शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाएं ही सुधारते रह गए केजरीवाल, दिल्ली के 50 लाख घरों में जा घुसी भाजपा
- 22 दिसंबर को रामलीला मैदान में दिल्ली को संबोधित करेंगे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी
- स्थानीय मुद्दों की प्राथमिकता बढ़ने से दिल्ली को बड़ी सौगात की उम्मीद
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दिल्ली की केजरीवाल सरकार ने लगातार पांच साल तक शिक्षा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में काम किया और इसे अपनी उपलब्धियों में गिनाया भी है। इसी काम के भरोसे वो अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव में फतह की योजना भी बना रहे हैं।
हालांकि इसी बीच केंद्र की भाजपा सरकार ने ऐसा दांव चला है जिससे पार्टी की पैठ सीधे-सीधे दिल्ली के 50 लाख घरों में हो गई है। केंद्र ने कच्ची कॉलोनियों को पक्का करने का जो वादा किया है वो केजरीवाल सरकार के लिए चुनाव में बड़ी मुसीबत बन सकता है।
दिल्ली की कच्ची कॉलोनियों को पक्का करने का वायदा बीजेपी अगले विधानसभा चुनाव में भुनाना चाहती है। यही कारण है कि इस मुद्दे पर एक बार में सारे पत्ते खोलने की बजाय पार्टी धीरे-धीरे इस पर आगे बढ़ रही है।
एलजी के द्वारा इस पर आगे बढ़ने की घोषणा के बाद, केंद्रीय शहरी विकास मंत्री हरदीप सिंह पुरी के द्वारा इसकी घोषणा की गई थी। इसी मुद्दे पर केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर भी प्रेस कांफ्रेंस कर घोषणा कर चुके हैं।
मनोज तिवारी और हरदीप सिंह पुरी की अगुवाई में एक दल प्रधानमंत्री से मिलकर भी इस मुद्दे को सार्वजनिक कर चुका है और उस अवसर पर प्रधानमंत्री ने लोगों को संबोधित भी किया था। लेकिन अभी भी इस मुद्दे को उठाया जाना जारी है।
माना जा रहा है कि बीजेपी प्रधानमंत्री नरेंद्र मेदी की रामलीला मैदान में 22 दिसंबर को होने वाली रैली में इसके बारे में पूरी तरह से पत्ता खोलेगी। हालांकि, तब तक संसद में इसके लिए जरुरी कानून पास कर लिया जाएगा।
प्रधानमंत्री की रैली से बड़ी उम्मीद
माना जा रहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रामलीला मैदान में रैली के बाद दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए अधिसूचना कभी भी जारी की जा सकती है। इसलिए अनुमान लगाया जा रहा है कि दिल्ली से जुड़ी जो भी घोषणा केंद्र सरकार को करनी होगी, वह इस रैली के जरिए कर दी जाएगी। यही कारण है कि इस रैली के प्रति लोगों का इंतजार बढ़ता जा रहा है।
राहुल की रैली से रोचकता बढ़ी
दरअसल, केंद्र सरकार की नीतियों के विरोध में कांग्रेस भी 30 नवंबर को रामलीला मैदान में एक मेगा रैली आयोजित करने वाली थी। इस रैली को कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और राहुल गांधी संबोधित करने वाले थे।
अब यह रैली आगामी 14 दिसंबर को होने जा रही है। इसके ठीक आठ दिन बाद प्रधानमंत्री इसी मैदान में बोलेंगे, इसलिए माना जा रहा है कि वे यहां से भी कांग्रेस के ऊपर हमला बोलने का अवसर हाथ से जाने नहीं देंगे। वहीं दोनों दलों में अपनी रैली को ज्यादा व्यापक बनाने की होड़ भी देखने को मिल सकती है।
झारखंड चुनाव से निबटकर दिल्ली में जुटेंगे नेता
रामलीला मैदान की रैली को सफल बनाने के लिए तैयारियां जोरों पर हैं। इसके लिए कार्यकर्ताओं को अभी से उनकी जिम्मेदारी दे दी गई है। रैली में दिल्ली की हर कच्ची कालोनी से कम से कम सौ लोगों को लाने की योजना बनाई जा रही है। जिला और मंडल स्तर के कार्यकर्ताओं को इसके लिए अभी से तैयार रहने के लिए बता दिया गया है।
झारखंड चुनाव में मतदान प्रक्रिया 30 नवंबर से शुरू होकर 7 दिसंबर, 12 दिसंबर, 16 दिसंबर और 20 दिसंबर को संपन्न होगी। माना जा रहा है कि पार्टी के शीर्ष नेता अंतिम दो दिनों में ही रैली के कार्यक्रम में तेजी के साथ सक्रिय होंगे।
लगभग 40 लाख वोटर निशाने पर
दरअसल, दिल्ली की 1797 कच्ची कालोनियों में भारी संख्या में रहने वाली आबादी राजनीतिक दलों के निशाने पर है। अनुमानतः लगभग 40 लाख वोटर इन कालोनियों में सीधे तौर पर रहते हैं। लेकिन ऐसे लोगों की भी भारी संख्या है जो रहने के लिए दूसरी जगहों पर रहते हैं लेकिन इन जगहों पर छोटी-छोटी फैक्ट्रियां लगा रखी हैं। जाहिर है कि यह एक बड़ा वोट बैंक है जिसे सभी राजनीतिक दल साधना चाहते हैं।