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पिता से गजेंद्र के संबंधों का सच खोलती 5 बातें

Fri, 24 Apr 2015 10:46 PM IST
Updated Fri, 24 Apr 2015 10:46 PM IST
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Was Gajendra death a suicide or accident

गजेंद्र सिंह के गांव नांगल झामरवाड़ा में आप किसी से बात करें तो उनके मन में इस दुर्घटना को लेकर जितना दुख है उतनी ही शंका भी।

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असल में गजेंद्र के असामयिक निधन से जुड़े कुछ ऐसे सवाल हैं जिनका जवाब कोई नहीं दे पा रहा है। पहला सवाल जो गजेंद्र के परिवार से लेकर उसके दोस्तों तक के जहन में घूम रहा है कि क्या गजेंद्र ने सच में कोई सुसाइड नोट लिखा था?

दूसरा सवाल ये कि अगर उसने यह नोट लिखा भी था तो क्या किसी को इस बारे में कोई जानकारी क्यों नहीं दी? तीसरा सवाल ये कि गजेंद्र की मौत जिस गमछे से लटक कर हुई वो उसे किसने दिया?
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चौथा सवाल कि आखिर गजेंद्र दिल्ली किसकी लड़ाई लड़ने गया था? अपनी या किसानों की? और पांचवा और सबसे महत्वपूर्ण सवाल ये कि गजेंद्र के अपने पिता के साथ संबंध कैसे थे?
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क्या है पहले सवाल का जवाब

Was Gajendra death a suicide or accident

इन सारे सवालों का सही जवाब तो पुलिस जांच के ही बाद सामने आएगा लेकिन, गजेंद्र के गांव वालों के लिए इन सवालों के जवाब पाना सबसे जरूरी हो गया है।

गजेंद्र की बेटी मेघा से लेकर उसके भाई विजेंद्र सिंह तक सभी ने कहा है कि आत्महत्या वाले दिन गजेंद्र के हाथ से गिरने वाले जिस नोट को उसका सुसाइड नोट बताया जा रहा है उसमें गजेंद्र की हैंडराइटिंग है ही नहीं।

आत्महत्या के अगले ही दिन यह बात भी सामने आई कि गजेंद्र के हाथ से जो नोट गिरा वो सुसाइड नोट नहीं था बल्कि, गजेंद्र एक नोट लिख कर लाया था जिसे वह सबके सामने बोलना चाहता था। हालांकि इस बात की पूरी जांच गजेंद्र के हैंडराइटिंग की फोरेंसिक जांच के बाद ही चल पाएगा।

क्या सच में ‌गजेंद्र बर्बाद हो गया था?

Was Gajendra death a suicide or accident

कहा जा रहा है कि गजेंद्र अपनी फसल बर्बाद होने से परेशान था और उसके पास अपने परिवार के भरण-पोषण का कोई दूसरा रास्ता नहीं बचा था।

लेकिन गजेंद्र और उसके पिता की आर्थिक स्थिती इस बात से अलग ही तस्वीर पेश करती है। गजेंद्र के परिवार के पास 17 ‌बीघा जमीन है। इसके अलावा उसके खेत के दोनों ओर दो बाग और एक अच्छा खासा पक्का मकान भी है।

खेती के अलावा गजेंद्र के पास पगड़ी बांधने की कला भी थी जिससे भी वह कमाई करता था। खेती के काम में अपने पिता का हाथ बंटाने के बाद खाली समय में वह इस काम को करता था।

किसने दिया था गजेंद्र को गमछा?

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गांव वालों से लेकर उसके घर वालों तक सबका यह कहना है कि गजेंद्र कभी भी गमछा अपने साथ नहीं रखता था। फिर अचानक दिल्ली पहुंचने के साथ ही उसके पास गमछा कहां से आ गया?

बता दें कि इस गमछे से लटकने के कारण ही बुधवार को जंतर-मंतर पर गजेंद्र की मौत हो गई थी। खुद गजेंद्र की बहन ने भी मीडिया से यह कहा है आत्महत्या से तीन दिन पहले जब वह गांव से निकला तो उसने बताया था कि वह जयपुर जा रहा है।

यही कारण है कि जब बुधवार को उन्हें पता चला कि उनका भाई दिल्ली में है और उसने आत्महत्या कर ली है तो उन्हें इस खबर पर विश्वास करना मुश्किल हो रहा था।

आखिर वह किसकी लड़ाई लड़ने आया था दिल्ली?

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गजेंद्र के हाथ से जो नोट बरामद हुआ उससे पता चलता है‌ कि वह फसल की बर्बादी से परेशान था। जबकि इस साल मार्च में जब अचानक मौसल बदला तो राजस्‍थान के 33 जिलों में फसलों को नुकसान हुआ।

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक गजेंद्र के गांव में 20 से 30 प्रतिशत फसलों को इस बेमौसम बारिश से नुकसान हुआ था। हालांकि गजेंद्र के गांव वाले इस आंकड़े को सही नहीं मानते।

लेकिन गजेंद्र के घर की आर्थिक स्थिती ऐसी भी नहीं थी कि फसल के नुकसान के बाद उसके घर का खर्च चलना मुश्किल हो रहा था। ये बात गजेंद्र के परिवार सहित उसके गांव वाले भी मानते हैं।

इससे जुड़ा एक तथ्य यह भी है कि वह परिवार की एक शादी के लिए डेढ़ लाख रुपये का योगदान देने का वादा कर चुका था जो उसने हाल ही में पगड़ी बांधने के बदले कमाए थे।

पिता से कैसे थे गजेंद्र के संबंध?

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गजेंद्र के नोट में लिखा था कि उसके पिता ने उसे घर से निकाल दिया था। जबकि उसके घर और गांव वाले इससे विपरीत कहानी बयां करते हैं।

जैसे ही गजेंद्र के पिता को उसके मरने की खबर मिली वह कई बार बेहोश हो गए। गजेंद्र के परिवार वालों का कहना है कि उसके पिता ने उसे घर से कभी नहीं निकाला।

गांव वालों की मानें तो गजेंद्र के पिता असल में उसे बहुत प्यार करते थे। यही कारण्‍ा है कि जब मीडिया के लोगों ने उनसे गजेंद्र के बारे में जानना चाहा तो वह इतने भावुक हो गए कि कुछ बोल ही नहीं पाए।

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