फर्जीवाड़े की परतें खुलती देख हर शख्स है हैरान
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फर्जी डिग्री मामले में फंसे दिल्ली सरकार के पूर्व कानून मंत्री जितेंद्र सिंह तोमर की मुश्किलें अब ओर बढ़ने वाली हैं। जैसे-जैसे परतें खुलती जा रही हैं कि तोमर ने डिग्रियां ही फर्जी नहीं लीं, बल्कि उनको सही साबित करने के लिए आरटीआई भी फर्जी बनवा ली तभी से आप आदमी पार्टी (आप) से जुड़े वकीलों ने दूरी बनानी शुरू कर दी है।
अब संभवत: तोमर को जेब से पैसे खर्च कर अपनी जिरह के लिए वकील भी नियुक्त करने पड़ सकते हैं। हाईकोर्ट के पूर्व व वर्तमान अध्यक्ष क्रमश: एएस चंडियोक व राजीव खोसला, आप नेता एवं अधिवक्ता एचएस फुलका, ऑल दिल्ली बार एसोसिएशन की समन्वय समिति के चेयरमैन आरके वाधवा इत्यादि तोमर की पैरवी के लिए मैदान में उतर आए थे।
अब पुलिस ने जैसे-जैसे यूपी व बिहार से तोमर की जांच रिपोर्ट जारी की है, आप पार्टी ही नहीं उनकी पैरवी करने वाले वकील भी दंग हैं। वकीलों का कहना है कि क्या इस स्तर भी कोई फर्जीवाड़ा कर सकता है।
किसी के पास नहीं तोमर को बचाने का रास्ता ?
यह तो वही बात हो गई कि एक झूठ को छिपाने के लिए सौ झूठ बोलने पड़ते हैं। अधिवक्ता फुलका विदेश चले गए हैं, वाधवा भी पीछे हट गए। चंडियोक ट्रायल कोर्ट में पेश नहीं हो रहे।
खोसला का मानना है कि जिस प्रकार गिरफ्तारी हुई है, उसमें गैरकानूनी तरीका अपनाया गया है, पुलिस फिर ऐसा न करे इसके लिए दिशा-निर्देश तय करवाना जरूरी है।
अब तय है जैसे ही पार्टी ने तोमर से किनारा किया, वकील भी किनारा कर लेंगे और तोमर को अपने स्तर पर पैरवी करवानी होगी। इस मुद्दे को लेकर काउंसिल के सदस्यों में भी मतभेद हो गए थे।