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डीयू के 100 साल: भारत विभाजन के समय नहीं मना था दीक्षांत समारोह, यहां से निकलीं ये मशहूर शख्सियतें
Sun, 01 May 2022 04:50 AM IST
सुशील कुमार
किशन कुमार, अमर उजाला, नई दिल्ली
किशन कुमार, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: सुशील कुमार
Updated Sun, 01 May 2022 04:50 AM IST
सार
साल 1947 में भारत-पाकिस्तान के बंटवारे के समय विश्वविद्यालय का रजत जयंती वर्ष था। इस दौरान विजयेंद्र कस्तूरी रंगा वरदराज राव द्वारा पहली बार मुख्य भवन में राष्ट्रीय ध्वज फहराया गया था।
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दिल्ली विश्वविद्यालय
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
दिल्ली विश्वविद्यालय से भारत के गौरवशाली इतिहास के कई पल जुड़े हुए हैं। इसी में शामिल है 1947 का वह दर्द जब देश को दो हिस्सों में बांट दिया गया। देश को अंग्रेजी हुकूमत से आजादी मिली तो पाकिस्तान के हिस्से के रूप में देश का बंटवारा हुआ। इस दौरान डीयू ने अपना दीक्षांत समारोह को टाल दिया था।
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साल 1947 में भारत-पाकिस्तान के बंटवारे के समय विश्वविद्यालय का रजत जयंती वर्ष था। इस दौरान विजयेंद्र कस्तूरी रंगा वरदराज राव द्वारा पहली बार मुख्य भवन में राष्ट्रीय ध्वज फहराया गया था। उस वर्ष भारत के विभाजन के कारण विश्वविद्यालय ने दीक्षांत समारोह का आयोजन नहीं किया था। इसके बजाय 1948 में एक विशेष समारोह आयोजित किया गया था, जिसमें भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के साथ-साथ लॉर्ड माउंटबेटन, लेडी माउंटबेटन, अबुल कलाम आजाद, जाकिर हुसैन और शांति स्वरूप भटनागर भी शामिल थे। इसके 25 साल बाद 1973 के स्वर्ण जयंती समारोह में भारत की तत्कालीन प्रधान मंत्री इंदिरा गांधी, सत्यजीत रे, अमृता प्रीतम और एम.एस. सुब्बुलक्ष्मी ने भाग लिया था।
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यूजीसी से मिल चुका है प्रतिष्ठित संस्थान का तमगा
दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) ने एक मई को राजधानी में अपनी स्थापना के 100 साल पूरे कर लिए हैं। इसकी स्थापना साल 1922 में केंद्रीय विधानसभा के एक अधिनियम द्वारा की गई थी। बाद में इसे विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) द्वारा प्रतिष्ठित संस्थान (आईओई) के रूप में मान्यता दी गई है। स्थापना के समय डीयू के तीन कॉलेजों, दो संकाय और 750 छात्र हुआ करते थे। समय के साथ-साथ यहां कॉलेजों की संख्या बढ़ने के साथ छात्रों की संख्या में भी इजाफा हुआ और आज डीयू के 91 से कॉलेज हैं, जिसमें इंजीनियरिंग, मेडिकल, विज्ञान, मानविकी व वाणिज्य विषयों की पढ़ाई होती है। उत्तरी व दक्षिणी कैंपस में विश्वविद्यालय के 16 संकाय और 86 विभाग हैं।
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1973 में साउथ कैंपस की हुई थी स्थापना
साउथ दिल्ली के निवासियों तक पहुंच बढ़ाने के लिए साल 1973 में साउथ कैंपस की स्थापना की गई थी। उस दौरान यह 1984 में धौला कुआं के पास बेनिटो जुआरेज रोड से अपने वर्तमान स्थान पर चला गया था। साउथ कैंपस 69 एकड़ में पहाड़ी इलाके में फैला हुआ है।
हरि सिंह गौर थे पहले कुलपति
डीयू के स्थापना के समय इसके पहले कुलपति की जिम्मेदारी हरि सिंह गौर को दी गई, जिन्होंने 1922 से 1926 तक विश्वविद्यालय के पहले कुलपति के रूप में कार्य किया। ब्रिटिश काल में सत्ता की सीट 1911 में कलकत्ता से दिल्ली स्थानांतरित कर दी गई थी। वायसरेगल लॉज एस्टेट को जब डीयू को समर्पित किया गया तब से यह अक्तूबर 1933 तक भारत के वायसराय का निवास स्थान बन गया था। तब से इसमें कुलपति का कार्यालय और अन्य दफ्तर चल रहे हैं। मौरिस ग्वायर 1937 में ब्रिटिश भारत के मुख्य न्यायाधीश के रूप में सेवा करने के लिए भारत आए तो वह दिल्ली विश्वविद्यालय के कुलपति बने। उनके समय के दौरान स्नातकोत्तर शिक्षण पाठ्यक्रम शुरू किए गए और उसी दौरान विश्वविद्यालय में प्रयोगशालाओं की स्थापना की गई। इनके नाम पर विश्वविद्यालय में आज एक हॉल भी है।
