सावधान! महिलाओं में तेजी से फैल रही है ये बीमारी
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एनसीआर की महिलाओं में थॉयराइड की बीमारी बढ़ती जा रही है। यही वजह है कि गर्भवती महिलाओं में डॉक्टर अनिवार्य रूप से थॉयराइड की जांच कराते हैं। अस्पतालों में पहुंचने वाली दो से तीन मरीजों में इस बीमारी की पुष्टि हो रही है। सुरभि अस्पताल की वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रीती चौहान बताती हैं कि महिलाओं में हाइपो थॉयराइड की समस्या हाइपर थॉयराइड की तुलना में अधिक है।
जिला अस्पताल की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. निरुपमा सिंह बताती हैं कि रोजाना तीन नए मरीज थायराइड की बीमारी से पीड़ित पाए जाते हैं। कभी-कभी यह संख्या बढ़ भी जाती है। पौष्टिक भोजन का सेवन न करना इस बीमारी का एक मुख्य कारण है। कारण के आधार पर इसका इलाज किया जाता है।
क्या है ये बीमारी?
इस बीमारी का नाम है थॉयराइड। यह एक एंड्रो क्राइन ग्लैंड है, इससे टी-4 और टी-3 हार्मोन निकलता है। यह एनर्जी को संतुलित करने, मांसपेशियों के अंदर के मेटाबॉलिज्म में मदद करने, दिमाग में अन्य हार्मोन के साथ मिलकर काम करने में मदद करता है।
हार्मोन न बन पाने की स्थिति में थॉयराइड ग्लैंड का आकार बढ़ जाता है। इसके बावजूद हार्मोन की मात्रा न बढ़े तो इसे हाइपो थायराइडिज्म कहते हैं। वहीं हार्मोन ज्यादा हो तो यह स्थिति हाइपर थायराइडिज्म कहलाती है।
क्या हैं लक्षण, कैसे होगी जांच
हाइपो थॉयराइडिज्म की पहचान बेहद आसान है। अगर किसी महिला को सुस्ती होती है, एनीमिया या शरीर में पानी बढ़ जाता है, तो ये हाइपो थॉयराइडिज्म के लक्षण है। यहीं नहीं मोटापा बढ़ने या शरीर को अनावश्यक अधिक सर्दी-गर्मी लगना भी इस बीमारी के लक्षण हैं। इसके अलावा डिप्रेशन में रहने, कमजोरी महसूस करने या त्वचा में सूखापन रहने पर भी थॉयराइड की जांच करा लेनी चाहिए।
इसकी जांच कराने के लिए थॉयराइड फंग्शन टेस्ट कराएं। बचपन में यदि इस बीमारी का पता न चलें तो दिमाग कमजोर हो सकता है। तब इस बीमारी को होने पर ग्वाइटर (घेंघा) गला फूल जाता है।
क्या हैं कारण, कैसे करें बचाव
हाइपो थॉयराइडिज्म होने के कई कारण हैं। इनमें प्रमुख रूप से आनुवांशिक, आयोडीन की कमी, रेडिएशन, भोजन ठीक से न करना या फिर किसी प्रकार के संक्रमण से यह बीमारी फैलती है। यहीं नहीं यह कुछ खास तरह की दवाओं के सेवन से भी फैलती है। खास बात ये है कि ये दवाएं थॉयराइड को नष्ट करने के नाम पर ही बेंची जाती हैं।
इससे बचने के लिए अनुवांशिक स्थिति में दवाओं के जरिए टी-4 टी-3 दिया जाता है। जबकि थॉयराइड ग्लैंड बढ़ने पर ऑपरेशन भी एक विकल्प है। इसके अलावा अगर आपको आयोडीन की कमी है तो आयोडीन नमक का ज्यादा इस्तेमाल करें। साथ ही खानपान का ध्यान रखें। सबसे महत्वपूर्ण बात ऐसी दवाएं जो थॉयराइड बढ़ाने के लिए जिम्मेदार हैं, डॉक्टर के परामर्श से उसे बंद कर दें।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज दिल्ली के प्रोफेसर डॉ. जुगुल किशोर का कहना है कि गर्भवस्था में थॉयराइड फंग्शन टेस्ट अनिवार्य है। थॉयराइड पीड़ित महिलाओं में कोलेस्ट्रॉल का स्तर भी बढ़ जाता है, जिससे कई अन्य बीमारियां हो सकती हैं। यदि महिला में पुष्टि होती है तो बीमारी के कारण के आधार पर इलाज किया जाना चाहिए। वक्त पर इलाज न किया जाए तो बच्चे की गर्भ में ही मौत हो सकती है।
सुरभि अस्पताल की वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रीती चौहान बताती हैं कि महिलाओं में हाइपो थॉयराइड की समस्या हाइपर थॉयराइड की तुलना में अधिक है। जिला अस्पताल की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. निरुपमा सिंह बताती हैं कि रोजाना तीन नए मरीज थायराइड की बीमारी से पीड़ित पाए जाते हैं। कभी-कभी यह संख्या बढ़ भी जाती है। पौष्टिक भोजन का सेवन न करना इस बीमारी का एक मुख्य कारण हैं।