एक और कानूनी पचड़े में फंस सकते हैं केजरीवाल
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हाईकोर्ट ने अरविंद केजरीवाल द्वारा चुनावों में तय राशि से अधिक खर्च करने के आरोप मामले में वाद बिंदु तय कर दिए हैं। अदालत ने शिकायतकर्ता भाजपा नेता विजेंद्र गुप्ता को इन बिंदुओं पर साक्ष्य पेश करने का निर्देश दिया है।
अदालत ने स्पष्ट किया कि वे साक्ष्यों का अध्ययन करने के बाद ही मामले में आगे सुनवाई करेंगे। केजरीवाल के खिलाफ गुप्ता ने याचिका दायर की है।
न्यायमूर्ति विपिन सांघी ने गुप्ता की याचिका पर अब 10 नवंबर को सुनवाई तय की है। अदालत ने उन्हें साक्ष्य संयुक्त रजिस्ट्रार के समक्ष पेश करने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि वे बताएं कि केजरीवाल द्वारा रॉक शो ‘जीत की गूंज-वोट फॉर चेंज’ के खर्च को किस आधार पर उनके चुनाव खर्च में जोड़ा जाए।
इसीप्रकार जन प्रतिनिधित्व कानून के तहत खर्च ज्यादा है। सुनवाई के दौरान अदालत ने केजरीवाल के उस तर्क को खारिज कर दिया कि गुप्ता ने गलत तरीके से याचिका दायर की है और उनके खिलाफ फर्जीवाड़ा करने पर मुकदमा चलाने का निर्देश दिया जाए। अदालत ने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में ऐसा आदेश नहीं दिया जा सकता।
केजरीवाल के तर्क
केजरीवाल व सोमनाथ भारती ने भाजपा नेताओं के उस आरोप को गलत बताया है कि उन्होंने जन प्रतिनिधित्व कानून का उल्लंघन करके चुनावों में तय सीमा से अधिक धन का इस्तेमाल किया था। उन्होंने तर्क रखा कि रॉक शो के खर्च को आधार बनाकर उनके खिलाफ जो याचिका दायर की गई है वह बेबुनियाद व आधारहीन है।
यह कोई रॉक शो नहीं था, बल्कि पार्टी की पब्लिक मीटिंग थी। जिन कलाकारों ने प्रस्तुति दी, उन्हें पार्टी ने कोई भुगतान नहीं किया और शपथपत्र सहित चुनाव आयोग को इसकी जानकारी दी गई है।
यह है मामला
भाजपा के प्रत्याशी रहे विजेंद्र गुप्ता व मालवीय नगर से प्रत्याशी रही आरती मेहरा ने अलग-अलग याचिका दायर की थी। दोनों ने जंतर-मंतर पर 23 नवंबर, 13 को हुए रॉक शो को मुख्य आधार बनाया है। दोनों के अधिवक्ता ने तर्क रखा कि तय नियमों के तहत चुनावों में हर प्रत्याशी 14 लाख रुपये खर्च कर सकता है।
केजरीवाल ने चुनाव खर्च 3,99,953 व सोमनाथ भारती ने 4,95,330 रुपये दिखाया है। दोनों ने रॉक शो के खर्च को नहीं जोड़ा है। अत: दोनों का चुनाव रद्द करके अयोग्य ठहराया जाए। इसके अलावा दोनों पर छह वर्ष के लिए चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध लगाया जाना चाहिए।