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यूपी के इस शहर के बदतर हालात, 40 फीट नीचे गया पानी

Tue, 12 Apr 2016 09:35 AM IST
अरविंद सिंह/अमर उजाला, नोएडा
अरविंद सिंह/अमर उजाला, नोएडा Updated Tue, 12 Apr 2016 09:35 AM IST
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worse situations in noida, water 40 feet below
पानी की समस्या - फोटो : demo

नोएडा में भूजल स्तर तेजी से घट रहा है। पिछले सात से आठ साल में भूजल करीब 40 फीट नीचे जा चुका। हर साल लगभग आठ फीट भूजल नीचे गया है। खुद प्राधिकरण का जल विभाग कहता है कि सात से आठ साल पहले नोएडा में ट्यूबवेल के लिए करीब 50 फीट पर बोर कराया जाता था और तय मानक का भूजल मिल जाता था, जिसमें टीडीएस की मात्रा जरूरत के हिसाब से होती थी। अब 90 से 100 फीट पर बोर कराना पड़ रहा है, तब जाकर सही पानी मिल पा रहा है। अचरज की बात यह है कि गिरते भूजल स्तर की रोकथाम के लिए अधिकारी भी कोई ठोस कदम नहीं उठा रहे।

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दरअसल, ट्यूबवेल लगाने से पहले भूजल की स्थिति जानने के लिए जल विभाग की तरफ से सर्वे कराया जाता है उसी में यह तथ्य सामने आया है। उसी सर्वे से यह पता चला है कि नोएडा के नीचे 240 फीट तक ही सप्लाई योग्य भूजल है। उसके बाद का पानी बहुत  खराब है। करीब 400 फीट तक मिट्टी की परत है। उसमें से सप्लाई योग्य पानी नहीं मिल सकता। ऐसे में जिस तेजी से भूजल नीचे जा रहा है उससे तो अधिकतम 20 वर्षों तक ही भूजल मिल सकता है।
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साल में तीन माह नहीं मिलता गंगाजल
नोएडा को गंगाजल तो मिलता है, लेकिन साल में औसतन तीन माह गंगाजल बंद रहता है। दशहरा से दिवाली के आसपास करीब एक माह के लिए निश्चित ही बंद रहता है। इसके अलावा कभी हरिद्वार तो कभी गंगनहर से पानी रुक जाता है। मशीनरी में तकनीकी गड़बड़ी भी हो जाती है। इन सब से औसतन दो माह गंगाजल नहीं मिल पाता। उस दौरान भूजल पर ही निर्भर रहना पड़ता है।
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नोएडा की 60 फीसदी आबादी भूजल पर निर्भर
जानकार बताते हैं, कि शहरी क्षेत्र से अधिक आबादी (करीब 60 फीसदी) नोएडा के गांवों में रहती है। आबादी के पास सप्लाई का पानी पहुंचता ही नहीं है। ये लोग भूजल पर निर्भर हैं। घर में ही ट्यूबवेल लगा लिया है। बहुमंजिला का भी यही हाल है। इन इमारतों के परिसर में ही ट्यूबवेल लगा है। ऐसे प्राधिकरण की जल परियोजनाएं सिर्फ आधी से कम आबादी के लिए ही हैं।

बेसमेंट की खुदाई पर लगे रोक
भूजल दोहन पर एनजीटी में याचिका दायर करने वाले पर्यावरण विद् विक्रांत तोंगड़ कहते हैं कि भूजल स्तर के नीचे जाने का सबसे बड़ा कारण बहुमंजिला इमारतों में डबल बेसमेंट की खुदाई है। बिल्डर 30 से 35 फीट नीचे तक खुदाई कर डबल बेसमेंट पार्किंग बनाते हैं। 30 फुट नीचे तक के आसपास के भूजल को निकालकर इधर-उधर फेंक देते हैं। इस कारण सबसे पहले बेसमेंट पर रोक लगे। उनको जमीन से ऊपर ही घर और पार्किंग बनाने की अनुमति मिले। इसके अलावा घरों के अंदर ट्यूबवेल पर शीघ्र रोक लगे।

मीटर सिस्टम लागू हो
जानकार मानते हैं, कि नोएडा में भी दिल्ली की तरह ही पानी पर डिजिटल मीटर सिस्टम लागू होना चाहिए। इससे लोग पानी का इस्तेमाल कम करेंगे। घरों के ट्यूबवेल पर भी मीटर लगे, जिससे कि वे लोग भी दोहन कम करें। बता दें, कि नोएडा में इसकी कागजी शुरुआत भी हुई थी, लेकिन परवान न चढ़ सकी। इसके अलावा वाटर रिचार्ज सिस्टम को भी और दुरुस्त करने की जरूरत है।


एक नजर में स्थिति
- नोएडा की आबादी करीब 10 लाख
- प्रतिदिन जलापूर्ति करीब 240 एमएलडी
- प्रति व्यक्ति औसत खपत 272 लीटर प्रतिदिन
- 2021 तक नोएडा की आबादी होगी 21 लाख
- 2021 में नोएडा में पानी की खपत होगी 590 एमएलडी
- 2021 में 54 फीसदी गंगाजल व 46 फीसदी भूजल से होगी सप्लाई

भूजल दोहन रोकने और वाटर रिचार्ज पर प्रभावी कदम उठाने के लिए जल्द ही एक समिति का गठन किया जाएगा, जिसमें प्राधिकरण के अलावा जिला प्रशासन के अधिकारी भी शामिल होंगे। प्रत्येक बिल्डिंग में वाटर हार्वेस्टिंग भी सुनिश्चित किए जाएगा। भूजल दोहन पर तत्काल रोकने के लिए सभी परियोजना अभियंताओं को निर्देश दे दिए गए हैं।- सौम्य श्रीवास्तव, डीसीईओ नोएडा प्राधिकरण

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