साउथ कैंपस के कॉलेज
साउथ कैंपस में आचार्य नरेंद्र देव कॉलेज, आर्यभट्ट कॉलेज, आयुर्वेदिक और यूनानी टिब्बिया कॉलेज, गार्गी कॉलेज, आत्मा राम सनातन धर्म कॉलेज, जीसस एंड मैरी कॉलेज, रामानुजन कॉलेज, मैत्रेयी कॉलेज, मोतीलाल नेहरू कॉलेज, मोतीलाल नेहरू कॉलेज शाम, राम लाल आनंद, श्री वेंकटेश्वर कॉलेज, लेडी श्री राम कॉलेज, दिल्ली कला और वाणिज्य कॉलेज, गृह अर्थशास्त्र संस्थान, पन्नालाल गिरधरलाल दयानंद एंग्लो वैदिक कॉलेज, व्यावसायिक अध्ययन कॉलेज, श्री अरबिंदो कॉलेज, कमला नेहरू कॉलेज, दयाल सिंह कॉलेज और शहीद भगत सिंह कॉलेज शामिल हैं।
नॉर्थ कैंपस के कॉलेज
स्कूल ऑफ ओपन लर्निंग, कला संकाय, विधि संकाय और किरोड़ीमल कॉलेज, श्री गुरु गोबिंद सिंह कॉलेज ऑफ कॉमर्स, लेडी इरविन कॉलेज, दौलत राम कॉलेज, हंसराज कॉलेज, हिंदू कॉलेज, इंद्रप्रस्थ कॉलेज, लक्ष्मीबाई कॉलेज, मिरांडा हाउस, श्री गुरु तेग बहादुर खालसा कॉलेज, रामजस कॉलेज, सेंट स्टीफन कॉलेज, श्री राम कॉलेज ऑफ कॉमर्स, सत्यवती कॉलेज, श्याम लाल कॉलेज। परिसर में स्नातक अध्ययन और अनुसंधान के लिए केंद्र भी हैं, जिनमें क्लस्टर इनोवेशन सेंटर, दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स, दिल्ली स्कूल ऑफ जर्नलिज्म और आंबेडकर सेंटर फॉर बायोमेडिकल रिसर्च (एसीबीआर) शामिल हैं।
फैशन के लिए हैं मशहूर
दिल्ली विश्वविद्यालय में फैशन का शुरू से ही चलन रहा है। दिल्ली के अलग-अलग इलाकों के बाजार डीयू के फैशन के लिए मशहूर हैं। इनमें कमला नगर बाजार, सरोजनी नगर बाजार, कृष्णा नगर बाजार व पशिचमी दिल्ली में राजौरी गार्डन मार्केट फैशन खरीदारी के स्पॉट हैं, जहां प्रतिदिन हजारों की संख्या में छात्र-छात्राएं खरीदारी के लिए पहुंचते हैं। दिल्ली का कमला नगर इलाका नार्थ कैम्प्स के छात्रों के लिए खरीदारी का पसंदीदा स्थल है।
डीयू से पढ़ाई कर निकलीं मशहूर शख्सियतें
- पूर्व वित्त मंत्री अरुण जेटली श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स बीकॉम-ऑनर्स, 1973
- पूर्व केंद्रीय मंत्री शशी थरूर सेंट स्टीफंस कॉलेज, हिस्ट्री-ऑनर्स, 1975
- फिल्म अभिनेता अमिताभ बच्चन, किरोड़ीमल कॉलेज, साल 1975
- बॉलीवुड अभिनेत्री कोंकणा सेन शर्मा, सेंट स्टीफंस कॉलेज, 2001
- नोबेल पुरस्कार से सम्मानित आंग सान सू की, लेडी श्रीराम कॉलेज ऑफ कॉमर्स, 1964
- पाकिस्तान के छठे राष्ट्रपति मोहम्मद जिया उल हक, सेंट स्टीफंस कॉलेज, 1943
- पहली महिला आईपीएस अधिकारी किरण बेदी फैकल्टी ऑफ लॉ, 1988
- बॉलीवुड अभिनेता शाहरुख खान, हंसराज कॉलेज, साल 1988
- बॉलीवुड फिल्म अभिनेत्री मल्लिका सहरावत, मिरांडा हाउस
- बॉलीवुड निर्देशक अनुराग कश्यप, हंसराज कॉलेज, साल 1973
- पूर्व क्रिकेटर और वर्तमान में भाजपा सांसद गौतम गंभीर हिंदू कॉलेज
- बॉलीवुड अभिनेता सिद्धार्थ मल्होत्रा, शहीद भगत सिंह कॉलेज
- पूर्व सीएम शीला दीक्षित जीसस एंड मैरी व मिरांडा हाउस
- फिल्म अभिनेता मनोज बाजपेयी, रामजस कॉलेज
- पूर्व लोकसभा स्पीकर मीरा कुमार, मिरांडा हाउस
- बॉलीवुड अभिनेता अर्जुन रामपाल, हिंदू कॉलेज
- बॉलीवुड अभिनेत्री हुमा कुरैशी, गार्गी कॉलेज
- अभिनेत्री अदिती राव हैदरी लेडी श्रीराम कॉलेज
- अभिनेता राजकुमार राव आत्माराम सनातन कॉलेज
- कांग्रेस नेता व वकील कपिल सिब्बल, फैकल्टी ऑफ लॉ
- राजनेता सुब्रमण्यन स्वामी हिंदू कॉलेज
- बॉलीवुड फिल्म अभिनेत्री नेहा धूपिया, जीसस एडं मेरी कॉलेज
- पर्यावरणविद् प्रो. सीआर बाबू 1970 में वनस्पति विज्ञान विभाग संकाय सदस्य बने
- देश के वरिष्ठ साहित्यकार खुशवंत सिंह सेंट स्टीफंस कॉलेज