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...ताकि नौकरी, अवार्ड के लिए न भटकें होनहार खिलाड़ी
पूजा शर्मा /अमर उजाला, फरीदाबाद
Updated Thu, 30 Apr 2015 06:43 PM IST
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खेल विभाग के पूर्व डिप्टी डायरेक्टर एसएस नांदल ने सरकार को सभी खिलाड़ियों की उपलब्धियों का डाटाबैंक बनाने की मांग की है, ताकि किसी भी होनहार खिलाड़ी को सुविधा लेने के लिए परेशान न होना पड़े।
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वह यहां बृहस्पतिवार को जिमखाना क्लब में आयोजित एक कार्यक्रम में आए थे। कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल जीतने के बाद भी अब तक फरीदाबाद की शूटर अनीसा सैयद को नौकरी नहीं मिली है।
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इसी प्रकार एशियाड में गोल्ड जीतने वाली कबड्डी खिलाड़ी अनीता मावी को भी नौकरी नहीं मिली है। जबकि दोनों की फाइलें चंडीगढ़ गई हुई हैं।
नांदल ने कहा कि यदि विभाग के पास खिलाड़ी के परिवार सदस्यों, उसकी आर्थिक हालत, उसके द्वारा जीते हुए पदकों का पूरा रिकार्ड होगा तो उन्हें सुविधाएं देने में न तो विभाग को कोई परेशानी नहीं आएगी और न ही खिलाड़ी को जगह जगह फाइल लेकर नौकरी के लिए भटकना पड़ेगा।
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उन्होंने दावा किया कि जिस दिन विभाग के पास हर खिलाड़ी का ऑनलाइन ब्योरा होगा उसके बाद खेल विभाग की कोई भी नीति और प्लानिग फेल नहीं होगी।
आज खिलाड़ियों को नौकरी, छात्रवृत्ति, कैस अवॉर्ड, पेंशन आदि बनवाने के लिए इधर से उधर भटकना पड़ता है। उन्हें छोटे से काम के लिए खेल अधिकारी से लेकर भारत सरकार की स्वीकृति तक का इंतजार करना पड़ता है। हालांकि नांदल यह नहीं बता पाए कि उन्होंने अपने कार्याकाल में यह सब क्यों नहीं किया।
डाटा बैंक पर रखे रिसर्च सेल नजर
जैसे एक छात्र का स्कूल में पंजीकरण होता है वैसे ही डाटा बैंक में हर खिलाड़ी का पंजीकरण होना जरूरी किया जाए। इसमें रिकार्ड रखा जाए कि कितने खिलाड़ी आर्थिक रूप से कमजोर हैं, कितनों को नौकरी की जरूरत है, कौन-कौन से खिलाड़ी विभाग में खाली पड़े पदों पर भर्ती होने की योग्यता रखते हैं।
साथ ही इस डाटा बैंक को कंट्रोल करने के लिए एक रिसर्च सेल बनाना चाहिए जिसके लोग समय-समय पर हर खेल परिसर में जाकर खिलाड़ी का डाटा एकत्रत कर सकें।