यमुना प्राधिकरण: 126 करोड़ के घोटाले में पूर्व सीईओ समेत 21 के खिलाफ एफआईआर दर्ज
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यमुना प्राधिकरण (यीडा) में बड़े घोटाले का खुलासा हुआ है। मथुरा में मास्टर प्लान से बाहर जमीन खरीदकर 126 करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचाने पर यीडा के पूर्व सीईओ पीसी गुप्ता व पूर्व तहसीलदार सुरेश चंद्र शर्मा समेत 21 के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई है।
यीडा के चेयरमैन व मेरठ के मंडलायुक्त डॉ. प्रभात कुमार के निर्देश पर कासना कोतवाली में एफआईआर दर्ज कराई गई है। आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए एसएसपी की तीन टीमों ने आरोपियों के ठिकानों पर दबिश देनी शुरू कर दी है। वहीं, चेयरमैन ने मामले की जांच सीबीआई या एसआईटी से कराने के लिए शासन को रिपोर्ट भेज दी है।
दरअसल, 2014 में मथुरा के सात गांवों मादौर, सेउपट्टी बांगर, सेउपट्टी खादर, कौलाना बांगर, कौलाना खादर, सौतीपुरा बांगर व नौहझील बांगर में 57.15 हेक्टेयर जमीन खरीदी गई। इसके एवज में 85.49 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया गया जबकि इस जमीन पर प्राधिकरण की कोई परियोजना प्रस्तावित नहीं थी। अब भी यह जमीन खाली पड़ी है। इस रकम पर यीडा अब तक 40.93 करोड़ रुपये ब्याज भी जमा कर चुका है। इस प्रकार यीडा को 126.42 करोड़ का नुकसान हुआ।
2014 में प्रचलित मुआवजे की तय दर से अधिक पर जमीन खरीदी गई थी। तब यीडा की मुआवजा दर 693 रुपये और कुछ जगह 1021 रुपये प्रतिवर्ग मीटर थी। यह जमीन 768 रुपये से लेकर 2268 रुपये प्रति वर्ग मीटर की दर पर खरीदी गई। यीडा की दर से मुआवजे की रकम 39.86 करोड़ रुपये हो रही है, लेकिन अधिक दर से 58.95 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। शिकायत मिलने पर यीडा के चेयरमैन ने नियोजन विभाग के महाप्रबंधक से जांच कराई। उसके बाद सीईओ से जांच कराने पर जमीन खरीद में गड़बड़ी सामने आई।