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कहां से मिलेगी नोएडा को बिजली

Sat, 13 Dec 2014 09:06 PM IST
Updated Sat, 13 Dec 2014 09:06 PM IST
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whats the way 1100 MW electricity supply in noida.

नोएडा और ग्रेटर नोएडा के सामने बिजली की समस्या एक बड़ी चुनौती बनकर खड़ी है। अगले सात साल में बिजली की मांग बढ़कर 2200 मेगावाट तक पहुंच जाएगी। अगर हालात यूं ही बने रहे तो उत्तर प्रदेश की पहचान बने इन दोनों शहरों की साख पर बट्टा लग जाएगा। तरक्की की रेस में जिस रफ्तार से नोएडा और ग्रेटर नोएडा आगे निकले हैं, बिजली कटौती की बढ़ती समस्या इन शहरों को उसी रफ्तार से पीछे धकेल देगी।

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उत्तर प्रदेश में बिजली कटौती एक बड़ी समस्या है। ‘अमर उजाला’ के लिए किए गए हंसा रिसर्च के सर्वे में भी यही बात सामने आई है। हालांकि, इस सर्वे में गौतमबुद्ध नगर को शामिल नहीं किया गया है, लेकिन राज्य सरकार को सबसे ज्यादा राजस्व देने वाले इस जिले के हालात दूसरे जिलों से अलग नहीं है। इस साल गर्मियों में बिजली की रिकॉर्ड तोड़ मांग ने पूरे जिले में हाहाकार मचाकर रख दिया। इस साल जो हालात बने, वैसे हालात जुलाई 2012 में उत्तरी ग्रिड फेल होने पर बने थे।
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आवासीय सेक्टरों को छह से आठ और औद्योगिक सेक्टरों को पांच से सात घंटे की कटौती झेलनी पड़ी थी। पावर कॉरपोरेशन की तरफ से 2021 का जो प्लान बनाया गया है, उसके मुताबिक अगले सात साल मे 1100 मेगावाट बिजली की जरूरत होगी। हर साल 100 मेगावाट से ज्यादा बिजली की मांग बढ़ेगी, लेकिन इसको पूरा करने के लिए कोई ठोस प्लानिंग अब तक नहीं हुई है।

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कभी नहीं मिली पूरी बिजली

whats the way 1100 MW electricity supply in noida.

उत्तर प्रदेश में बिजली की कमी सबसे बड़ी समस्या है। राज्य के बिजली उत्पादन संयंत्रों से महज 4500 मेगावाट बिजली ही मिल पाती है, जबकि प्रदेश में बिजली की मांग (पीक टाइम में) 12 हजार मेगावाट का आंकड़ा पार कर जाती है। सेंट्रल पूल में उत्तर प्रदेश का कोटा 6000 मेगावाट है, लेकिन कभी भी पूरी बिजली नहीं मिल पाई। ओपन एक्सेस के तहत महंगी बिजली खरीदकर काम चलाना पड़ता है, जिसका असर इमरजेंसी रोस्टिंग के रूप में दिखाई देता है।

सबस्टेशनों में जमीन की अड़चन
हर साल 10 से 15 फीसदी लोड बढ़ रहा है, लेकिन सबस्टेशनों की क्षमता नहीं बढ़ पा रही है। पावर कॉरपोरेशन की तरफ से 765, 400, 220, 132 और 33 केवी के करीब दो दर्जन विद्युत उपकेंद्र बनाने की योजना फाइलों से बाहर नहीं निकल पा रही है। अधिकांश योजनाओं में जमीन की अड़चन बनी हुई है।

वहीं अधिकारी कहते हैं कि बिजली की मांग में हर साल भारी इजाफा हो रहा है। बढ़ते लोड से निपटने के लिए पावर कॉरपोरेशन और प्राधिकरण मिलकर कई योजनाओं पर काम कर रहे हैं। वहीं, बिजली की कमी को पूरा करने के लिए राज्य स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं।

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