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जेएनयू पहुंचे अभिजीत, पहले खाया उत्तपम फिर बनाई अंडा भुर्जी
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नई दिल्ली। 36 साल पहले जेएनयू कैंपस से ऐसा नाता जुड़ा कि आज भी यादें ताजा हैं। देर रात तक पढ़ाई के बाद दोस्तों संग ढाबे पर चाय पीना और अंडे की भुर्जी के साथ देश-दुनिया के मुद्दों पर बेबाक चर्चा। आज कैंपस में आकर फिर से धुंधली यादें जेहन को तरोताजा कर गईं हैं। दुनिया बेशक बदली हो पर नहीं बदली तो कैंपस की सादगी, बेबाकी के साथ हर मुद्दे पर चर्चा, हरियाली, ढाबे पर चाय और अंडे की भुर्जी। आज में 36 साल पहले वाला अभिजीत बन गया हूं। अर्थशास्त्र में नोबेल विजेता भारतीय मूल के अमेरिकी नागरिक अभिजीत बनर्जी शनिवार सुबह जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय कैंपस पहुंचे और इस दौरान छात्रों-शिक्षकोें के साथ यादें साझा करते हुए यह बातें कहीं। अभिजीत ने कुलपति कार्यालय के नीचे (प्रशासनिक ब्लॉक), लाइब्रेरी कैंटीन ढाबा व ब्रह्मपुत्र हॉस्टल का दौरा किया।
ढाबे में गए और बन गए शेफ
लाइब्रेरी कैंटीन ढाबा के अजय गोपालन ने बताया कि ग्रे शर्ट और नीली पेंट पहने आम से दिखने वाले अभिजीत बनर्जी जब ढाबे पर पहुंचे तो हम लोगों ने समझा कि कोई प्रोफेसर होंगे। बेहद साधारण दिखने वाले शख्स के बारे में जानकर जब वहां भीड़ बढ़ी तो पता चला कि यह तो जेएनयू के पूर्व छात्र अभिजीत बनर्जी हैं, जिन्हें अर्थशास्त्र में नोबेल पुरस्कार मिला है। अभिजीत ने बेहद सादगी के साथ ढाबे के बाहर सीमेंट से निर्मित कुर्सी और साधारण से टेबल पर बैठ सबसे पहले प्याज उत्तपम खाया और इसके बाद ढाबे के अंदर आकर खुद शेफ की तर्ज पर अंडा फेंटा और भुर्जी बनाकर खाई।
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ब्रह्मपुत्र हॉस्टल में यादें ताजा करने के साथ खेला टेनिस
अभिजीत बनर्जी 1983 में ब्रह्मपुत्र हॉस्टल में रहते थे। शनिवार को वह इसी हॉस्टल पहुंचे और लॉन में छात्रों संग टेनिस भी खेला। इस दौरान वे कुछ शिक्षकों से भी मिले।
सोमवार या मंगलवार को पीएम से कर सकते हैं मुलाकात
सूत्रों के मुताबिक, अभिजीत बनर्जी सोमवार या मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर सकते हैं। इससे पहले शुक्रवार आधी रात बाद वे भारत पहुंचे और सीधे गुरुग्राम में अपने भाई के घर चले गए। शनिवार सुबह जेएनयू और उसके बाद सीधे घर। शाम को अपने एनजीओ (जीपीएएल फाउंडेशन) पर बैठक ली। रविवार को वे परिवार के साथ बिताएंगे। दिल्ली में सोमवार को उनकी लिखी पुस्तक ‘गुड इॅकोनोमिक्स फॉर हार्ड टाइम्स: बेटर आंसर टू ऑवर बिगेस्ट प्रॉब्लम ’ का विमोचन होगा। इसकी टेलीकॉस्ट का अधिकार एक निजी टीवी चैनल को दिया गया है। इससे मिलने वाला पैसा उनके एनजीओ के ट्रस्ट को जाएगा। अभिजीत दिल्ली में किसी भी व्यक्ति से नहीं मिल रहे हैं। उन्होंने भारत आने से पहले ही सारा शेड्यूल फिक्स कर रखा है। मंगलवार को वे अपनी मां से मिलने कोलकाता जाएंगे। बता दें कि अभिजीत बनर्जी उनकी पत्नी ऐस्थेर डफ्लो और माइकल क्रेमर को 2019 के नोबल सम्मान से नवाजा गया है।
तीनों अर्थशास्त्रियों को वैश्विक गरीबी को खत्म करने के लिए किए गए उनके शोध पर यह सम्मान दिया गया है।
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ढाबे में गए और बन गए शेफ
लाइब्रेरी कैंटीन ढाबा के अजय गोपालन ने बताया कि ग्रे शर्ट और नीली पेंट पहने आम से दिखने वाले अभिजीत बनर्जी जब ढाबे पर पहुंचे तो हम लोगों ने समझा कि कोई प्रोफेसर होंगे। बेहद साधारण दिखने वाले शख्स के बारे में जानकर जब वहां भीड़ बढ़ी तो पता चला कि यह तो जेएनयू के पूर्व छात्र अभिजीत बनर्जी हैं, जिन्हें अर्थशास्त्र में नोबेल पुरस्कार मिला है। अभिजीत ने बेहद सादगी के साथ ढाबे के बाहर सीमेंट से निर्मित कुर्सी और साधारण से टेबल पर बैठ सबसे पहले प्याज उत्तपम खाया और इसके बाद ढाबे के अंदर आकर खुद शेफ की तर्ज पर अंडा फेंटा और भुर्जी बनाकर खाई।
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ब्रह्मपुत्र हॉस्टल में यादें ताजा करने के साथ खेला टेनिस
अभिजीत बनर्जी 1983 में ब्रह्मपुत्र हॉस्टल में रहते थे। शनिवार को वह इसी हॉस्टल पहुंचे और लॉन में छात्रों संग टेनिस भी खेला। इस दौरान वे कुछ शिक्षकों से भी मिले।
सोमवार या मंगलवार को पीएम से कर सकते हैं मुलाकात
सूत्रों के मुताबिक, अभिजीत बनर्जी सोमवार या मंगलवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात कर सकते हैं। इससे पहले शुक्रवार आधी रात बाद वे भारत पहुंचे और सीधे गुरुग्राम में अपने भाई के घर चले गए। शनिवार सुबह जेएनयू और उसके बाद सीधे घर। शाम को अपने एनजीओ (जीपीएएल फाउंडेशन) पर बैठक ली। रविवार को वे परिवार के साथ बिताएंगे। दिल्ली में सोमवार को उनकी लिखी पुस्तक ‘गुड इॅकोनोमिक्स फॉर हार्ड टाइम्स: बेटर आंसर टू ऑवर बिगेस्ट प्रॉब्लम ’ का विमोचन होगा। इसकी टेलीकॉस्ट का अधिकार एक निजी टीवी चैनल को दिया गया है। इससे मिलने वाला पैसा उनके एनजीओ के ट्रस्ट को जाएगा। अभिजीत दिल्ली में किसी भी व्यक्ति से नहीं मिल रहे हैं। उन्होंने भारत आने से पहले ही सारा शेड्यूल फिक्स कर रखा है। मंगलवार को वे अपनी मां से मिलने कोलकाता जाएंगे। बता दें कि अभिजीत बनर्जी उनकी पत्नी ऐस्थेर डफ्लो और माइकल क्रेमर को 2019 के नोबल सम्मान से नवाजा गया है।
तीनों अर्थशास्त्रियों को वैश्विक गरीबी को खत्म करने के लिए किए गए उनके शोध पर यह सम्मान दिया गया है।