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एल्युमिनी और सिबलिंग के अंक बिगाड़ रहे खेल
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नर्सरी दाखिला..
एल्युमिनी और सिबलिंग के अंक बिगाड़ रहे खेल
-कई स्कूल पूर्व छात्र व भाई-बहन के लिए दे रहे हैं 10 से 35 अंक
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। निजी स्कूलों में दाखिले के लिए जारी नर्सरी की रेस में एल्युमिनी (पूर्व छात्र) व सिबलिंग (भाई-बहन) जैसे मानक अन्य बच्चों के दाखिले की राह को मुश्किल बना रहा है। ऐसे कई निजी स्कूल हैं, जिन्होंने अपने मानकों में इन मानकों को प्रमुखता से शामिल किया है। पड़ोस मानक के बाद यह ही दो मानक ऐसे हैं जिन्हें स्कूल अधिकतम अंक दे रहे हैैं। इन मानकों के कारण ऐसे अभिभावकों को परेशानी हो रही है जिनके पहले बच्चे का दाखिला नर्सरी में होना है।
राजधानी के कई स्कूल ऐसे हैं, जहां एल्युमिनी और सिबलिंग को मिलाकर सबसे ज्यादा अंक दिए जा रहे हैं। अब जो अभिभावकों के स्कूल में उनका पहला बच्चा नहीं पढ़ रहा तो सीधे-सीधे उन्हें इन मानकों के अंकों का नुकसान हो रहा है। अभिभावकों की शिकायत है कि इस तरह से वंशवाद के कारण उनके बच्चे अच्छे स्कूल में कैसे पढ़ पाएंगे। एक अभिभावक सुमित ने कहा कि यह बिल्कुल वैसा है जैसे डॉक्टर का बेटा डॉक्टर, इंजीनियर का बेटा इंजीनियर व अभिनेता का बच्चा अभिनेता बनता है।
स्कूलों के मानकों में दिए गए अंकों को देखें तो वेंकटेश्वर इंटरनेशनल स्कूल सिबलिंग के लिए 35 व अभिभावक एल्युमिनी के लिए 10 अंक दे रहा है। हैप्पी मॉडल स्कूल सिबलिंग के लिए 15 अंक, सचदेवा पब्लिक स्कूल सिबलिंग के लिए 25 व एल्युमनी के लिए 15 अंक दे रहा है। दिल्ली इंटरनेशनल स्कूल में सिबलिंग को 20 अंक दिए जा रहे हैं। माउंट आबू स्कूल सिबलिंग के लिए 20 व एल्युमिनी के लिए 10 अंक दे रहा है। सेंट जेवियर स्कूल ने सिबलिंग व एल्युुमनी को 10-10 अंक दिए हैं। एसडी पब्लिक स्कूल सिबलिंग के लिए 20 व एल्युमिनी के लिए 15 अंक दे रहा है। अभिभावकों की शिकायत है कि इन मानकों के आधार पर दिए जा रहे अंकों के कारण अन्य अभिभावकों का अच्छे स्कूल में पढ़ने का सपना पूरा होता नहीं दिख रहा है।
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एल्युमिनी और सिबलिंग के अंक बिगाड़ रहे खेल
-कई स्कूल पूर्व छात्र व भाई-बहन के लिए दे रहे हैं 10 से 35 अंक
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। निजी स्कूलों में दाखिले के लिए जारी नर्सरी की रेस में एल्युमिनी (पूर्व छात्र) व सिबलिंग (भाई-बहन) जैसे मानक अन्य बच्चों के दाखिले की राह को मुश्किल बना रहा है। ऐसे कई निजी स्कूल हैं, जिन्होंने अपने मानकों में इन मानकों को प्रमुखता से शामिल किया है। पड़ोस मानक के बाद यह ही दो मानक ऐसे हैं जिन्हें स्कूल अधिकतम अंक दे रहे हैैं। इन मानकों के कारण ऐसे अभिभावकों को परेशानी हो रही है जिनके पहले बच्चे का दाखिला नर्सरी में होना है।
राजधानी के कई स्कूल ऐसे हैं, जहां एल्युमिनी और सिबलिंग को मिलाकर सबसे ज्यादा अंक दिए जा रहे हैं। अब जो अभिभावकों के स्कूल में उनका पहला बच्चा नहीं पढ़ रहा तो सीधे-सीधे उन्हें इन मानकों के अंकों का नुकसान हो रहा है। अभिभावकों की शिकायत है कि इस तरह से वंशवाद के कारण उनके बच्चे अच्छे स्कूल में कैसे पढ़ पाएंगे। एक अभिभावक सुमित ने कहा कि यह बिल्कुल वैसा है जैसे डॉक्टर का बेटा डॉक्टर, इंजीनियर का बेटा इंजीनियर व अभिनेता का बच्चा अभिनेता बनता है।
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स्कूलों के मानकों में दिए गए अंकों को देखें तो वेंकटेश्वर इंटरनेशनल स्कूल सिबलिंग के लिए 35 व अभिभावक एल्युमिनी के लिए 10 अंक दे रहा है। हैप्पी मॉडल स्कूल सिबलिंग के लिए 15 अंक, सचदेवा पब्लिक स्कूल सिबलिंग के लिए 25 व एल्युमनी के लिए 15 अंक दे रहा है। दिल्ली इंटरनेशनल स्कूल में सिबलिंग को 20 अंक दिए जा रहे हैं। माउंट आबू स्कूल सिबलिंग के लिए 20 व एल्युमिनी के लिए 10 अंक दे रहा है। सेंट जेवियर स्कूल ने सिबलिंग व एल्युुमनी को 10-10 अंक दिए हैं। एसडी पब्लिक स्कूल सिबलिंग के लिए 20 व एल्युमिनी के लिए 15 अंक दे रहा है। अभिभावकों की शिकायत है कि इन मानकों के आधार पर दिए जा रहे अंकों के कारण अन्य अभिभावकों का अच्छे स्कूल में पढ़ने का सपना पूरा होता नहीं दिख रहा है।
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