'न्यौता चाहिए तो हो जाएं भाजपा में शामिल'
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गणतंत्र दिवस के परेड में शामिल होने और आगे वाली सीट पर बैठने से दिल्ली बीजेपी की सीएम उम्मीदवार किरण बेदी पर कांग्रेस और आप ने कड़ा ऐतराज जताया है। दोनों पार्टियों का आरोप है कि ऐसा करके बीजेपी ने गणतंत्र दिवस जैसे राष्ट्रीय आयोजन को राजनीतिक रंग देने की कोशिश की है।
इस ऐतराज के बाद बेदी ने केजरीवाल से कहा कि वह बच्चों जैसी बातें न करें और अब तो बड़े हो जाएं। बेदी आगे बोलीं कि अगर केजरीवला को न्यौता चाहिए था तो वो बीजेपी ज्वाइन कर लेते।
एक टीवी चैनल पर बेदी बोलीं कि उन्हें लगता है कि केजरीवाल रोने-धोने का खेल खेल रहे हैं। उन्होंने ये भी कहा कि इंविटेशन कभी मांगे नहीं जाते, वो नियम, कायदे और प्रोटोकॉल के अधीन दिए जाते हैं।
शीला दीक्षित को भी नहीं मिला न्यौता
बेदी के ये बयान देते ही पूरे सोशल मीडिया में ये वारयरल हो गया। बेदी से जुड़े सूत्रों का कहना है कि बेदी ने यह कमेंट मजाकिया लहजे में किया गया था। केजरीवाल के बीजेपी को ज्वाइन कर लेने वाले बेदी के कमेंट ने आप की चुनावी रैलियों में भी जगह बनाई।
बेदी के खिलाफ बोलतेत हुए आप प्रवक्ता संजय सिंह बेदी के इस रवैये को निराशाजनक और अवसरवादी बताया। इस विवाद ने तूल तब पकड़ा जब दिल्ली के दो पूर्व सीएम शीला दीक्षित और अरविंद केजरीवाल ने दावा किया कि उन्हें गणतंत्र दिवस परेड पर न्यौता नहीं दिया गया।
शीराल दीक्षित ने इस बात की पुष्टि की कि परेड के लिए उन्हें कोई न्यौता नहीं मिला। शीला दीक्षित ने आगे कहा कि राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हैं पर ये तो शिष्टाचार है।
सोशल मीडिया पर भी छाया रहा मुद्दा
इस पूरे प्रकरण पर सोमवार दिनभर सोशल मीडिया पर आप समर्थकों के ट्वीट्स आते रहे। इन ट्वीट्स में ये कहा जा रहा था कि मोदी सरकार पूर्व सीएम केजरीवाल के खिलाफ भेदभावपूर्ण रवैया अपना रही है।
आप समर्थकों द्वारा ट्विटर पर चलाए जा रहे सरकार विरोधी ट्वीट्स के जवाब में बीजेपी की ट्विटर ब्रिगेड ने भी अभियान छेड़ दिया। बीजेपी वालों ने पिछले साल की रिपोर्ट्स का हवाला देते हुए यह दिखाना शुरू कर दिया कि सीएम रहते हुए केजरीवाल ने पिछले 26 जनवरी पर छत्रसाल स्टेडियम में राष्ट्रीय ध्वज को सलामी नहीं दी थी।
बता दें कि बीते शनिवार केजरीवाल ने म़ीडिया तो बताया था कि वह गणतंत्र दिवस परेड का न्यौता न मिलने से काफी दुखी हैं। इस बारे में बोलते हुए आप के वरिष्ठ नेता आशुतोष ने कहा कि एक तरफ तो किरण बेदी को बुलाया गया और उन्हें पहली लाइन में भी बिठाया गया।
वहीं अरविंद केजरीवाल को तो बुलाया भी नहीं गया। यह बहुत शर्म की बात है कि गणतंत्र दिवस जैसे आयोजनों को भी राजनीतिक रंग दिया जा रहा है। रक्षा मंत्रालय, जो परेड के लिए न्यौता भेजने और सीट अरेंजमेंट करने का काम करता है, कोई भी डीटेल देने से इंकार कर दिया।