कैसे लगेगी इंटरनेट आधारित कैब कंपनी पर रोक
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कैब में रेप के बाद दिल्ली परिवहन विभाग ने आनन-फानन में वेब बेस्ड कैब सर्विस प्रोवाइडर कंपनियों पर बैन तो लगा दिया। मगर इन्हें रोकने के लिए विभाग के पास कोई तंत्र नहीं है। विभाग को यह नहीं पता की वह कैसे इनके मोबाइल एप्लीकेशन पर रोक लगाएं, जिससे बुकिंग बंद की जा सके। परिवहन विभाग ने इसके लिए आईटी विभाग को पत्र लिखकर मदद मांगी है।
विभाग के पास कोई सिस्टम न होने का फायदा बैन के बाद भी कंपनियां उठा रही हैं। उबर जैसी ही कैब कंपनी ओला ने मंगलवार शाम तीन बजे तक कैब बुकिंग कर लोगों को गंतव्य तक भी पहुंचाया। इसमें सफर करने वाली एक महिला ने बताया कि ओला कैब बुक कर आईटीओ तक सफर किया। हालांकि उबर ने अपनी सर्विस पर रोक लगा दी है।
परिवहन विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि अभी तक हमने ऐसी वेब बेस्ड कंपनियों के साथ काम नहीं किया है। अब हमने आईटी विभाग से मदद मांगी है कि हम किस तरह से मोबाइल एप्लीकेशन के जरिये बुकिंग करने वाली कंपनियों के खिलाफ कार्रवाई कर सकते हैं। विभाग भले ही इससे अंजान बन रहा हो मगर इस तरह के अवैध कैब ऑपरेशन की शिकायत विभाग के पास पहली बार नहीं आई है।
इससे पहले रेडियो टैक्सी सर्विस एसोसिएशन ने भी ओला समेत ऐसी कंपनियों के खिलाफ विभाग में शिकायत की थी। हालांकि तब विभाग ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। यह जानते हुए भी की ये कंपनियां ऑल इंडिया टूरिस्ट परमिट के डीजल वाहनों को दिल्ली में लोकल सवारी लेकर चलने के लिए बुक कर रहे हैं, वह चुप बैठे रहे।
कैब रेप मामले में 10 दिन में दाखिल होगी चार्जशीट
उत्तरी जिले के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि एक टीम आरोपी को लेकर मंगलवार शाम को मथुरा गई है। पुलिस उस रूट की पहचान कर रही है जिस रूट से आरोपी वारदात के बाद दिल्ली से भागकर मथुरा गया था।
आरोपी की निशानदेही पर उसके स्मार्ट फोन की बरामदगी का प्रयास भी किया जा है। उसके दो मोबाइल पहले ही बरामद हो चुके हैं। वारदात के समय आरोपी ने जो कपड़े पहने भी वो भी मिल गए हैं।
आरोपी शिवकुमार यादव के खिलाफ 20 दिन में चार्जशीट दाखिल कर दी जाएगी। दिल्ली पुलिस आयुक्त के आदेश के अनुसार, दिल्ली में अब दुष्कर्म व छेड़छाड़ के मामले में 20 दिन में चार्जशीट दाखिल की जाती है।
दुष्कर्म के मामले में 20 दिन में चार्जशीट दाखिल नहीं हो पाती है तो जिला डीसीपी को संयुक्त पुलिस आयुक्त को बताना होगा। अगर 30 दिन में चार्जशीट दाखिल नहीं होती है तो संयुक्त पुलिस आयुक्त को सीनियर अधिकारियों को जबाब देना होता है।