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Delhi NCR News: 121 लीटर जल से भोले का करेंगे जलाभिषेक
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एक महीने से मोहित और आर्यन तय कर रहे यात्रा
फिरदौस आलम
पूर्वी दिल्ली। मोती नगर निवासी मोहित और पालम निवासी आर्यन इस बार अपने वजन से ढाई गुना अधिक जल से भोलेनाथ का जलाभिषेक करेंगे। वह दोनों करीब एक महीने से कांवड़ को कांधे पर उठाकर चल रहे हैं। रोजाना कई किलोमीटर पैदल चलते हैं। लंबी दूरी का सफर तय करने पर उनके पैरों में छाले पड़ गए हैं लेकिन उन्हें इसकी थोड़ी-सी भी चिंता नहीं है। शिवजी का नाम जपते हुए वह चलते ही जा रहे हैं। उनका कहना है कि वह भोले की भक्ति में पूरी दुनिया घूम सकते हैं।
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हमारे परिवार में कांवड़ लाने की परंपरा 28 साल से चली आ रही है। इससे पहले मेरे पिता कांवड़ लेकर आते थे लेकिन उनकी उम्र ढलने के बाद यह जिम्मा मैंने उठा लिया। रास्ते में बहुत सारी चुनौतियां सामने आई। खाने-पीने और रुकने के लिए कोई खास इंतजाम नहीं थे लेकिन मैं भोले की आराधना करता रहा। मैं सात बार कांवड़ यात्रा पूरी कर चुका हूं। पहली यात्रा में 45 लीटर जल लाकर भोले को स्नान करवाया था। इस बार 121 लीटर जल से अपने घर के पास स्थित गौरी नाथ मंदिर में शिवजी का जलाभिषेक करूंगा। -आर्यन कुमार
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कांवड़ लाने की शुरुआत मेरे बड़े भाई ने की थी। उनके साथ मैं दो बार कांवड़ ला चुका था लेकिन दुर्भाग्य से उनका निधन हो गया। भाई के गुजर जाने के बाद अब मैं अकेले ही कांवड़ लेने जाता हूं। इस बार हर की पौड़ी से जल उठाया है। हरिद्वार से शाहदरा तक 220 किलोमीटर का सफर तय कर लिया है। अभी करीब 15 किलोमीटर की दूरी और तय करनी है। मन में बस इतनी सी आस है कि भोले बाबा मेरे माता-पिता को सही सलामत रखें। -मोहित
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फिरदौस आलम
पूर्वी दिल्ली। मोती नगर निवासी मोहित और पालम निवासी आर्यन इस बार अपने वजन से ढाई गुना अधिक जल से भोलेनाथ का जलाभिषेक करेंगे। वह दोनों करीब एक महीने से कांवड़ को कांधे पर उठाकर चल रहे हैं। रोजाना कई किलोमीटर पैदल चलते हैं। लंबी दूरी का सफर तय करने पर उनके पैरों में छाले पड़ गए हैं लेकिन उन्हें इसकी थोड़ी-सी भी चिंता नहीं है। शिवजी का नाम जपते हुए वह चलते ही जा रहे हैं। उनका कहना है कि वह भोले की भक्ति में पूरी दुनिया घूम सकते हैं।
हमारे परिवार में कांवड़ लाने की परंपरा 28 साल से चली आ रही है। इससे पहले मेरे पिता कांवड़ लेकर आते थे लेकिन उनकी उम्र ढलने के बाद यह जिम्मा मैंने उठा लिया। रास्ते में बहुत सारी चुनौतियां सामने आई। खाने-पीने और रुकने के लिए कोई खास इंतजाम नहीं थे लेकिन मैं भोले की आराधना करता रहा। मैं सात बार कांवड़ यात्रा पूरी कर चुका हूं। पहली यात्रा में 45 लीटर जल लाकर भोले को स्नान करवाया था। इस बार 121 लीटर जल से अपने घर के पास स्थित गौरी नाथ मंदिर में शिवजी का जलाभिषेक करूंगा। -आर्यन कुमार
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कांवड़ लाने की शुरुआत मेरे बड़े भाई ने की थी। उनके साथ मैं दो बार कांवड़ ला चुका था लेकिन दुर्भाग्य से उनका निधन हो गया। भाई के गुजर जाने के बाद अब मैं अकेले ही कांवड़ लेने जाता हूं। इस बार हर की पौड़ी से जल उठाया है। हरिद्वार से शाहदरा तक 220 किलोमीटर का सफर तय कर लिया है। अभी करीब 15 किलोमीटर की दूरी और तय करनी है। मन में बस इतनी सी आस है कि भोले बाबा मेरे माता-पिता को सही सलामत रखें। -मोहित
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