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आखिर किसने लिखी पीएम मोदी को खुली चिट्ठी
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Sat, 09 May 2015 09:47 AM IST
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केंद्र सरकार की तरफ से कई गैर सरकारी संगठनों पर कार्रवाई की घोषणा के बाद स्वयं सेवी संगठनों (एनजीओ) के प्रतिनिधियों ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को खुला खत लिखा है। इसमें केंद्र सरकार की मंशा पर सवाल उठाते हुए पूछा गया है कि कई मसलों पर सरकार से अलग राय रखने वालों को राष्ट्रद्रोही व विकास विरोधी कहना कहां तक उचित है। साथ ही अपील की गई है कि सरकार और एनजीओ के बीच विश्वास बहाली की दिशा में उचित कदम उठाने चाहिए।
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प्रेस क्लब में एनजीओ प्रतिनिधियों ने शुक्रवार को इस बारे में मीडिया से बात भी की। हक की सह निदेशक इनाक्षी गांगुली ने कहा कि सरकार जिस तरह से सिविल सोसायटी संगठनों के खिलाफ कार्रवाई कर रही है, सामाजिक संगठन उससे असहज महसूस कर रहे हैं।
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सरकार के शत्रुतापूर्ण रवैये के बाद हमें प्रधानमंत्री को खुला खत लिखना पड़ा। उम्मीद है कि वह इसका जवाब देंगे। वहीं, एनसीपीआरआई की अंजलि भारद्वाज ने कहा कि सरकार की तरह हमारा भी मानना है कि सिविल सोसायटी संगठन कानून के दायरे में काम करें और उसमें पारदर्शिता हो। लेकिन सरकार जिस तरह से एनजीओ को निशाना बना रही है, हमारी आपत्ति उस पर है।
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पॉल दिवाकर ने कहा कि अगर हम सब लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध हैं तो हमें महसूस करना होगा कि सामुदायिक संस्थाएं और समुदाय के लोग ही लोकतंत्र को बचाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
जब एनजीओ आम लोगों को संवैधानिक और कानूनी अधिकार दिलाने की लड़ाई लड़ते हैं, तब उन्हें सरकारी अधिकारियों की कार्रवाई झेलनी पड़ती है। जबकि समाजसेवी बिराज पटनायक ने कहा कि सरकार को पारदर्शिता के मानक तय करने चाहिए। कॉरपोरेट सेक्टर की तरफ से एनजीओ को मिले फंड की जांच होनी चाहिए।