AAP किसकी, योगेंद्र की या केजरीवाल की?
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कभी खुद को छोटा-बड़ा भाई मानने वाले अरविंद केजरीवाल-योगेंद्र यादव के बीच खाई इतनी चौड़ी गई है कि इसे पाटना मुमकिन नहीं लगता। इंतजार बंटवारे के औपचारिक ऐलान भर का है।
कमोवेश योगेंद्र खेमा भी मान चुका है कि अलग होना तय है। अब टीम योगेंद्र की कोशिश यही है कि वैकल्पिक राजनीति देने के दावे से निकली आम आदमी पार्टी को टीम केजरीवाल के पाले में जाने दिया जाए। 14 अप्रैल को बुलाई गई बैठक इसी रणनीति का हिस्सा है।
बैठक में शक्ति प्रदर्शन करके योगेंद्र यादव आप पर अपना दावा ठोंक सकते हैं। योगेंद्र यादव-प्रशांत भूषण समेत उनके सभी सहयोगियों ने बेशक राष्ट्रीय परिषद में गुंडागर्दी का आरोप लगाया है, लेकिन अभी तक किसी नेता ने पार्टी तोड़ने की बात नहीं की है।
देश भर से आप समर्थकों से बैठक में शामिल होने की अपील
सूत्र बताते हैं कि अभी तक इसका फैसला ही नहीं हुआ कि आप किसकी है। भले ही टीम केजरीवाल राष्ट्रीय परिषद की बैठक को अपने पक्ष में बता रही है। लेकिन विपक्षी गुट ने बैठक की संवैधानिकता पर ही सवालिया निशान लगाया है। इसके कानूनी पहलू पर विचार हो रहा है। प्रशांत भूषण ने भी कहा है कि सभी विकल्प खुले हैं। जरूरत होने पर मामले की अदालत या चुनाव आयोग में अपील होगी।
दूसरी तरफ, राष्ट्रीय परिषद की बैठक के सियासी पहलू की भी काट निकाली जा रही है। योगेंद्र यादव के खेमे ने 14 अप्रैल को दोबारा राष्ट्रीय परिषद की बैठक बुलाई है। इसके अलावा देश भर से आप समर्थकों से बैठक में शामिल होने की अपील की गई है। इतना ही नहीं, आप के मौजूदा सांसदों/विधायकों को भी पाले में लाने की कोशिश हो रही है।
जिससे साबित किया जा सके कि जनप्रतिनिधि भी उनके साथ हैं। पूरी बैठक को शक्ति प्र्रदर्शन के तौर देखा जा रहा है। अगर बड़ी संख्या में परिषद के सदस्यों की मौजूदगी 14 अप्रैल की बैठक में होती है तो टीम योगेंद्र का आप पर दावा मजबूत हो जाएगा। इससे कानूनी तौर पर भी इनको बढ़त मिल जाएगी।
राष्ट्रीय स्तर तक होगा टीम योगेंद्र का विस्तार
योगेंद्र यादव के नजदीकी बताते हैं कि फिलहाल ज्यादा ध्यान दिल्ली पर नहीं है। इसकी जगह देश भर के आप समर्थकों से संवाद स्थापित किया जा रहा है। वहीं, कोशिश यह भी है कि देश भर के आंदोलनों व वैकल्पिक राजनीति कर रहे छोटे सियासी दलों को भी जोड़ा जाए। इन्हें साथ लाने के लिए टीम योगेंद्र यादव राज्यों को स्वायतता देने की बात कर रही है। दूसरे छोटे सियासी दलों पर पार्टी में विलय के लिए दबाव भी नहीं बनाया जा रहा है।
विधायकों-सांसदों को भी किया जा रहा लामबंद
टीम योंगेद्र विधायकों व सांसदों से भी बात कर रही है। खुले तौर पर दो विधायक देविंदर सेहरावत व पंकज पुष्कर व सांसद धर्मवीर गांधी साथ हैं। सूत्र बताते हैं कि फिलहाल बात चल रही है। करीब बारह विधायक व दो सांसद योगेंद्र यादव द्वारा उठाए गए मुद्दों से सहमत दिखते हैं। सारा कुछ इस पर निर्भर करेगा कि 14 अप्रैल की बैठक में उनकी भागीदारी कितनी रहती है।
पार्टी संविधान राष्ट्रीय परिषद को सर्वोच्च मानता है। 14 अप्रैल की बैठक में अगर परिषद का बहुमत योगेंद्र यादव व उनकी टीम की तरफ रहता है तो पार्टी पर उनकी दावेदारी मजबूत हो जाएगी। हालांकि, पार्टी पर पहला हक संयोजक का बनता है।
श्रीप्रकाश सिंह, राजनीतिक विश्लेषक