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यमुना को निर्मल बनाने के लिए एनजीटी का दिल्ली जल बोर्ड को निर्देश

Fri, 10 Jun 2016 12:23 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Fri, 10 Jun 2016 12:23 AM IST
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Yamuna for the augury of NGT directed DJB Planning
यमुना नदी

मैली से निर्मल यमुना पुनरुद्धार योजना - 2017 की निगरानी कर रहे नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने दिल्ली जल बोर्ड (डीजेबी) को आदेश दिया है कि वह केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) व आईआईटी दिल्ली के साथ मिलकर सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) के  जरिए निकलने वाले पानी के दोबारा इस्तेमाल को लेकर योजना तैयार करे।

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बेंच ने कहा कि डीजेबी ऐसी योजना तैयार करे ताकि एसटीपी के जरिए निकलने वाले पानी से मेट्रो व डीटीसी बसों की धुलाई और स्टेडियम में छिड़काव संभव हो सके।

बेंच ने डीजेबी को कहा है कि इस संबंध में स्वयं एक अध्ययन कराए। मामले की अगली सुनवाई 5 जुलाई को होगी। जस्टिस स्वतंत्र कुमार की अध्यक्षता वाली बेंच ने यह निर्देश यमुना जिए अभियान के मनोज कुमार मिश्रा के मामले में दिया है।
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बेंच ने मैली से निर्मल यमुना पुनरुद्धार योजना - 2017 के तहत डीजेबी के जरिए पहले चरण में किए गए एसटीपी और सीवेज लाइन को लेकर किए गए कामों पर जानकारी हासिल करने के बाद यह निर्देश दिया है।
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बेंच ने अपने निर्देश में कहा है कि दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) के वाइस चेयरमैन, डीजेबी, दिल्ली के नगर निगमों, सीपीसीबी, लोक निर्माण विभाग, दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन के साथ दो हफ्तों के भीतर बैठक करें।

इस बैठक में एसटीपी के जरिए निकलने वाले पानी के बेहतर इस्तेमाल को लेकर योजना तैयार की जाए। वहीं बेंच ने कहा कि यह भी जांचना चाहिए कि क्या एसटीपी के पानी का इस्तेमाल फिरोज शाह कोटला और अंबेडकर स्टेडियम में छिड़काव में किया जा सकता है।

5 जुलाई को होगी मामले की अगली सुनवाई

Yamuna for the augury of NGT directed DJB Planning
एनजीटी

इसके अलावा डीडीए को यह नोटिस देना चाहिए कि बिना आदेशों के पालन के भू-जल का दोहन पूरी तरह प्रतिबंधित होगा। बेंच ने बीते वर्ष डीजेबी को किसी भी नए काम के लिए फंड खर्च करने के लिए ट्रिब्यूनल की इजाजत लेने को कहा था।

वहीं, इस दर्मियान डीजेबी ने दो डीटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) अलग-अलग प्राधिकरणों को भेजे थे। इस संबंध में डीजेबी निविदा निकालकर उसे फाइनल भी कर चुकी है।

इस संबंध में एनजीटी ने फटकार भी लगाई थी। वहीं डीजेबी की मांग थी कि जल्द से जल्द उन्हें इस डीपीआर का पैसा मिले ताकि वे आगे काम कर सकें।

डीजेबी के जरिए भेजा गया पहला सीवेज लाइन संबंधी डीपीआर केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय के पास अटका है। शहरी विकास मंत्रालय की मोहर के बाद ही फंड डीजेबी को हासिल होगा।

वहीं दूसरा, नालियों को दुरुस्त करने और जोड़ने संबंधी डीपीआर दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) के पास भेजा गया था। बेंच ने 16 जून को शहरी विकास मंत्रालय को डीजेबी के डीपीआर पर अंतिम निर्णय लेने के लिए कहा है।

वहीं बेंच ने डीजेबी की दूसरी डीपीआर को भी निरस्त कर दिया है। साथ ही डीजेबी को कहा है कि वह इस संबंध में दूसरी डीपीआर डीडीए को दे। डीडीए इसे मंजूर कर केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय को भेजेगा। एनजीटी अगली सुनवाई में इन सभी मामलों पर प्राधिकरणों से जानकारी लेगा।

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