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फ्लैट देने का झांसा देकर करोड़ों की ठगी, दो निदेशक गिरफ्तार
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नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने आवासीय परियोजना में फ्लैट देने का झांसा देकर निवेशकों से पांच करोड़ की ठगी करने वाले एक कंपनी के निदेशक दो सगे भाइयों को गिरफ्तार किया है। कंपनी ने यमुना एक्सप्रेसवे, ग्रेटर नोएडा और नोएडा में फ्लैट देने का वादा किया था। निदेशकों पर दिल्ली, नोएडा और मुजफ्फरनगर में फर्जीवाड़े के 13 मामले दर्ज हैं।
शाखा के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त आरके सिंह ने बताया कि आरोपियों की पहचान न्यू राजेंद्र नगर निवासी निशांत मुत्तरेजा (45) और ईस्ट पटेल नगर निवासी सुशांत मुत्तरेजा (42) के रूप में हुई है। वर्ष 2017 में 40 निवेशकों ने शाखा में शिकायत की थी। जिसमें बताया कि कॉस्मिक स्ट्रक्चर्स लिमिटेड के निदेशकों ने आवासीय परियोजना में फ्लैट देने का वादा किया। निदेशकों ने बताया कि अर्बन यंग के नाम से प्रोजेक्ट के तहत फ्लैट बनाए जा रहे हैं। उन्होंने आगामी दो साल में फ्लैट देने का वादा किया। जिस पर विश्वास कर 40 निवेशकों ने पांच करोड़ रुपये का निवेश कर दिया।
जांच में पता चला कि आरोपियों ने संबंधित प्राधिकरण द्वारा नक्शा योजना की स्वीकृति से पहले ही परियोजना का शुभारंभ किया और बुकिंग शुरू कर दी लेकिन फ्लैट का निर्माण नहीं हो पाया। निदेशकों ने निवेशकों को न ही फ्लैट मुहैया करवाया और न ही पैसे ही वापस किए। शाखा ने बुधवार को दोनों निदेशकों को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में पता चला कि आरोपी का रियल एस्टेट का कारोबार था। दोनों इस कंपनी के अलावा अन्य कंपनियों के निदेशक थे। इस तरह के धोखाधड़ी करने के लिए उनके खिलाफ कई मामले दर्ज हैं।
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शाखा के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त आरके सिंह ने बताया कि आरोपियों की पहचान न्यू राजेंद्र नगर निवासी निशांत मुत्तरेजा (45) और ईस्ट पटेल नगर निवासी सुशांत मुत्तरेजा (42) के रूप में हुई है। वर्ष 2017 में 40 निवेशकों ने शाखा में शिकायत की थी। जिसमें बताया कि कॉस्मिक स्ट्रक्चर्स लिमिटेड के निदेशकों ने आवासीय परियोजना में फ्लैट देने का वादा किया। निदेशकों ने बताया कि अर्बन यंग के नाम से प्रोजेक्ट के तहत फ्लैट बनाए जा रहे हैं। उन्होंने आगामी दो साल में फ्लैट देने का वादा किया। जिस पर विश्वास कर 40 निवेशकों ने पांच करोड़ रुपये का निवेश कर दिया।
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जांच में पता चला कि आरोपियों ने संबंधित प्राधिकरण द्वारा नक्शा योजना की स्वीकृति से पहले ही परियोजना का शुभारंभ किया और बुकिंग शुरू कर दी लेकिन फ्लैट का निर्माण नहीं हो पाया। निदेशकों ने निवेशकों को न ही फ्लैट मुहैया करवाया और न ही पैसे ही वापस किए। शाखा ने बुधवार को दोनों निदेशकों को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में पता चला कि आरोपी का रियल एस्टेट का कारोबार था। दोनों इस कंपनी के अलावा अन्य कंपनियों के निदेशक थे। इस तरह के धोखाधड़ी करने के लिए उनके खिलाफ कई मामले दर्ज हैं।
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