसैन ने अदालत को बताया कि मुकदमे में देरी की सबसे बड़ी वजह भी सिसोदिया की ओर से लगातार जमानत की मांग करना है। उन्होंने कहा कि मामले में देरी आरोपी पक्ष के कारण हो रही है। ईडी की तरफ से कोई समस्या नहीं आ रही है। आरोपियों की तरफ से अब तक 95 आवेदन दायर किए जा चुके हैं। इनमें से सिसोदिया की तरफ से 6 आवेदन दायर किए गए। यह ईडी का समय बर्बाद करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
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मनी लॉन्ड्रिंग का अपराध सिसोदिया के बिना संभव नहीं हो सकता था : ईडी
हुसैन ने कहा कि सिसोदिया उस शराब नीति के लिए जिम्मेदार थे, जिसे कई आरोपी व्यक्तियों द्वारा अपराध की लूटी गई आय को स्थापित करने और थोक लाभ को बढ़ाने के उद्देश्य से तैयार किया था। हुसैन ने सिसोदिया की जमानत याचिका का विरोध करते हुए यह भी दलीलें दीं कि आबकारी नीति मामले में मनी लॉन्ड्रिंग का अपराध सिसोदिया के बिना संभव नहीं हो सकता था। ईडी ने आरोप लगाया कि थोक वितरकों ने 581 करोड़ रुपये की निश्चित फीस हासिल की थी। इससे नई आबकारी नीति में मुनाफा 5 से बढ़कर 12 प्रतिशत हो गया था, जिसे बाद में खत्म किया गया। थोक विक्रेताओं की ओर से कमाए गए बड़े मुनाफे के चलते ही सुप्रीम कोर्ट ने अक्तूबर में सिसोदिया की याचिका खारिज की थी। ईडी ने अदालत को बताया कि ये अतिरिक्त मुनाफा करीब 338 करोड़ रुपये का था।
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विजय नायर के सिसोदिया से थे गहरे संपर्क : ईडी
हुसैन ने अदालत को बताया कि अपराध के सबूत नष्ट कर दिए गए हैं। विजय नायर सिसोदिया और आम आदमी पार्टी के अन्य बड़े नेताओं के निर्देशों के तहत काम कर रहे थे। नायर आप का कोई सामान्य कार्यकर्ता नहीं, बल्कि मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के करीबी सहयोगी थे और उनका सिसोदिया के साथ गहरा संपर्क था। अदालत ने मामले की अगली सुनवाई बुधवार के लिए स्थगित की है।