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बच्चों के खिलाफ लंबित छोटे अपराधों के 1108 मामले बंद

Sat, 02 Oct 2021 01:03 AM IST
Noida Bureau नोएडा ब्यूरो
Updated Sat, 02 Oct 2021 01:03 AM IST
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1108 cases of pending minor crimes against children closed
नई दिल्ली। उच्च न्यायालय ने एक अहम फैसले में बच्चों या किशोरों के खिलाफ छोटे-मोटे अपराधों संबंधी पिछले एक वर्ष से लंबित मामलों की जांच बंद करने का निर्देश दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि भले ही ऐसे बच्चे या किशोर को किशोर न्याय बोर्ड के समक्ष पेश किया गया हो, सभी के खिलाफ मामले बंद किए जाएं। इस निर्णय से करीब 1108 बच्चों के खिलाफ मुकदमे बंद हो जाएंगे। इसके अलावा छह माह से एक वर्ष के बीच की लंबित जांच के संबंध में 795 बच्चों के मामलों का निर्णय अगली सुनवाई पर होगा।
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न्यायमूर्ति सिद्धार्थ मृदुल व न्यायमूर्ति अनूप जयराम भंभानी की पीठ ने सभी छह किशोर अदालतों को इस संबंध में दो सप्ताह में औपचारिक आदेश पारित कर मुकदमों को बंद करने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू होगा। अदालत ने जेजे बोर्ड अधिनियम का हवाला देते हुए कहा कि जांच की तय समय सीमा के बाद इसे जारी रखने का कोई औचित्य नहीं है।
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इतना ही नहीं पीठ से दिल्ली सरकार व संबंधित किशोर अदालतों को पिछले छह माह से एक वर्ष के बीच के लंबित मामलों की रिपोर्ट भी पेश करने का निर्देश दिया है। अदालत ने इस बात पर गंभीर रुख अपनाया कि राजधानी की छह किशोर अदालतों में 31 दिसंबर 2020 तक 1320 मामले लंबित थे। यह 30 जून 21 तक बढ़कर 1903 हो गए।
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इनमें से छोटे अपराध के 795 मामलों की जांच छह माह से एक वर्ष के बीच लंबित हैं और 1108 मामलों की जांच एक वर्ष से ज्यादा समय से लंबित है। अदालत को बताया गया कि पिछले छह माह में करीब 44 प्रतिशत मामलों में बढ़ोतरी हुई है।
पीठ ने यह आदेश किशोर न्याय अधिनियम की धारा 14 के मद्देनजर पारित किया है। धारा 14 (2) में प्रावधान है कि बोर्ड के समक्ष बच्चे को पहली बार पेश करने की तारीख से 4 महीने की अवधि के भीतर जांच पूरी की जाएगी, जब तक कि अवधि को बोर्ड द्वारा अधिकतम 2 महीने के लिए नहीं बढ़ाया जाता है।
धारा 14 (4) में प्रावधान है कि यदि विस्तारित अवधि के बाद भी छोटे अपराधों के लिए बोर्ड द्वारा जांच अनिर्णायक रहती है, तो कार्यवाही बंद हो जाएगी।
अदालत ने कहा लंबे समय से लंबित मामले महामारी के कारण हैं जहां बच्चों को जेजे बोर्ड के सामने पेश नहीं किया गया। संबंधित पक्ष ने यह समझा कि धारा 14 में निर्धारित 4 महीने का समय जेजेबी के समक्ष बच्चे के पहली पेशी की तारीख के बाद शुरू होगा।
अदालत ने स्पष्ट किया कि चूंकि धारा 14 के अनुसार 4 महीने की अवधि जेजेबी के लिए बच्चे के पहली पेशी की तारीख से शुरू होगी लेकिन हमारा मानना है कि यह तिथि उसी दिन से शुरू होनी चाहिए जब उसे पकड़ा गया हो या हिरासत में लिया गया हो। 24 घंटे में उसे बिना समय गंवाए जेजे बोर्ड के समक्ष पेश किया जाना जरूरी है।
अदालत ने मामले की सुनवाई 12 अक्तूबर तय की है। दरअसल जेजे बोर्ड में लंबित मामलों पर पीठ ने स्वयं संज्ञान लिया था। अदालत ने माना था कि एक गंभीर मामला है।

पीठ ने दिल्ली बाल अधिकार संरक्षण आयोग (डीसीपीसीआर) सहित अन्य पक्षों से जवाब मांगा था। अदालत को बताया गया कि छोटे-छोटे अपराध संबंधी मामलों के चलते जेजे बोर्ड के पास लंबित मामलों की भरमार है। समय पर सुनवाई संभव नहीं हो पा रही।
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