फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   Victims said - the wound of Sikh riots has not healed even after 40 years

Delhi Riots 1984 : पीड़ित बोले- 40 साल बाद भी नहीं भरा सिख दंगों का घाव, अपनों को याद कर बहती हैं आंखें

Thu, 13 Feb 2025 05:46 AM IST
दुष्यंत शर्मा गौरव बाजपेई, नई दिल्ली
गौरव बाजपेई, नई दिल्ली Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Thu, 13 Feb 2025 05:46 AM IST
सार

सिख दंगे को बेशक करीब 40 साल बीत गए हों, लेकिन यह अवधि पीड़ितों के दर्द पर मरहम नहीं लगा सकी है। इसका जिक्र आते ही दंगा पीड़ित सिसक पड़ते हैं। 

विज्ञापन
Victims said - the wound of Sikh riots has not healed even after 40 years
पूर्व कांग्रेस सांसद सज्जन कुमार - फोटो : ANI

विस्तार

सिख दंगे को बेशक करीब 40 साल बीत गए हों, लेकिन यह अवधि पीड़ितों के दर्द पर मरहम नहीं लगा सकी है। इसका जिक्र आते ही दंगा पीड़ित सिसक पड़ते हैं। राऊज एवेन्यू कोर्ट ने सुभाष प्लेस थाना क्षेत्र के राजनगर इलाके में हुई हिंसा की घटना में पूर्व कांग्रेस नेता सज्जन कुमार को दोषी करार दिया है। मामले में शिकायतकर्ता ने अदालत को दिए बयान में मीडिया में प्रकाशित तस्वीर के जरिए आरोपी सज्जन कुमार को पहचानने की बात कही है। पीड़िता की बेटी व गवाह ने अपने बयान में कहा कि उनकी आंखों के आगे उनके पिता और भाई को दंगाइयों ने जिंदा जला दिया था। उन्हें लंबे समय तक अलग-अलग जगहों पर शरण लेनी पड़ी।

विज्ञापन


1 नवंबर 1984 को हुई वारदात की जांच के बाद अभियोजन पक्ष ने कुल 12 गवाहों के बयान दर्ज कराए। दो गवाहों के बयान दर्ज नहीं किए जा सके क्योंकि सुनवाई के दौरान ही उनकी मौत हो गई थी। अदालत में तीन गवाहों ने एक ही जैसे बयान दर्ज कराए, जिसमें उन्होंने मुख्य आरोपी सज्जन कुमार को मीडिया में छपे उनके फोटो के आधार पर पहचाना। बचाव पक्ष ने इस बारे में सवाल उठाया कि पीड़िताओं ने एसआईटी के गठन से पहले कोई शिकायत नहीं दर्ज कराई। इसे अदालत ने यह कहते हुए खारिज कर दिया कि घटना के समय गवाह मात्र 14 और 21 वर्ष की थीं। ऐसे में उनसे किस स्वतंत्र कार्यवाही की उम्मीद नहीं की जा सकती।
विज्ञापन


पुलिस की मौजूदगी में हुई घटनाएं
मामले में गवाह संख्या 11 के तौर पर चिन्हित पीड़िता की बेटी ने अपने बयान में कहा कि मेरे पिता और भाई पिटाई से बेहोश हो गए थे। हम उनकी मदद करने की स्थिति में नहीं थे। एक पुलिस अधिकारी वहीं मौजूद था, लेकिन उसने भी कुछ नहीं किया। गवाह संख्या 13 ने भी ऐसा ही बयान दिया कि भीड़ ने उसके चाचा और चचेरे भाई तरुणदीप सिंह को जिंदा जला दिया। वहां कुछ पुलिसकर्मी भी मौजूद थे, लेकिन उन्होंने कोई मदद नहीं की।
विज्ञापन
विज्ञापन


गवाहों की सच्चाई पर संदेह नहीं
अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि सभी गवाह लंबे समय तक परीक्षण से गुजर कर भी अपने बयानों पर कायम रहे। ऐसे में किसी भी गवाह की सच्चाई पर संदेह नहीं किया जा सकता। इसके अलावा अदालत ने दिल्ली हाईकोर्ट के एक फैसले जिसमें सज्जन कुमार की संलिप्तता को लेकर सवाल किए गए थे को नजीर बनाया। हाईकोर्ट ने कहा था कि यह घटना राजनीतिक मोहरों द्वारा बनाई और संचालित की गई थी।

