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हाईकोर्ट का फरमान : जेजे बोर्ड में पिछले एक वर्ष से ज्यादा अवधि से लंबित छोटे अपराधों के 1108 मामले बंद
Sat, 02 Oct 2021 06:15 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Sat, 02 Oct 2021 06:15 AM IST
सार
अदालत ने कहा चार माह में होनी चाहिए जांच, अब जांच जारी रखने का औचित्य नहीं।
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दिल्ली उच्च न्यायालय
- फोटो : ANI
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विस्तार
उच्च न्यायालय ने अपने एक अहम फैसले में बच्चों या किशोरों के खिलाफ छोटे-मोटे अपराधों संबंधी पिछले एक वर्ष से लंबित मामलों की जांच को खत्म करने का निर्देश दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि भले ही ऐसे बच्चे या किशोर को किशोर न्याय बोर्ड के समक्ष पेश किया गया हो लेकिन सभी के खिलाफ मामले बंद किए जाएं। इस निर्णय से करीब 1108 बच्चों के खिलाफ मुकदमे बंद हो जांएगे। इसके अलावा छह से एक वर्ष के बीच की लंबित जांच के संबंध में 795 बच्चों के मामलों का निर्णय अगली सुनवाई को होगा।
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न्यायमूर्ति सिद्घार्थ मृदुल व न्यायमूर्ति अनूप जयराम भंबानी की पीठ ने सभी छह किशोर अदालतों को इस संबंध में दो सप्ताह में औपचारिक आदेश पारित कर मुकदमों के बंद करने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू होगा। अदालत ने जेजे बोर्ड अधिनियम का हवाला देते हुए कहा कि जांच की तय समयसीमा खत्म होने के बाद जांच जारी रखने का कोई औचित्य नहीं है।
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इतना ही नहीं पीठ से दिल्ली सरकार व संबंधित किशोर अदालतों को पिछले छह माह से एक वर्ष के बीच के लंबित मामलों की रिपोर्ट भी पेश करने का निर्देश दिया है ताकि उन पर फैसला किया जा सके। अदालत ने इस बात पर गंभीर रवैया अपनाया कि राजधानी की छह किशोर अदालतों में 31 दिसंबर 2020 तक 1320 मामले लंबित थे और यह 30 जून 21 तक बढ़कर 1903 हो गए। इनमें से छोटे अपराध के 795 मामलों की जांच छह से एक वर्ष के बीच लंबित है और 1108 मामलों की जांच एक वर्ष से ज्यादा से लंबित है। अदालत को बताया गया कि पिछले छह माह में करीब 44 प्रतिशत मामलों की बढ़ोतरी हुई है।
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पीठ ने यह आदेश किशोर न्याय अधिनियम की धारा 14 के मद्देनजर पारित किया है। धारा 14 (2) में प्रावधान है कि बोर्ड के समक्ष बच्चे को पहली बार पेश करने की तारीख से 4 महीने की अवधि के भीतर जांच पूरी की जाएगी, जब तक कि अवधि को बोर्ड द्वारा अधिकतम 2 महीने की अवधि के लिए नहीं बढ़ाया जाता है।
धारा 14(4) में प्रावधान है कि यदि विस्तारित अवधि के बाद भी छोटे अपराधों के लिए बोर्ड द्वारा जांच अनिर्णायक रहती है, तो कार्यवाही समाप्त हो जाएगी।
अदालत ने कहा लंबे समय से लंबित मामले महामारी के कारण है जहां बच्चों को जेजे बोर्ड के सामने पेश नहीं किया गया। संबंधित पक्ष ने यह समझा कि धारा 14 में निर्धारित 4 महीने का समय जेजेबी के समक्ष बच्चे के पहली पेशी की तारीख के बाद शुरु होगा। यही कारण है कि छोटे-मोटे अपराधों से संबंधित सैकड़ों मामले विभिन्न चरणों में काफी समय से लंबित हैं।
अदालत ने स्पष्ट किया कि चूंकि धारा 14 के अनुसार 4 महीने की अवधि जेजेबी के लिए बच्चे के पहली पेशी की तारीख से शुरु होगी लेकिन हमारा मानना है कि यह तिथि उसी दिन से शुरु होनी चाहिए उसे पकड़ा गया हो या हिरासत में लिया गया हो। 24 घंटे में उसे बिना समय गंवाए जेजे बोर्ड के समक्ष पेश किया जाना जरूरी है।
पीठ ने दिल्ली सरकार को 19 दिनों में प्रत्येक किशोर न्याय बोर्ड में लंबित उन मामलों की जानकारी देने को कहा है कि जहां छह महीने से एक वर्ष के बीच की अवधि की जांच लंबित है। अदालत ने मामले की सुनवाई 12 अक्तूबर तय की है।
दरअसल जेजे बोर्ड में लंबित मामलों पर पीठ ने स्वयं संज्ञान लिया था। अदालत ने माना था कि एक गंभीर मामला है। पीठ ने दिल्ली बाल अधिकार संरक्षण आयोग (डीसीपीसीआर) सहित अन्य पक्षों से जवाब मांगा था। अदालत को बताया गया कि छोटे-छोटे अपराध संबंधी मामलों के चलते जेजे बोर्ड के पास लंबित मामलों की भरमार है और समय पर सुनवाई संभव नहीं हो पा रही।