राजधानी दिल्ली के तीन बड़े अस्पतालों में इलाज, मरीज को बताईं अलग-अलग बीमारी
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सबसे बड़ी बात यह है कि संबंधित अस्पतालों में बच्ची का कुछ दिन इलाज भी चला, लेकिन राहत नहीं मिली तो उसे एम्स ले जाया गया, जहां टीबी की बीमारी की पुष्टि हुई।
दरअसल, मामला दिल्ली के ही निवासी सुनील कुमार की आठ वर्षीय बच्ची भक्ति का है। सुनील बताते हैं कि एक माह पहले भक्ति को पेट में दर्द की शिकायत हुई। मालवीय नगर स्थित पंडित मदन मोहन मालवीय अस्पताल में उसे लेकर गए, जहां डॉक्टरों ने पेट में पथरी की पुष्टि की।
इलाज भी कुछ दिन चला लेकिन आराम नहीं मिला। इसके बाद सुनील भक्ति को लेकर सफदरजंग अस्पताल पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने अपेंडीक्स की शिकायत बताकर इलाज शुरू कर दिया लेकिन यहां की दवा से भी भक्ति को आराम नहीं हुआ।
इसके बाद परेशान परिजन उसे लेकर एम्स पहुंचे। यहां आकर सुनील की मुश्किल और बढ़ गई क्योंकि एम्स के डॉक्टरों ने भक्ति को आंतों की टीबी की बीमारी बताई। अस्पतालों के तीन अलग-अलग डायग्नोसिस ने सुनील के होश उड़ा दिए।
अब मुसीबत यह थी कि किसकी रिपोर्ट को सही माने और किसका इलाज कराएं। उन्होंने एम्स की रिपोर्ट पर भरोसा जताते इलाज शुरू कराया। लेकिन बेड उपलब्ध नहीं होने की वजह से डॉक्टरों ने उन्हें आरएमएल अस्पताल रेफर कर दिया।
गनीमत रही कि आरएमएल में केवल 12 घंटे गुजारने के बाद उन्हें एम्स में बेड मिल गया। फिलहाल भक्ति एम्स में दाखिल है और उसका आंतों की टीबी का इलाज चल रहा है। इसके बाद से उसके दर्द में भी काफी कमी आई है।
सफदरजंग अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राजेंद्र शर्मा का कहना है कि मामला उनकी जानकारी में नहीं है, इसलिए वह इस पर ज्यादा प्रतिक्रिया तो नहीं दे सकते, लेकिन किसी के भी पेट दर्द के ये तीनों कारण हो सकते हैं।