मानवता के विरुद्ध अपराधों पर मुकदमा चलाने में समय बाधा नहीं
घटना के 40 साल बाद घटना पर आए फैसले में अदालत ने बांग्लादेश सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले को भी नजीर के तौर पर शामिल किया है, जिसमें बंगालियों के नरसंहार पर सजा सुनाई गई थी। अदालत ने कहा था कि मानवता के विरुद्ध अपराधों पर मुकदमा चलाने में कोई भी समय बाधा नहीं है। अदालत ने 2001 में दिए फैसले में नाजियों द्वारा यहूदी नागरिकों की हत्या के लिए आरोपियों को सजा देने वाली ब्रिटिश अदालत के बयान की भी नजीर दी।

पूर्व मामले

  • केस -1ः 1984 के सिख विरोधी दंगों के बाद दिल्ली में पांच सिखों की हत्या और गुरुद्वारा जला दिया गया था। इसी केस में सज्जन कुमार को दोषी पाया गया। उन्हें दिल्ली हाईकोर्ट ने 17 दिसंबर 2018 को उम्रकैद की सजा सुनाई थी।
  • केस-2ः सितंबर 2023 को राऊज एवेन्यू कोर्ट ने दिल्ली के सुल्तानपुरी में तीन लोगों की हत्या मामले में सज्जन कुमार को बरी कर दिया था।
  • केस-3ः सरस्वती विहार में जसवंत सिंह और तरुणदीप सिंह की हत्या के मामले में सज्जन कुमार को दोषी करार दिया गया।
  • केस-4ः दिल्ली की निचली अदालतों में कुमार के खिलाफ दो मामले लंबित हैं, जिनमें से एक नवादा के गुलाब बाग स्थित गुरुद्वारे के पास हुई हिंसा से संबंधित है, जिसमें एक न्यायाधीश ने अगस्त 2023 में उन पर मुकदमा चलाने की सिफारिश की है। इसके अलावा, 1984 में जनकपुरी और विकासपुरी इलाकों में हुए दंगों से संबंधित एक मामले में भी सुनवाई कर रही है।

टाइमलाइन

  • 1 नवंबर 1984: सरस्वती विहार में जसवंत सिंह और तरुणदीप सिंह की हत्या की गई थी। पंजाबी बाग पुलिस स्टेशन में सज्जन कुमार के खिलाफ केस दर्ज किया गया था।
  • 8 जुलाई, 1994: दिल्ली की अदालत को अभियोजन शुरू करने के लिए पर्याप्त सबूत नहीं मिले। मामले में कुमार के खिलाफ आरोपपत्र दायर नहीं किया गया।
  • 12 फरवरी, 2015: सरकार ने एसआईटी का गठन किया।
  • 21 नवंबर, 2016: एसआईटी ने अदालत को सूचित किया कि मामले में आगे की जांच की आवश्यकता है।
  • 5 मई, 2021: पुलिस ने आरोपपत्र दाखिल किया।
  • 26 जुलाई 2021: अदालत ने आरोपपत्र पर संज्ञान लिया।
  • 1 अक्टूबर: अदालत ने आरोपों पर दलीलें सुनना शुरू किया।
  • 16 दिसंबर: अदालत ने हत्या, दंगा, अन्य अपराधों के आरोप तय किए।
  • 31 जनवरी, 2024: अदालत ने अंतिम दलीलें सुनना शुरू किया।
  • 8 नवंबर: अदालत ने फैसला सुरक्षित रखा।
  • 12 फरवरी 2025: स्पेशल जज कावेरी बावेजा ने फैसला सुनाया। कहा- इस बात के पर्याप्त सबूत हैं कि सज्जन कुमार न केवल भीड़ में शामिल थे, बल्कि भीड़ की अगुआई भी कर रहे थे।

पहले तीन बार टल चुका है फैसला
31 जनवरी 2025 को हुई सुनवाई में राऊज एवेन्यू कोर्ट ने सज्जन कुमार पर फैसला टाल दिया था। इससे पहले 8 जनवरी और 16 दिसंबर 2024 को भी फैसला टाला गया था।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed