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मनोज तिवारी की अगुवाई में दिल्ली विधानसभा चुनाव लड़ेगी भाजपा? इस बयान से मची खलबली

Sun, 24 Nov 2019 03:51 PM IST
Prachi Priyam डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Prachi Priyam Updated Sun, 24 Nov 2019 03:51 PM IST
सार

  • केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने एक कार्यक्रम के दौरान मनोज तिवारी को मुख्यमंत्री बनाने की बात कही
  • किसी चेहरे के साथ चुनाव में उतरने का अनुभव अब तक नहीं रहा कारगर

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Union Minister Hardeep Singh Puri says we will make Manoj Tiwari Delhi CM
हरदीप सिंह पूरी

विस्तार

बीजेपी दिल्ली विधानसभा चुनाव में किसी चेहरे के साथ उतरेगी या बिना चेहरे के ही चुनाव लड़ा जाएगा, इस पर स्थिति अभी भी साफ नहीं है। लेकिन इसी बीच केंद्रीय शहरी विकास मंत्री हरदीप सिंह पुरी के एक बयान से खलबली मच गई है। हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि भाजपा दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी की अगुवाई में ही चुनाव लड़ेगी और वे तिवारी को दिल्ली का मुख्यमंत्री बनाकर रहेंगे।

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रविवार को शास्त्री पार्क में आयोजित एक कार्यक्रम में हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि मनोज तिवारी पार्टी का बड़ा चेहरा हैं। वे जनता के बीच काफी लोकप्रिय भी हैं और पिछले पांच साल से वे जनता की सेवा में लगे हुए हैं। इसलिए पार्टी अगला विधानसभा चुनाव उनकी अगुवाई में ही लड़ेगी।  
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दूसरे गुट के नेताओं में खलबली

केंद्रीय मंत्री के इस बयान से पार्टी के ही दूसरे नेताओं के बीच खलबली मच गई। तिवारी विरोधी खेमे के एक नेता ने कहा कि पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व ही यह तय करेगा कि चुनाव किसी चेहरे के साथ लड़ा जाएगा, या पार्टी बिना किसी चेहरे के चुनाव में उतरेगी। उन्होंने कहा कि अभी तक ऐसा कुछ भी तय नहीं किया गया है।
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क्यों महत्त्वपूर्ण है मुद्दा

दरअसल, इस समय भी दिल्ली प्रदेश बीजेपी में दो खेमे बने हुए हैं। एक खेमे में मनोज तिवारी और उनके समर्थक हैं तो दूसरे खेमे में राज्यसभा सांसद विजय गोयल, दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष में प्रतिपक्ष के नेता विजेंद्र गुप्ता और अन्य लोग शामिल हैं। खबरों के मुताबिक दूसरे गुट को पार्टी के संगठन मंत्री की सहमति भी प्राप्त है। 

अगर किसी भी एक गुट के किसी चेहरे की अगुवाई में चुनाव लड़ा जाता है तो इससे दूसरे गुट के द्वारा भितरघात किये जाने का खतरा बरकरार रहेगा। पिछले विधानसभा चुनाव के दौरान भी चेहरे के साथ चुनाव में उतरना पार्टी के लिए फायदे का सौदा साबित नहीं हुआ। इसलिए केंद्रीय मंत्री के बयान के कई अलग-अलग मतलब निकाले जा रहे हैं।

डॉ. हर्षवर्धन और किरण बेदी के नाम पर चुनाव लड़ना नहीं रहा सफल

इसके पूर्व 2015 के चुनाव में पार्टी ने किरण बेदी की अगुवाई में चुनाव में उतरने का फैसला किया था। पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने किरण बेदी को अरविंद केजरीवाल के विरुद्ध मजबूत उम्मीदवार माना था और उनकी सोच के कारण ही किरण बेदी को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार प्रोजेक्ट करते हुए पार्टी ने चुनाव लड़ा गया। लेकिन किरण बेदी जैसे बाहरी उम्मीदवार को सीधे मुख्यमंत्री पद के रूप में उतारे जाने से पार्टी नेताओं में भारी नाराजगी पैदा हुई। 

स्थानीय स्तर पर नेताओं ने उन्हें सहयोग नहीं किया। नतीजा रहा कि पार्टी दिल्ली विधानसभा के चुनाव में रिकॉर्ड न्यूनतम तीन सीट ही हासिल कर सकी। मुख्यमंत्री पद की उम्मीदवार किरण बेदी स्वयं भी कृष्णानगर सीट से अपना चुनाव हार गईं। यह सीट बीजेपी के केंद्रीय नेता डॉक्टर हर्षवर्धन की पारंपरिक सीट मानी जाती है। लेकिन इस सीट पर भी बीजेपी को हार का मुंह देखना पड़ा।  

इसके पहले 2013 के चुनाव में बीजेपी ने डॉक्टर हर्षवर्धन को मुख्यमंत्री पद का चेहरा घोषित कर चुनाव लड़ा था। लेकिन उनकी स्वच्छ छवि के बाद भी पार्टी 31 सीट ही हासिल कर सकी। यह बहुमत के आंकड़े से पांच सीट कम था। 
 
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