नोएडा एसएसपी मामला: वीडियो वायरल होने से वैभव कृष्ण के निलंबन तक, यहां पढ़ें क्या है पूरा मामला
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नोएडा एसएसपी वैभव कृष्ण को सर्विस नियम तोड़ने के आरोप में गुरुवार को निलंबित कर दिया गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रकरण में प्रदेश के डीजीपी ओपी सिंह व मुख्य सचिव गृह को बुलाकर गहरी नाराजगी जताते हुए यह कार्रवाई की है। एसएसपी वैभव कृष्ण ने उत्तर प्रदेश में पुलिस विभाग पर तबादला प्रकरण पर सवाल उठाया था। इसपर सवाल खड़ा करते हुए उनका वीडियो सामने आया था। इसके अलावा एसएसपी और एक महिला के बीच अश्लील चैट का वीडियो भी वायरल हुआ था। यह वीडियो 13 मिनट से ज्यादा के हैं जो कई हिस्सों में वायरल हुए थे। कथित वीडियो के वायरल होने के बाद यह मामला तूल पकड़ता गया।
क्या था वीडियो में?
वीडियो में साइबर इमरजेंसी रिस्पांस टीम (सीईआरटी) की रिपोर्ट को आधार बनाकर एसएसपी ने पांच आईपीएस अफसरों पर संगीन आरोप लगाए थे। इस रिपोर्ट में ट्रांसफर-पोस्टिंग के नाम पर चल रहे गड़बड़झाले की ओर इशारा कर जनपद के एसएसपी ने पुलिस विभाग में हड़कंप मचा दिया था। इस रिपोर्ट में न केवल चुनिंदा आईपीएस अफसरों के नाम शामिल थे, बल्कि 9 हेड कांस्टेबल से लेकर इंस्पेक्टर तक के नाम शामिल थे। रिपोर्ट में ट्रांसफर-पोस्टिंग के इस खेल का एक मास्टरमाइंड चंदन राय और दूसरा अतुल शुक्ला एक आरएसएस कार्यकर्ता का खास बताया गया था।
एसएसपी वैभव कृष्ण ने खुद दर्ज कराई एफआईआर
जब यह मामला संज्ञान में आया तो एसएसपी वैभव कृष्ण ने एक जनवरी 2020 की रात सेक्टर-20 थाने में आईटी एक्ट की धाराओं के तहत अज्ञात आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज करा दिया। इसके बाद पुलिस महानिदेशक ओपी सिंह ने एडीजी मेरठ परिक्षेत्र आलोक सिंह की निगरानी में इसकी विवेचना हापुड़ के पुलिस अधीक्षक संजीव सुमन को सौंप दी। आईजी संजीव सुमन की निगरानी में वीडियो को फॉरेंसिक जांच के लिए गुजरात भेजा गया। संजीव सुमन एसएसपी वैभव कृष्ण से साल जूनियर 2014 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं।
वैभव कृष्ण ने वीडियो को फर्जी करार दिया
बहरहाल, एसएसपी वैभव कृष्ण ने कहा था कि उन्हें बदनाम करने के लिए अराजक तत्वों ने आपत्तिजनक वीडियो सोशल मीडिया पर जारी किया है। एसएसपी वैभव कृष्ण ने मीडिया को बताया था कि छेड़छाड़ कर बनाए (मार्फ्ड) वीडियो व्हाट्सएप पर जारी किए गए हैं। यह साजिश का हिस्सा है और उनकी छवि खराब करने के मकसद से ऐसा किया गया है। इस तरह की कोशिश एक माह पहले भी की गई थी।
सीएम योगी ने लिया संज्ञान
दो जनवरी को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस मामले का स्वत: संज्ञान लिया। उन्होंने मामले पर आईजी रेंज मेरठ आलोक सिंह से जांच रिपोर्ट मांगी। शुक्रवार यानी तीन जनवरी को मेरठ जोन के एडीजी प्रशांत कुमार ने प्रेसवार्ता बुलाकर कहा कि एसएसपी गौतमबुद्धनगर वैभव कृष्ण से संबंधित जितनी भी शिकायतें हैं, उन सबकी जांच की जा रही है। एडीजी ने गोपनीय पत्र को सार्वजनिक करने को पुलिस सेवा नियमावली का उल्लंघन करार दिया था। उन्होंने आईजी मेरठ के जरिए इस मामले में नोएडा के एसएसपी से 24 घंटे में स्पष्टीकरण भी मांगा था।
इसके बाद सोमवार को मेरठ के आईजी आलोक सिंह लखनऊ पहुंचे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, अपर मुख्य सचिव अवनीश कुमार अवस्थी व डीजीपी की भेंट हुई, जिसे लेकर खासी चर्चा रही। मंगलवार, सात जनवरी को मेरठ के आईजी आलोक सिंह ने नोएडा के एसएसपी वैभव कृष्ण का स्पष्टीकरण डीजीपी ओपी सिंह को सौंप दिया।
बुधवार से ही शुरू हो गई थी निलंबन की तैयारी
इसके बाद बुधवार यानी आठ जनवरी को उत्तर प्रदेश डीजीपी ओपी सिंह छुट्टी से लौटे तो सीएम योगी ने उन्हें तलब किया, जिसके बाद से नोएडा एसएसपी वैभव कृष्ण को निलंबित करने की तैयारी शुरू कर दी गई थी।
आज गुजरात के फॉरेंसिक लैब से रिपोर्ट आते ही वैभव कृष्ण को सस्पेंड कर दिया गया। फॉरेंसिक लैब की रिपोर्ट में वह वीडियो और चैट सही पाए गए हैं, जिसे वैभव कृष्ण ने फर्जी बताया था। फॉरेंसिक जांच में सामने आया है कि वीडियो एडिटेड और मार्फ्ड नहीं था।