सोशल मीडिया से रोज टूट रहे तीन परिवार, 40 फीसदी परिवारों का विवाद पुलिस करा देती है खत्म
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सोशल मीडिया के कारण हर दिन जिले में 3 दंपतियों के घर उजड़ रहे हैं। इनमें बात सिर्फ इतनी सी है कि दंपती एक-दूसरे को फोन नहीं दिखाते हैं और इससे संदेह बढ़ जाता है। इसी बात को लेकर लगातार मामले बढ़ रहे हैं। महिला थाने में पिछले साल करीब 800 मामले में आए थे, जबकि इस बार 6 माह में ही 550 मामले आ चुके हैं। यह ऐसे परिवार हैं, जो दोनों ही बाहर नौकरी करते हैं।
फेसबुक और व्हाट्सऐप समेत अन्य सोशल मीडिया के माध्यमों से लोग एक-दूसरे से चैटिंग करते हैं, मगर यह चैटिंग कब उनके घर का सुकून छीन लेती है पता नहीं चलता है। गौतमबुद्धनगर में साल 2017 में 800 शिकायतें आई थी, जिनमें करीब 30 फीसदी मामले ऐसे आए थे, जो पति या पत्नी एक-दूसरे पर संदेह करते थे और उनका आपस में मनमुटाव होने के कारण परिवार टूट गया। साल 2018 में ऐसे मामलों की संख्या बढ़ गई है और 6 माह में ही 550 का आंकड़ा पार हो चुका है।
इनमें से करीब 45 फीसदी ऐसे मामले हैं, जो दंपती जॉब करते हैं और सुबह जाने के बाद देर शाम-रात को ही आपस में मिलते हैं, मगर एक दूसरे के मोबाइल पर चैट करने को लेकर संदेह हो गया कि वह किसी दूसरे व्यक्ति के साथ बिजी हैं। इसी बात पर मनमुटाव हो गया। इनमें अधिकतर ऐसे प्रकरणों को पुलिस विभाग की ओर से कई-कई बार काउंसलिंग करके आपस में समझौता कराने का प्रयास किया जाता है, मगर करीब 60 मामले अदालत के लिए ही चले जाते हैं, जबकि 40 फीसदी को पुलिस अधिकारी स्वयं और अन्य लोगों से काउंसलिंग कराकर किसी तरह मामलों को सुलझाते हैं।
थाने में हर रोज 5 से 7 शिकायतें आती हैं
केस-1- सूरजपुर निवासी युवती की शादी दिल्ली निवासी युवक से हुई थी। 9 साल पहले महिला ने पति के फोन पर मैसेज पढ़ा, तो उस पर संदेह हुआ तो आपस में मनमुटाव हो गया। दोनों अलग-अलग रहने लगे। महिला थाने में शिकायत की, तो करीब 9 साल पुराने विवाद को खत्म कराकर घर जुड़वाया गया।
केस-2- सेक्टर-72 निवासी युवती की बिसरख क्षेत्र के युवक से शादी हुई थी। पति ने शादी के कुछ माह बाद पत्नी का फोन देखा, तो एक युवक से चैटिंग चल रही थी। 3 साल से उनका विवाद चल रहा था। पुलिस में शिकायत हुई, तो 3 माह की काउंसलिंग के बाद घर जुड़वा दिया गया।
अंजू तेवतिया, प्रभारी निरीक्षक, महिला थाना नोएडा ने बताया कि, थाने में हर रोज 5 से 7 शिकायतें आती हैं। पीड़ित परिवारों के बीच वह कई बार वार्ता कराती हैं और उनके मुख्य सगे-संबंधियों को भी बुलाते हैं, जिससे करीब 40 फीसदी परिवारों का विवाद खत्म करा देते हैं, जबकि अन्य अदालत या अन्य तरीके से निपटते हैं।