हमें पता है केंद्र और दिल्ली सरकार के बीच क्या हो रहा है: सुप्रीम कोर्ट
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सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि केंद्र और दिल्ली सरकार के बीच चल रहे टकराव से वह भलीभांति अवगत है। शीर्ष अदालत ने इस मामले में दखल देने से इनकार करते हुए कहा कि समय आने पर जनता उनके कामकाज को देखकर अपना फैसला सुनाएगी। शीर्ष अदालत ने कहा कि दोनों सरकारों को मिल बैठकर इसका समाधान निकालना चाहिए।
न्यायमूर्ति टीएस ठाकुर और न्यायमूर्ति गोपाल गौड़ा की पीठ ने कहा कि हम जानते हैं कि दिल्ली में शासन और प्रशासन को लेकर समस्या है और कई मसलों को लेकर लोगों के बीच सहमति नहीं बन पा रही है।
अखबारों में इससे संबंधित खबरें भरी पड़ी रहती हैं। लिहाजा जरूरी है कि दोनों सरकार आमने-सामने बैठकर बातचीत करें। पीठ ने कहा कि अगर शासन को लेकर कमी है तो आम जनता समय आने पर अपना फैसला सुनाएगी।
जनता लेगी निर्णय, सिखाएगी सबक
वास्तव में आम जनता उनके कामों को देखते हुए उन पर निर्णय लेगी। शीर्ष अदालत ने ये टिप्पणी एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान की।
याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील सिद्धार्थ लूथरा ने पीठ केसमक्ष कहा कि दिल्ली में शासन व्यवस्था सही नहीं है, जिस कारण आम लोगों को कई गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
याचिका में अदालत से गुहार की गई थी कि केंद्र और दिल्ली सरकार को यह निर्देश दिया जाए कि वे अपना काम इस तरीके से करें कि आम लोगों को कोई समस्या न हो।
दोनों सरकारों के बीच जंग छिड़ी हुई है
दोनों सरकारों के बीच जंग छिड़ी हुई है। दोनों संवैधनिक दायित्वों का निर्वाह नहीं कर रही हैं। यहीं कारण है कि साफ-सफाई, स्वास्थ्य, कानून-व्यवस्था जैसी परेशानी को पूरी तरह नजरअंदाज किया जा रहा है।
लोग डेंगू से मर रहे हैं और दोनों सरकार एक दूसरे पर दोषारोपण कर रही है। सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर गौर करने केबाद कहा कि हम इस तरह का निर्देश जारी नहीं कर सकते क्योंकि सभी अथॉरिटी से आशा की जाती है कि वह संविधान और कानून के मुताबिक काम करें।
शासन व्यवस्था से संबंधित मसले पर कोर्ट कोई निर्देश नहीं दे सकता। पीठ ने कहा कि इस संबंध में कोई न्यायिक आदेश पारित नहीं किया जा सकता। अदालत ने वरिष्ठ वकील लूथरा से कहा कि अगर जनहित से जुड़ी कोई विशिष्ट परेशानी को हमारे समक्ष लाया जाएगा तो उस पर जरूर विचार किया जाएगा। इसकेबाद वरिष्ठ वकील ने याचिका वापस ले ली।