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कोविड-19: गांवों में पैदा कर सकता है भयावह स्थिति, बचने का है केवल यह उपाय
Wed, 05 Aug 2020 06:56 AM IST
Kuldeep Singh
जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली
जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Kuldeep Singh
Updated Wed, 05 Aug 2020 06:56 AM IST
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कोरोना वायरस
- फोटो : iStock
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कोविड-19 अब गांवों में पहुंच रहा है। अगर वहां इसकी रोकथाम जल्द नहीं की गई तो यह भयावह स्थिति पैदा कर सकता है। चूंकि ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं का स्तर शहरों के मुकाबले काफी नीचे है, ऐसी स्थिति में वहां मौजूदा संसाधनों के जरिए ही कोरोना वायरस का मुकाबला करना होगा। विश्व स्वास्थ्य संगठन का भी कहना है कि भारत के ग्रामीण इलाकों में कोविड-19 के केस बढ़ने की वजह से स्थिति भयावह हो सकती है।
देश के सबसे बड़े कोविड केयर सेंटर पर मरीजों का इलाज कर चुके डॉ. राजकुमार कहते हैं कि गांव में कोरोना से बचने के लिए लोगों को अपने स्तर ही कदम आगे बढ़ाना है। सोशल डिस्टेंसिंग, हैंडवाश और मास्क, यदि ये तीनों काम ईमानदारी के साथ कर लेते हैं तो बहुत हद तक कोरोना से बच सकते हैं। खाने में भी कोई खास भोजन नहीं चाहिए, बहुत सामान्य सा भोजन लेना होगा, जो कहीं भी उपलब्ध हो जाएगा।
डॉ. राजकुमार के मुताबिक, बहुत से इलाकों में कोरोना के केस तेजी से बढ़ रहे हैं। भले ही सरकार ने हेल्पलाइन सेवा शुरु की है, लेकिन हर इलाके में यह लोगों की मदद नहीं कर पा रही। दिल्ली जैसे मेट्रो सिटी में फोन उठ जाता है, लेकिन दूसरे राज्यों के अनेक गांव ऐसे हैं, जहां लोगों को इस हेल्पलाइन का पता भी नहीं है। किसी का फोन लग जाए तो यह गारंटी नहीं कि सामने वाला उसकी बात समझेगा। लाइनें व्यस्त हैं, ये शब्द भी लोगों को परेशानी देते हैं। अगर ग्रामीण इलाकों में दो तीन सार्वजनिक जगहों पर प्लस ऑक्सीमीटर की सुविधा शुरु हो जाए तो ग्रामीण वहां पहुंचकर अपनी एक जांच तो कर ही सकते हैं। यदि इस जांच का स्तर 94 से ऊपर है तो अस्पताल में दिखाओ, अन्यथा आपके स्वस्थ होने की पूरी संभावना बनी रहती है।
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ग्रामीण इलाकों में जो लैब सिस्टम है, वह अभी तेजी नहीं पकड़ पा रहा है। कई राज्य ऐसे हैं, जहां दो सप्ताह में फुल टेस्ट रिपोर्ट आ रही है। हो सकता है कि जब तक रिपोर्ट आए, मरीज खुद ही ठीक हो जाए। यह भी होता है कि रिपोर्ट सब सही बताती है, लेकिन जब तक वह मरीज के हाथ में आती है उसे दिक्कत होने लगती है।
गांवों में यदि सोशल डिस्टेंसिंग, हैंडवॉश और मास्क, इन तीन बातों का पालन हो जाए तो कोरोना को मात दी जा सकती है। गांव में हल्दी वाला दूध पीयें।यह सबसे जरुरी है। हर जगह पर मिल भी जाएगा। इन सब बातों के साथ साथ एक बार किसी अनुभवी डॉक्टर से अवश्य जांच करा लें या फोन पर सलाह लें।
देश में प्रति 10 लाख की आबादी पर कोरोना जांच की संख्या 15,119 है।गोवा में यह संख्या 84 हजार, दिल्ली में 57 हजार और त्रिपुरा में 40 हजार बताई है। अब तक 12 लाख से अधिक मरीज ठीक हो चुके हैं। खास बात यह है कि ठीक होने वाले मरीजों की संख्या सक्रिय मामलों से करीब दोगुना है। कोरोना की वजह से होने वाली मृत्यु दर 2.10 फीसदी है। यह लगातार गिर रही है। कोरोना वायरस के चलते 68 फीसदी पुरुषों की और 32 फीसदी महिलाओं की मौत हुई है।
