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विश्व मधुमेह दिवस कल: दिल्ली-एनसीआर में 29% डाइबिटीज रोगी, 25 साल की उम्र में बन रहे मरीज
Sun, 13 Nov 2022 07:35 AM IST
अनुराग सक्सेना
अमर उजाला ब्यूरो, दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, दिल्ली
Published by: अनुराग सक्सेना
Updated Sun, 13 Nov 2022 07:35 AM IST
सार
परीक्षण करने वाली लैब के प्रमुख डॉ. प्रशांत नाग ने कहा कि मधुमेह विश्व स्तर पर स्वास्थ्य के लिए एक प्रमुख खतरा है। इसकी वजह से स्वास्थ्य खर्च का बोझ बढ़ रहा है। आने वाले दिनों में यह तेजी से बढ़ने की उम्मीद है। खासकर मोटापे से पीड़ित युवाओं में इसका खतरा ज्यादा है।
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मधुमेह
- फोटो : social media
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विस्तार
दिल्ली-एनसीआर में तेजी से लोग मधुमेह के रोगी बन रहे हैं। इनमें करीब आधे मरीज 40 से 60 वर्ष की उम्र के हैं। वहीं 25 वर्ष तक के लोग भी इस रोग चपेट में आ रहे हैं। एक निजी लैब ने मार्च से अक्टूबर के बीच खून में शुगर की जांच के लिए 1.76 लाख से अधिक लोगों की ग्लाइकोसिलेटेड हीमोग्लोबिन टेस्ट किया। उनमें 29 फीसदी लोगों में मधुमेह पाया गया।
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मधुमेह रोगियों का अनुपात महिलाओं की तुलना में पुरुषों में अधिक पाया गया। यह रिपोर्ट उन लोगों पर किए गए डेटा विश्लेषण पर आधारित हैं जिन्होंने विशेष रूप से मधुमेह के लिए खुद की जांच करवाई। किया गया टेस्ट पिछले दो से तीन महीनों में ब्लड शुगर के औसत स्तर के बारे में बताता है। ग्लाइकोसिलेटेड हीमोग्लोबिन स्तर 6.5 फीसदी का मानक मधुमेह का सूचक माना जाता है।
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लैब से मिली जानकारी के अनुसार, मार्च-अक्तूबर 2022 के बीच दिल्ली-एनसीआर में कुल 1,76,086 ब्लड सैंपल का परीक्षण किया गया। इन सैंपल में से 51,687 (करीब 29.3 फीसदी) में मधुमेह की शिकायत पाई गई। इसमें 40 से 60 वर्ष आयु वर्ग में 44.6 फीसदी, 60 से अधिक आयुवर्ग में 41 फीसदी और 25-40 वर्ष की आयुवर्ग में 13.5 फीसदी लोगों में मधुमेह की शिकायत मिली। महिलाओं में 41 फीसदी और पुरुषों में 59 फीसदी में मधुमेह पाया गया।
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परीक्षण करने वाली लैब के प्रमुख डॉ. प्रशांत नाग ने कहा कि मधुमेह विश्व स्तर पर स्वास्थ्य के लिए एक प्रमुख खतरा है। इसकी वजह से स्वास्थ्य खर्च का बोझ बढ़ रहा है। आने वाले दिनों में यह तेजी से बढ़ने की उम्मीद है। खासकर मोटापे से पीड़ित युवाओं में इसका खतरा ज्यादा है। काफी लोग मधुमेह के बॉर्डर लाइन पर आ गए हैं। 2018 में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार हर 6 में से 1 भारतीय को बॉर्डर लाइन डायबिटीज है।
हार्ट-किडनी के मरीजों की परेशानी बढ़ी
मधुमेह हार्ट और किडनी के मरीजों की समस्या बढ़ा रहा है। मधुमेह के रोगी का ब्लड शुगर का स्तर नियंत्रित न होने के कारण हृदय रोगियों व किडनी के रोगियों की जटिलताएं बढ़ रही हैं। ऐसे रोगियों में मृत्यु दर काफी अधिक होती है। इसके अलावा वातावरण गंभीर रूप से प्रदूषित है। जिसके चलते मधुमेह के रोगियों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है।
इस समय देश में मधुमेह के करीब आठ करोड़ मरीज हैं, जो 2045 तक बढ़कर 13.4 करोड़ हो सकते हैं। कोरोना महामारी के बाद देश में मधुमेह के रोगियों की संख्या में काफी इजाफा हुआ है। दिल्ली नगर निगम के आयुर्वेदिक पंचकर्म अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. आरपी पाराशर ने बताया कि लाइफ स्टाइल में बदलाव के साथ प्रोसैस्ड फूड, जंक फूड और फास्ट फूड को छोड़कर ही मधुमेह को रोका जा सकता है। विभिन्न सर्वेक्षणों में यह बात सामने आई है कि दिल्ली के स्कूलों के 40 फीसदी से अधिक बच्चे मोटापे के शिकार हैं जिनमें डायबिटीज होने का खतरा सर्वाधिक है।
इनका करें सेवन
डायबिटीज से बचाव और इलाज के लिए गेहूं के साथ चने, ज्वार, जौ, जई और दालों से बने आटे का प्रयोग करें, सब्जियों में घिया, तोरी, टिंडा, पालक, परवल, खीरा, ककड़ी और करेले का प्रयोग नियमित रूप से करें। अमरूद, जामुन, पपीते जैसे फलों का प्रयोग भी डायबिटीज में लाभकारी होता है। अंकुरित दालों और अनाज का प्रयोग भी शरीर में ग्लूकोज की मात्रा को नियंत्रित करता है।
स्वस्थ भोजन के प्रयोग से न केवल मधुमेह की उत्पत्ति को रोका जा सकता है बल्कि मधुमेह के कारण होने वाले अल्सर, किडनी, आंखों, कानों, हृदय रोगों, अल्जाइमर्स, रेटिनोपैथी, आदि रोगों से भी बचा जा सकता है।