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डीयू के 1.79 लाख विद्यार्थियों को डिजिटल डिग्री
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नई दिल्ली। कोरोना संकट के दौरान जरूरी सावधानियों के साथ शनिवार को आयोजित दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) के 97वें दीक्षांत समारोह में 7,78,719 विद्यार्थियों को डिग्रियां दी गईं। विद्यार्थियों को डिग्रियां ऑनलाइन और फिजिकल मिश्रित ढंग से दी गईं। यह देश में पहली बार है, जब सभी विद्यार्थियों को एक क्लिक करने भर से उनकी स्नातक और परास्नातक डिग्री ई-मेल पर मिल गई।
समारोह के मुख्य अतिथि केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने विद्यार्थियों को 156 मेडल और 36 पुरस्कार दिए। 670 विद्यार्थियों को डॉक्टरेट और 44 को डीएम/एमसीएच डिग्री भी उन्होंने बांटीं। मुख्य अतिथि ने कहा कि शिक्षा और ज्ञान से ही सशक्तिकरण संभव है। ज्ञान सृजन और राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया में डीयू ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इस दौरान डीयू का इतिहास बताते हुए उन्होंने इससे प्रेरणा लेने का आह्वान किया।
शिक्षा मंत्री ने कहा कि नई शिक्षा नीति 2020 (एनईपी) सबसे बड़ा रिफार्म होगी। यह किसी सरकार या व्यक्ति विशेष की नहीं, बल्कि हम सबकी नीति है। यह भारत के स्वर्णिम भविष्य का विजन डॉक्यूमेंट है। उन्होंने इसके क्रियान्वयन में सहयोग के लिए सभी का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आपके प्रयासों से न केवल भारतीय शिक्षा प्रणाली को बल मिलेगा, अपितु भारत शिक्षा के क्षेत्र में विश्व का नेतृत्व करेगा।
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दीक्षांत समारोह में संघ लोकसेवा आयोग के अध्यक्ष प्रो. पीके जोशी, डीयू के कुलपति प्रो. पीसी जोशी, कॉलेज के डीन प्रो. बलराम पाणि, डीयू साउथ कैंपस की डायरेक्टर प्रो. सुमन कुंदू, रजिस्ट्रार डॉ. विकास गुप्ता भी मौजूद रहे।
आजादी से पहले था छात्र संसद का प्रचलन
केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने कहा कि देश जब आजाद नहीं हुआ था, तब से इस कैंपस में (वर्ष 1935) ‘छात्र संसद’ का प्रचलन है। संवाद की संस्कृति ही हमारी ताकत है। इस छात्र संसद ने गांधी, नेहरू, सरोजिनी नायडू, एनी बेसेंट और नेताजी सुभाष चंद्र बोस जैसी शख्सियतों को तराशने में अहम भूमिका निभाई है। डीयू स्थापना के 100 वर्ष पूरे करने की ओर बढ़ रहा है। इसकी स्थापना उस काल में हुई, जब देश आजादी की लड़ाई लड़ रहा था। आजादी के इतिहास में डीयू से जुड़ी सैकड़ों ऐसी घटनाएं हैं, जिनका जिक्र यदा-कदा होता रहता है।
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समारोह के मुख्य अतिथि केंद्रीय शिक्षा मंत्री रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने विद्यार्थियों को 156 मेडल और 36 पुरस्कार दिए। 670 विद्यार्थियों को डॉक्टरेट और 44 को डीएम/एमसीएच डिग्री भी उन्होंने बांटीं। मुख्य अतिथि ने कहा कि शिक्षा और ज्ञान से ही सशक्तिकरण संभव है। ज्ञान सृजन और राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया में डीयू ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इस दौरान डीयू का इतिहास बताते हुए उन्होंने इससे प्रेरणा लेने का आह्वान किया।
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शिक्षा मंत्री ने कहा कि नई शिक्षा नीति 2020 (एनईपी) सबसे बड़ा रिफार्म होगी। यह किसी सरकार या व्यक्ति विशेष की नहीं, बल्कि हम सबकी नीति है। यह भारत के स्वर्णिम भविष्य का विजन डॉक्यूमेंट है। उन्होंने इसके क्रियान्वयन में सहयोग के लिए सभी का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आपके प्रयासों से न केवल भारतीय शिक्षा प्रणाली को बल मिलेगा, अपितु भारत शिक्षा के क्षेत्र में विश्व का नेतृत्व करेगा।
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दीक्षांत समारोह में संघ लोकसेवा आयोग के अध्यक्ष प्रो. पीके जोशी, डीयू के कुलपति प्रो. पीसी जोशी, कॉलेज के डीन प्रो. बलराम पाणि, डीयू साउथ कैंपस की डायरेक्टर प्रो. सुमन कुंदू, रजिस्ट्रार डॉ. विकास गुप्ता भी मौजूद रहे।
आजादी से पहले था छात्र संसद का प्रचलन
केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने कहा कि देश जब आजाद नहीं हुआ था, तब से इस कैंपस में (वर्ष 1935) ‘छात्र संसद’ का प्रचलन है। संवाद की संस्कृति ही हमारी ताकत है। इस छात्र संसद ने गांधी, नेहरू, सरोजिनी नायडू, एनी बेसेंट और नेताजी सुभाष चंद्र बोस जैसी शख्सियतों को तराशने में अहम भूमिका निभाई है। डीयू स्थापना के 100 वर्ष पूरे करने की ओर बढ़ रहा है। इसकी स्थापना उस काल में हुई, जब देश आजादी की लड़ाई लड़ रहा था। आजादी के इतिहास में डीयू से जुड़ी सैकड़ों ऐसी घटनाएं हैं, जिनका जिक्र यदा-कदा होता रहता है।