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Hindi News ›   Delhi ›   Delhi NCR News ›   To evade police detection, fraudsters turned a moving car into a call center; three arrested.

Delhi NCR News: पुलिस की रडार से बचने के लिए ठगों ने चलती कार को ही बनाया कॉल सेंटर, तीन गिरफ्तार

Amar Ujala Bureau अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 30 Oct 2026 08:02 PM IST
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ओल्ड कोंडली का रहने वाला लोकेश तोमर इस पूरे नेटवर्क का सरगना है
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वह ठगी के पैसे को लगाता था ठिकाने, लोकेशन ट्रेस करना बनाी बड़ी चुनौती

अमर उजाला ब्यूरो
पूर्वी दिल्ली।
पूर्वी जिला साइबर पुलिस ने ठगों के एक गिरोह को पकड़ा है। पुलिस की रडार और लोकेशन ट्रैकिंग से बचने के लिए शातिर ठगों ने एक चलती हुई एसयूवी कार को ही अपना मोबाइल कॉल सेंटर बनाया था। चलती गाड़ी के भीतर बैठकर ये शातिर देश के अलग-अलग हिस्सों में ठगी का जाल बिछाते थे। पूर्वी जिला साइबर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए इस गिरोह के तीन शातिर सदस्यों को दबोचा है। पुलिस के हत्थे चढ़े आरोपियों की पहचान ओल्ड कोंडली निवासी लोकेश तोमर, तुषार और हिमांशु राठौर के रूप में हुई है। यह पूरा नेटवर्क इतने शातिराना ढंग से चल रहा था कि पुलिस के लिए भी इनकी लोकेशन ट्रेस करना बड़ी चुनौती बना था।
बीमा पॉलिसी के नाम पर की धोखाधड़ी
पूर्वी जिला डीसीपी राजीव कुमार ने बताया कि इस कार्रवाई की शुरुआत मध्य प्रदेश के उमरिया जिले के रहने वाले नीलेश विश्वकर्मा की शिकायत से हुई थी। पीड़ित ने बीमा पॉलिसियों में 45 लाख रुपये का भारी-भरकम निवेश किया था। जालसाजों ने इसी निवेश का रिफंड दिलाने और प्रोसेसिंग फीस के नाम पर उनसे 65,000 रुपये ऐंठ लिए थे। पीड़ित की शिकायत पर साइबर थाने में फौरन एफआईआर दर्ज कर तकनीकी जांच का दायरा बढ़ाया गया। जांच के दौरान नेशनल साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल (एनसीआरपी) पर मिले संदिग्ध लेन-देन के आधार पर पुलिस ने इंडियन ओवरसीज बैंक के एक खाते की तहकीकात की। यह खाता हिमांशु राठौर से जुड़ा हुआ था। पुलिस ने हिमांशु को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में सामने आया कि यह गिरोह कानून की पहुंच से दूर रहने के लिए एक चलती ब्रेजा कार के अंदर से पूरा खेल चला रहा था। कार लगातार अपनी लोकेशन बदलती रहती थी जिससे किसी एक जगह पर पुलिस के पहुंचने की संभावना खत्म हो जाती थी। हालांकि पूर्वी जिला साइबर टीम ने तकनीकी निगरानी और पुख्ता सूचना के आधार पर ओल्ड कोंडली इलाके में घेराबंदी कर इस कार को रोक लिया और कार में सवार बाकी दोनों आरोपियों को भी दबोच लिया।
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गिरोह के सदस्यों की अलग-अलग थी भूमिकाएं : पुलिस जांच में इस गिरोह के काम करने के तौर-तरीकों का भी खुलासा हुआ है। ओल्ड कोंडली का रहने वाला लोकेश तोमर इस पूरे नेटवर्क का सरगना है। वह ठगी की अवैध रकम को ठिकाने लगाने और उसे घुमाने के लिए म्यूल यानी फर्जी बैंक खातों का इंतजाम करता था। पुलिस अब उसके तार मुंबई और तेलंगाना के अन्य साइबर ठगी मामलों से जुड़े होने की भी गहराई से जांच कर रही है। वहीं गिरोह का दूसरा सदस्य तुषार कॉल करने का जिम्मा संभालता था। वह फोन पर खुद को बीमा कंपनी का अधिकारी या प्रतिनिधि बताकर लोगों को अपने जाल में फंसाता था और बातों-ही-बातों में उनसे ओटीपी व गोपनीय बैंकिंग जानकारियां हासिल कर लेता था। इसके अलावा हिमांशु राठौर का काम कमीशन के बदले फर्जी पतों पर बैंक खाते खुलवाना और उन्हें गिरोह के अन्य सदस्यों तक पहुंचाना था।
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भारी मात्रा में फर्जी दस्तावेज और मुहरें बरामद : आरोपियों की निशानदेही और तलाशी के दौरान पुलिस ने उनके कब्जे से अपराध में इस्तेमाल की जा रही ब्रेजा कार के साथ-साथ सात मोबाइल फोन, 15 बैंक व मेट्रो कार्ड, पांच पैन कार्ड, चार आधार कार्ड व उनकी कॉपियां, छह चेक बुक, तीन पासबुक, हस्ताक्षरित चेक, दो रेंट एग्रीमेंट, 11 पासपोर्ट साइज फोटो और ग्राहकों की सूची के नौ पन्ने बरामद किए हैं। इसके अलावा, नेशनल पेमेंट कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) की एक संदिग्ध फर्जी मुहर और कई अन्य जाली दस्तावेज भी जब्त किए गए हैं, जो यह साबित करते हैं कि गिरोह कितने बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़े को अंजाम दे रहा था। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि इस गिरोह ने अब तक देश भर में कितने लोगों को अपना शिकार बनाया है और इनके इस नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं।
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