पांच माह बाद माथेरान हिल स्टेशन में लौटे पर्यटक, घोड़ागाड़ी पर निर्भर है यहां के लोगों की आजीविका
वैश्विक महामारी कोरोना के चलते अचानक देश में लागू हुए लॉकडाउन के चलते पर्यटकों पर आश्रित माथेरान में पांच महीने के बाद एक बार फिर रौनक वापस लौटी है। राज्य सरकार ने एक सितंबर से अनलॉक-4 में कई तरह की छूट प्रदान की हैं, जिसमें माथेरान में पर्यटन की अनुमति भी शामिल है। माथेरान देश का ऐसा पर्यटन स्थल है जहां घोड़ागाड़ी (बग्घी) ही यहां के लोगों की मुख्य आजिविका है जो पूरी तरह से पर्यटन पर आश्रित है।
कोरोना संकट के चलते 17 मार्च से ही माथेरान पर्यटकों के लिए बंद कर दिया गया था। लेकिन रायगढ़ के जिलाधिकारी निधि चौधरी ने 2 सितंबर से माथेरान को पर्यटकों के लिए खोलने का आदेश दिया है। इसके बाद पहले ही दिन करीब 20 पर्यटक इस हिल स्टेशन का आनंद लेने पहुंचे, जिसकी वजह से घोड़ागाड़ी पर अपनी आजिविका चलाने वाले स्थानीय और छोटे-छोटे व्यवसायियों को राहत मिली है।
माथेरान के अश्वपालक राकेश कोकले कहते हैं कि लॉकडाउन के चलते घोड़ागाड़ी और होटल बंद हो गए थे। पर्यटको पर पाबंदी के चलते अश्वपालकों के साथ ही घोड़ों के भी खाने के लाले पड़ गए थे। हालांकि कुछ औद्योगिक समूह ने घोड़ों के खुराक की व्यवस्था की थी। लेकिन वह सहायता काफी कम थी जिससे घोड़ों के चारे कुछ ही दिन में खत्म हो गए।
इसके बाद लोग मजदूरी करने के लिए बाध्य हो गए थे। लेकिन पर्यटकों के आने से यहां के 460 अश्वपालक परिवारों में नई उम्मीद जगी है। माथेरान की नगराध्यक्ष प्रेरणा सांवत ने पर्यटकों से आह्वान किया है कि वे राज्य सरकार की ओर से जारी नियम व शर्तों के तहत माथेरान आएं। हालांकि माथेरान में अभी होटल पूरी तरह नहीं खुले हैं लेकिन जल्द ही चरणबद्ध तरीके से होटलों को खोल जाएगा।
माथेरान में वाहनों का प्रवेश पूर्णतया वर्जित है
माथेरान मुंबई से करीब 110 किमी दूर रायगढ़ जिले में कर्जत तहसील में प्राकृतिक खूबसूरती से भरा एक छोटा सा हिल स्टेशन है। पश्चिमी घाट पर्वत श्रृंखला में ऊंचाई पर बसे माथेरान की खासियत यह है कि यहां किसी प्रकार के वाहनों का प्रवेश वर्जित है। इसलिए मध्य रेलवे के नेरल स्टेशन से पर्यटक पैदल, बग्घी, रिक्शा या फिर घोड़ों के जरिए ही माथेरान पहुंचते हैं। माथेरान नेरल रेलवे स्टेशन से करीब 9 किमी दूर है।