एक 'मिस्ड कॉल' से उत्कर्ष हत्याकांड का खुलासा
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हत्याकांड का खुलासा बदमाशों की एक गलती से हुआ। उत्कर्ष को अगवा करने के बाद प्रताप ने चाइनीज फोन में अपना सिम डालकर उत्कर्ष के पिता मुकेश को मिस्ड कॉल की।
मुकेश ने इसी नंबर पर दोबारा कॉल की और गलती से प्रताप ने फोन रिसीव करके जेब में डाल लिया। फिरौती की कॉल की जगह प्रताप के इसी नंबर की लोकेशन मिली और वह फंस गया।
वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के मुताबिक प्रताप और सिद्धार्थ ने वारदात की योजना 15 दिन पहले ही बना ली थी। इसके लिए बाकायदा रेकी कर खुद उत्कर्ष से रास्ते में पूछताछ कर उसके स्कूल आने-जाने का समय पूछा।
उसी से गलती से चली गई उत्कर्ष के पिता को मिस्ड कॉल
बदमाशों ने फिरौती की कॉल करने के लिए गांधी नगर के जैन मंदिर के पास से पांच प्री-एक्टीवेटेड सिम और पांच चाइनीज मोबाइल खरीदे। इन फोन में सुविधा थी कि कॉल के वक्त इनमें अपनी आवाज बदल सकते थे।
कॉल करते समय उसने इसका इस्तेमाल भी किया। उत्कर्ष को अगवा करने के बाद प्रताप ने फोन को चेेक करने के लिए अपना सिम डालकर उसे चेक किया। गलती से मिस्ड कॉल मुकेश के ही नंबर पर चली गई। मुकेश ने वापस कॉल कर जानना चाहा कि कौन है।
इधर, पुलिस ने छानबीन की तो पता चला कि जिस नंबर से अगवा करने के बाद मुकेश के पास मिस्ड कॉल आई थी, उसकी लोकेशन कॉल की जगह की थी। पुलिस ने मिस्ड कॉलर का पता किया तो प्रताप के बारे में पता चला।
जांच के दौरान पुलिस को यह भी पता चला कि जिस जगह मासूम का शव मिला, वहां से 200 मीटर दूरी पर प्रताप ने किराए का फ्लैट भी लिया हुआ है। इसी आधार पर पुलिस ने प्रताप से पूछताछ की और मामले का खुलासा हो गया।