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अनुवाद सभ्यताओं को जोड़ने का सशक्त माध्यम : डॉ. वरुण गुलाटी
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- रशियन साहित्य के भारतीय भाषाओं में अनुवाद पर कार्यशाला आयोजित
संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। साहित्य अकादेमी और रशियन हाउस के संयुक्त तत्वावधान में बुधवार को रशियन भाषा से भारतीय भाषाओं में साहित्यिक अनुवाद पर केंद्रित कार्यशाला का आयोजन किया गया। उद्घाटन सत्र में साहित्य अकादेमी के सचिव डॉ. वरुण गुलाटी ने कहा कि सृजनात्मक अनुवाद केवल भाषा परिवर्तन नहीं, बल्कि सभ्यताओं और संस्कृतियों को जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने कहा कि विश्व सभ्यता की यात्रा कहानियों के माध्यम से होती है और अनुवाद इन्हें विभिन्न समाजों तक पहुंचाने का कार्य करता है। प्रेम, करुणा, न्याय और मानवता जैसे सार्वभौमिक मूल्य कालजयी साहित्य के जरिए दुनिया भर में प्रसारित होते हैं। कार्यक्रम में प्रख्यात अनुवादिका रंजना सक्सेना ने कहा कि अनुवाद साहित्य को नया जीवन देता है और विभिन्न संस्कृतियों के बीच संवाद व सद्भाव को मजबूत बनाता है। उन्होंने ऐसी कार्यशालाओं को वैश्विक सांस्कृतिक समझ बढ़ाने में उपयोगी बताया। कार्यशाला में अनुवाद प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया, जिसके परिणाम 5 जून को घोषित किए जाएंगे। कार्यक्रम में विभिन्न भारतीय भाषाओं के अनुवादकों, शोधार्थियों और साहित्य प्रेमियों ने भाग लिया।
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संवाद न्यूज एजेंसी
नई दिल्ली। साहित्य अकादेमी और रशियन हाउस के संयुक्त तत्वावधान में बुधवार को रशियन भाषा से भारतीय भाषाओं में साहित्यिक अनुवाद पर केंद्रित कार्यशाला का आयोजन किया गया। उद्घाटन सत्र में साहित्य अकादेमी के सचिव डॉ. वरुण गुलाटी ने कहा कि सृजनात्मक अनुवाद केवल भाषा परिवर्तन नहीं, बल्कि सभ्यताओं और संस्कृतियों को जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने कहा कि विश्व सभ्यता की यात्रा कहानियों के माध्यम से होती है और अनुवाद इन्हें विभिन्न समाजों तक पहुंचाने का कार्य करता है। प्रेम, करुणा, न्याय और मानवता जैसे सार्वभौमिक मूल्य कालजयी साहित्य के जरिए दुनिया भर में प्रसारित होते हैं। कार्यक्रम में प्रख्यात अनुवादिका रंजना सक्सेना ने कहा कि अनुवाद साहित्य को नया जीवन देता है और विभिन्न संस्कृतियों के बीच संवाद व सद्भाव को मजबूत बनाता है। उन्होंने ऐसी कार्यशालाओं को वैश्विक सांस्कृतिक समझ बढ़ाने में उपयोगी बताया। कार्यशाला में अनुवाद प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया, जिसके परिणाम 5 जून को घोषित किए जाएंगे। कार्यक्रम में विभिन्न भारतीय भाषाओं के अनुवादकों, शोधार्थियों और साहित्य प्रेमियों ने भाग लिया।