10 फीसदी से कम सकारात्मकता वाले राज्यों में पंजाब, राजस्थान, मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, असम, पश्चिम बंगाल और कर्नाटक हैं। देश में पांच लाख 86 हजार 298 सक्रिय मामले हैं।
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देश के सबसे बड़े कोविड केयर सेंटर पर मरीजों का इलाज कर चुके डॉ. राजकुमार कहते हैं कि गांव में कोरोना से बचने के लिए लोगों को अपने स्तर ही कदम आगे बढ़ाना है। सोशल डिस्टेंसिंग, हैंडवाश और मास्क, यदि ये तीनों काम ईमानदारी के साथ कर लेते हैं तो बहुत हद तक कोरोना से बच सकते हैं। खाने में भी कोई खास भोजन नहीं चाहिए, बहुत सामान्य सा भोजन लेना होगा, जो कहीं भी उपलब्ध हो जाएगा।
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डॉ. राजकुमार के मुताबिक, बहुत से इलाकों में कोरोना के केस तेजी से बढ़ रहे हैं। भले ही सरकार ने हेल्पलाइन सेवा शुरु की है, लेकिन हर इलाके में यह लोगों की मदद नहीं कर पा रही। दिल्ली जैसे मेट्रो सिटी में फोन उठ जाता है, लेकिन दूसरे राज्यों के अनेक गांव ऐसे हैं, जहां लोगों को इस हेल्पलाइन का पता भी नहीं है। किसी का फोन लग जाए तो यह गारंटी नहीं कि सामने वाला उसकी बात समझेगा। लाइनें व्यस्त हैं, ये शब्द भी लोगों को परेशानी देते हैं। अगर ग्रामीण इलाकों में दो तीन सार्वजनिक जगहों पर प्लस ऑक्सीमीटर की सुविधा शुरु हो जाए तो ग्रामीण वहां पहुंचकर अपनी एक जांच तो कर ही सकते हैं। यदि इस जांच का स्तर 94 से ऊपर है तो अस्पताल में दिखाओ, अन्यथा आपके स्वस्थ होने की पूरी संभावना बनी रहती है।
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ग्रामीण इलाकों में जो लैब सिस्टम है, वह अभी तेजी नहीं पकड़ पा रहा है। कई राज्य ऐसे हैं, जहां दो सप्ताह में फुल टेस्ट रिपोर्ट आ रही है। हो सकता है कि जब तक रिपोर्ट आए, मरीज खुद ही ठीक हो जाए। यह भी होता है कि रिपोर्ट सब सही बताती है, लेकिन जब तक वह मरीज के हाथ में आती है उसे दिक्कत होने लगती है।
गांवों में यदि सोशल डिस्टेंसिंग, हैंडवॉश और मास्क, इन तीन बातों का पालन हो जाए तो कोरोना को मात दी जा सकती है। गांव में हल्दी वाला दूध पीयें।यह सबसे जरुरी है। हर जगह पर मिल भी जाएगा। इन सब बातों के साथ साथ एक बार किसी अनुभवी डॉक्टर से अवश्य जांच करा लें या फोन पर सलाह लें।
देश में प्रति 10 लाख की आबादी पर कोरोना जांच की संख्या 15,119 है।गोवा में यह संख्या 84 हजार, दिल्ली में 57 हजार और त्रिपुरा में 40 हजार बताई है। अब तक 12 लाख से अधिक मरीज ठीक हो चुके हैं। खास बात यह है कि ठीक होने वाले मरीजों की संख्या सक्रिय मामलों से करीब दोगुना है। कोरोना की वजह से होने वाली मृत्यु दर 2.10 फीसदी है। यह लगातार गिर रही है। कोरोना वायरस के चलते 68 फीसदी पुरुषों की और 32 फीसदी महिलाओं की मौत हुई है।
10 फीसदी से कम सकारात्मकता वाले राज्यों में पंजाब, राजस्थान, मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, असम, पश्चिम बंगाल और कर्नाटक हैं। देश में पांच लाख 86 हजार 298 सक्रिय मामले हैं।