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महिलाओं की ‘बार्डर लाइन पर्सनालिटी’ से टूट रहे हैं घर

Wed, 17 Sep 2014 08:47 PM IST
Updated Wed, 17 Sep 2014 08:47 PM IST
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women's border line personality is breaking relations.

केस:1 दिल्ली के नामी बिजनेस मैन की बेटी तरू(बदला हुआ नाम)की शादी डेढ़ वर्ष पूर्व ही फरीदाबाद सेक्टर 14 निवासी अनुराग जैन से हुई है। शादी के डेढ़ माह बाद से ही दोनों के बीच छोटी-छोटी बातों को लेकर झगड़ा शुरू हो गया। एक बेटी होने के बावजूद तरू ने तलाक के लिए कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है।

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केस: 2 फरीदाबाद निवासी संजय पेशे से इंजीनियर हैं। उन्होंने वर्ष-2011 में मुरादाबाद निवासी आस्था (बदला हुआ नाम) से लव मैरिज की। शादी से पहले शुरू हुआ प्यार का सिलसिला ज्यादा दिन नहीं चल सका। बकौल संजय एक वर्ष भी नहीं बीते कि ऐसा लगने लगा हम रिश्तों को बोझिल बना रहे हैं। आए दिन की लड़ाई और किचकिच से परेशान होकर तलाक का फैसला लिया।
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औद्योगिक शहर में तलाक लेने के ये तो दो मामले एक उदाहरण मात्र हैं। असल में महिलाओं में ‘बार्डर लाइन पर्सनालिटी’ की शिकायत औद्योगिक शहर में घरौंदा आबाद होने से पहले ही बर्बाद कर रही है।
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ये कहना है मनोचिकित्सकों का। हालांकि औद्योगिक शहर के जिला कोर्ट के आंकड़े भी इससे अलग नहीं है। जनवरी-2014 से अब तक कोर्ट में करीब एक हजार तलाक के केस आए हैं जो फेमिली कोर्ट में विचाराधीन हैं।

जानिए, क्या हैं इसके कारण?

women's border line personality is breaking relations.

आधुनिकता के इस दौर में रिश्तों को समझने के लिए लोगों के पास खत्म होता समय और ईगो इसका सबसे बड़ा कारण बनकर सामने आया है। मनोचिकित्सक डा. संदीप त्यागी ने बताया कि पिछले कुछ महीने में ‘बार्डर लाइन पर्सनालिटी’ की शिकार महिलाएं काफी संख्या में आई हैं। उनकी महत्वाकांक्षाएं ज्यादा हैं और कहीं दबना नहीं चाहती।

नतीजा लड़ाई झगड़े और इगो क्लैश आम बात हो गई है। डॉ. अमिताभ शाहा ने बताया कि खुद को अगले से ज्यादा बेहतर साबित करने की धारणा और तालमेल की कमी तेजी से बढ़ी है। उनकी बात को कोई काट दे तो आक्रोशित हो जाती हैं। झल्लाना और गुस्सा इतना होता है कि तुरंत फैसला लेती हैं।

ओवर प्रोटेक्टिव होने के कारण महिलाओं में ये समस्या बढ़ी है। इतना ही नहीं धीरे-धीरे ये समस्या इतनी बढ़ जाती है कि खुद की इमेज पर असर पड़ता देख यह डिप्रेशन में चली जा रही हैं।

पढ़िए, काउंसलर की राय

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काउंसलर डॉ. रंजना चावला ने बताया कि नवविवाहितों में ये मामले अधिक है। वजह लड़कों से कंधे से कंधा मिलाकर चलने वाली लड़कियां कहीं दबना नहीं चाहती। नतीजा रिश्तों को बचाने के लिए महिलाएं ही पहले दबती थी लेकिन अब वह नहीं दबती, तो रिश्ते टूट रहे हैं।

हालांकि तलाक लेने वालों की पहले काउंसलिंग की जाती है। इनमें कुछ प्रतिशत वापस एकसाथ जिंदगी शुरू करने को राजी हो जाते हैं। जो नहीं करते वह रिश्तों को खत्म कर रहे हैं। काउंसलिंग के दौरान लड़ाई की वजह जो समाने आई है वह ईगो है।

जिला कोर्ट में वर्ष-2014 में आए तलाक के मामले
महीना------------केस
जनवरी से मार्च-------346
अप्रैल से जून--------288
जुलाई से अब तक-----327
नोट: ये आंकड़े जिला कोर्ट के परिवारिक कोर्ट से लिए गए हैं।

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