थाने में हुआ महिला के साथ रेप, कोर्ट ने मांगा जवाब
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हाईकोर्ट ने एक महिला से धोखाधड़ी व रेप के मामले में लिप्त मंगोलपुरी थाना पुलिसकर्मियों व अन्य को बचाने व पीड़िता व उसके पति को जान से मारने की धमकियां देने के मामले में दिल्ली सरकार, पुलिस आयुक्त व आउटर दिल्ली के पुलिस उपायुक्त से जवाब तलब किया है।
याचिका में मंगोलपुरी के पूर्व थानाध्यक्ष अशोक कुमार पर भी कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं। न्यायमूर्ति इंद्रमीत कौर ने सभी पक्षों को स्पष्ट करने का निर्देश दिया है कि मामले की निष्पक्ष जांच के लिए क्यों न जांच किसी अन्य एजेंसी को सौंप दी जाए।
इसके अलावा याची महिला को क्यों न सुरक्षा देने का निर्देश दिया जाए। याची महिला ने आरोप लगाया कि इसी थाने में कार्यरत दो पुलिस अधिकारियों ने अन्य आरोपियों के साथ मिलकर उससे रेप किया और जान से मारने की धमकियां दे रहे हैं।
पति से झगड़े के बाद बढ़ा मामला
इतना ही नहीं तत्कालीन थानाध्यक्ष अशोक कुमार ने भी उससे गाली गलौच कर दर्ज प्राथमिकी में आरोपियों के नाम दर्ज नहीं होने दिए और उसे धमकाया।
याची का तर्क है कि मंगोलपुरी के पुलिस अधिकारी इस मामले में लिप्त हैं, ऐसे में इसी थाने में मामले की निष्पक्ष जांच नहीं हो सकती और जांच किसी अन्य एजेंसी को सौंपी जाए।
महिला ने आरोपियों पर अपनी नाबालिग पुत्री पर भी गलत नजर डालने का आरोप लगाया है। गौरतलब है कि पीतमपुरा क्षेत्र निवासी महिला के वकील नरेन्द्र शर्मा ने अदालत को बताया कि उनकी मुवक्किल का अपने पति से झगड़ा हो गया था और उसने 26 फरवरी, 2014 को मंगोलपुरी थाने में शिकायत दर्ज करवाई कि उसे पति घर खर्च के लिए पैसे नहीं दे रहा।
हेड कांस्टेबल ने किया महिला का रेप
हेड कांस्टेबल रामेश्वर ने उनकी मुवक्किल को क्षेत्रीय निवासी सुरेश सहगल, राकेश पाहवा व महावीर प्रसाद से मिलवाया और कहा कि वे उसकी सहायता करेंगे।
इसके बाद थानाध्यक्ष ने उसके पति के खिलाफ गलत प्राथमिकी दर्ज कर ली और सहायता के नाम पर सुरेश, राकेश व अनीता नाम की महिला ने उसके घर के कागजात लेकर अपने नाम करवा लिए।
अप्रैल 14 में हेड कांस्टेबल रामेश्वर सुरेश व तरुण एंकलेव निवासी विरेन्द्र ने उससे रेप किया।
महिला की बेटी पर भी थी पुलिस की नजर
इतना ही नहीं पाहवा प्रॉपर्टी के मालिक ने उसकी बेटी को नौकरी पर लगवाने के नाम पर उससे भी छेड़छाड़ की। उनकी मुवक्किल ने थानाध्यक्ष को शिकायत की तो उसने उसे भगा दिया।
उन्होंने कहा कि आखिर पुलिस आयुक्त व क्षेत्रीय डीसीपी के हस्तक्षेप पर थानाध्यक्ष ने 14 अगस्त को धारा 370, 376 व 109 के तहत मुकदमा तो दर्ज कर लिया, लेकिन उसके द्वारा दी शिकायत को अनदेखा कर आरोपियों को बचाने के लिए उनका नाम नहीं दिया व न ही रेप के संबंध में पूरा विवरण लिखा।
स्पष्ट है कि वे आरोपियों को बचाने का प्रयास कर रहे हैं। मुवक्किल को सुरक्षा प्रदान करने के अलावा जांच अन्य एजेंसी को सौंपी जाए व आरोपियों पर कड़ी कार्रवाई की जाए।