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पहले कानून समझिए, फिर अदालत आइए: हाईकोर्ट
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प्रदर्शन की पुलिस निगरानी पर कोर्ट ने कहा- पहले मौजूदा कानून, एसओपी और डेटा संरक्षण नियमों का अध्ययन करें, अगली सुनवाई 25 अगस्त को
अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने जंतर-मंतर पर नीट पेपर लीक के विरोध में प्रदर्शन करने वालों की कथित पुलिस निगरानी के मामले में याचिकाकर्ता को मौजूदा कानूनी प्रावधानों और नियमों का अध्ययन करने के बाद नई याचिका दाखिल करने पर विचार करने का सुझाव दिया है। मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की पीठ ने यह टिप्पणी जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्र संघ (जेएनयूएसयू) की पूर्व अध्यक्ष आईशी घोष की जनहित याचिका (पीआईएल) पर सुनवाई के दौरान की। मामले की अगली सुनवाई 25 अगस्त को होगी।
याचिका में आरोप लगाया गया था कि जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोगों की दिल्ली पुलिस लगातार फोटो और वीडियो रिकॉर्डिंग कर उनकी निगरानी कर रही है। इसे निजता के अधिकार और नागरिक स्वतंत्रता का उल्लंघन बताया गया। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने वरिष्ठ अधिवक्ता की अन्य मामले में व्यस्तता का हवाला देते हुए सुनवाई स्थगित करने का अनुरोध किया। केंद्र सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने अदालत को बताया कि इस मुद्दे से जुड़े कुछ अन्य मामले 11 सितंबर को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध हैं।
इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता पहले पुलिस निगरानी, डेटा के उपयोग और संरक्षण से संबंधित मौजूदा कानूनी ढांचे, दिल्ली पुलिस की स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी), डेटा संरक्षण कानून तथा सार्वजनिक अभिलेखों से जुड़े नियमों का अध्ययन करें। अदालत ने स्पष्ट किया कि वह फिलहाल पुलिस निगरानी की वैधता पर कोई अंतिम राय नहीं दे रही है। कोर्ट ने कहा कि व्यापक दिशा-निर्देशों की मांग पर विचार से पहले मौजूदा कानूनी व्यवस्था का परीक्षण आवश्यक है।
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। दिल्ली हाईकोर्ट ने जंतर-मंतर पर नीट पेपर लीक के विरोध में प्रदर्शन करने वालों की कथित पुलिस निगरानी के मामले में याचिकाकर्ता को मौजूदा कानूनी प्रावधानों और नियमों का अध्ययन करने के बाद नई याचिका दाखिल करने पर विचार करने का सुझाव दिया है। मुख्य न्यायाधीश डीके उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस कारिया की पीठ ने यह टिप्पणी जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय छात्र संघ (जेएनयूएसयू) की पूर्व अध्यक्ष आईशी घोष की जनहित याचिका (पीआईएल) पर सुनवाई के दौरान की। मामले की अगली सुनवाई 25 अगस्त को होगी।
याचिका में आरोप लगाया गया था कि जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोगों की दिल्ली पुलिस लगातार फोटो और वीडियो रिकॉर्डिंग कर उनकी निगरानी कर रही है। इसे निजता के अधिकार और नागरिक स्वतंत्रता का उल्लंघन बताया गया। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने वरिष्ठ अधिवक्ता की अन्य मामले में व्यस्तता का हवाला देते हुए सुनवाई स्थगित करने का अनुरोध किया। केंद्र सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने अदालत को बताया कि इस मुद्दे से जुड़े कुछ अन्य मामले 11 सितंबर को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध हैं।
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इस पर हाईकोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता पहले पुलिस निगरानी, डेटा के उपयोग और संरक्षण से संबंधित मौजूदा कानूनी ढांचे, दिल्ली पुलिस की स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी), डेटा संरक्षण कानून तथा सार्वजनिक अभिलेखों से जुड़े नियमों का अध्ययन करें। अदालत ने स्पष्ट किया कि वह फिलहाल पुलिस निगरानी की वैधता पर कोई अंतिम राय नहीं दे रही है। कोर्ट ने कहा कि व्यापक दिशा-निर्देशों की मांग पर विचार से पहले मौजूदा कानूनी व्यवस्था का परीक्षण आवश्यक है।
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