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ऑनलाइन खरीदारी ने छीन ली संडे बुक बाजार की रौनक
Sun, 28 Apr 2019 12:12 PM IST
नोएडा ब्यूरो
नेहा कौशिक, अमर उजाला, नई दिल्ली
नेहा कौशिक, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: नोएडा ब्यूरो
Updated Sun, 28 Apr 2019 12:12 PM IST
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : kumar sanjay
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इंटरनेट के विस्तार के बाद ई-कॉमर्स और ऑनलाइन शॉपिंग ने लोगों के लिए खरीदारी आसान बना दिया है। जबकि, पारंपरिक तरीकों से चल रहे भारतीय बाजारों पर इसका बुरा असर पड़ा है। पुरानी दिल्ली के पास पिछले 50 सालों से दरियागंज में लगने वाले किताबों के बाजार में अब बहुत कम लोग किताबें खरीदने आते हैं। पहले हर रविवार को यहां लोगों की भारी भीड़ रहती थी।
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संडे बुक बाजार के नाम से मशहूर इस बाजार में पुराने उपन्यास बेचने का काम करने वाले वासुदेव पंत का कहना है कि ऑनलाइन खरीदारी और इंटरनेट की वजह से उनकी बिक्री में 70 फीसदी तक की गिरावट आई है। वे बताते हैं कि किताबों की ऑनलाइन बिक्री शुरू होने से पहले रविवार के दिन उनके पास खाना-खाने का समय तक नहीं होता था। अब उतने खरीदार ही नहीं आते हैं। वासुदेव की तरह बाकी खरीदारों का भी यही मानना है।
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ऑनलाइन खरीदारी से टक्कर लेगी वेबसाइट
दरियागंज संडे बुक बाजार की एसोशिएशन भी है। इसके उपाध्यक्ष एएल वर्मा का कहना है कि किताबों का ये बाजार 50 साल पुराना है। इसकी शुरूआत साल 1964 में 20-25 बुकसेलर के साथ हुई थी। अब आबादी बढ़ने के चलते 270 बुक सेलर किताबें बेचने का काम कर रहे हैं। वो कहते हैं कि उनके व्यापार पर ऑनलाइन खरीदारी का काफी असर हुआ है। अब उतने लोग किताबें खरीदने नहीं आते हैं। उन्होंने बताया कि ऑनलाइन खरीदारी की चुनौती से टकराने के लिए वेबसाइट भी शुरू की है। इसमें हमने सदस्यों के नाम और नंबर उपलब्ध करवाए हैं। ताकि ऑनलाइन किताबें खरीदने वाले लोग दूसरे वेबसाइटों से भी किफायती दामों पर किताबें खरीद सकें।
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प्रकाशन भवन के काम पर भी पड़ा असर
गुलाब सिंह पहले दरियागंज में एक प्रकाशन भवन में काम करते थे, उनका कहना है कि केवल बाजार ही नहीं, बल्कि प्रकाशकों के काम पर भी ऑनलाइन खरीदारी का असर पड़ा है। वे कहते हैं कि सालों से वो उस प्रकाशन भवन में काम करते थे, लेकिन अब उनका मुनाफा कम होने के कारण वहां से छटनी होनी शुरू हो गई है। जहां पहले प्रकाशन भवनों में 15 से 20 लोग काम पर होते थे, अब मात्र 5 लोगों से काम चल रहा है। इतिहास और विचारधाराओं पर मात्र 20 रुपये में किताबें बेच रहे गुलाब सिंह को इस व्यापार में कोई फायदा नहीं हो रहा है। वो मंदी से इतने मजबूर हैं कि किताबें बेचने का काम छोड़ कोई दूसरी नौकरी करना चाहते हैं।
बाजार में किफायती दाम पर मिलती हैं किताबें
दिल्ली में रहने वाले किताबों का शौकीनों में शायद ही कोई ऐसा हो, जिसे इस बाजार के बारे में जानकारी नहीं हो। इस बाजार में मात्र 20 रुपये में भी किताब खरीदी जा सकती है। बाजार में किफायती दामों पर साहित्य, पाठ्यक्रमों से लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर की किताबें तक मिलती हैं। संडे बुक बाजार एसोशिएशन का कहना है कि सभी विक्रेता ‘किताबें सबके लिए’ के नारे के साथ काम करते हैं।