अगर महिला करे रेप का झूठा मुकद्दमा तो वसूलें हर्जाना
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दुष्कर्म के मामले में बरी शख्स को अदालत ने उसके खिलाफ झूठा मुकदमा दर्ज करवाने वाली महिला के खिलाफ मुकदमा करने और हर्जाना लेने की छूट दी है। अदालत ने कहा झूठे मुकदमे के कारण आरोपी को बेइज्जती व आघात झेलना पड़ा।
अदालत ने कहा मुकदमा बेशक खत्म हो गया है लेकिन आरोपी का दर्द खत्म नहीं हुआ है क्योंकि उसे फंसाए जाने पर तो हंगामा हुआ होगा लेकिन उसके बरी होने पर किसी का ध्यान नहीं जाएगा।
तीस हजारी की अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश निवेदिता अनिल शर्मा ने अपने फैसले में कहा कि बरी होने के बाद भी उस शख्स को दुष्कर्म का आरोपी होने का दंश जीवन भर रहेगा।
महिला पर केस कर उससे हर्जाना ले सकते हैं
अगर वह चाहे तो उसके खिलाफ झूठा मुकदमा करने वाली महिला पर केस कर उससे हर्जाना ले सकता है। अदालत ने उक्त टिप्पणी मुखर्जी नगर निवासी शख्स को दुष्कर्म मामले में बरी करते हुए की है।
मामले में आरोपी रहा शख्स एक प्राइवेट फर्म में निदेशक था और पीड़िता उसकी कंपनी में नौकरी करती थी
कोर्ट में अपने बयान से पलट गई थी पीड़िता
पीड़िता ने उस पर शादी का झांसा देकर कई बार दुष्कर्म करने और धमकी देने का आरोप लगाते हुए हरी नगर थाने में केस दर्ज कराया था लेकिन केस की सुनवाई के दौरान वह अपने बयान से पलट गई।
पीड़िता ने केस की सुनवाई के दौरान अपने बयान में कहा कि उससे दुष्कर्म नहीं हुआ बल्कि उनके बीच शारीरिक संबंध सहमति से थे। हरी नगर थाने में फरवरी 2013 में एफआईआर में आरोप लगाया था कि आरोपी ने नशीली कोल्ड ड्रिंक पिलाकर उससे दुष्कर्म किया।
पीड़िता का आरोप था कि आरोपी ने उसे शादी का झांसा देकर फरवरी से अगस्त 2013 के बीच कई बार दुष्कर्म किया और अश्लील वीडियो वायरल करने की धमकी दी।