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दिल्ली के इन गांववालों ने खोज निकाला पानी और प्रदूषण की समस्या का हल

Mon, 20 Mar 2017 03:08 PM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Mon, 20 Mar 2017 03:08 PM IST
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these delhi villagers found out solution for water and pollution problem in delhi
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दिल्ली-एनसीआर के कई क्षेत्रों में पानी की समस्या जिस तरह की है उसे देखते हुए राजधानी के 17 गांव के लोगों ने अपनी समस्या के लिए सरकार पर निर्भर रहने के बजाय उसे खुद सुलझाने की सोची है।

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दिल्ली के जलाशयों को दोबारा जीवित करने और हरियाली बढ़ाने के लिए इन लोगों ने पुराने पंचायती सिस्टरम 'टापा' को फिर से लागू करने का फैसला लिया है।
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इसके तहत पश्चिमी दिल्ली और द्वारका के आसपास के 17 गांव के लोगों ने रविवार को छावला में एक बैठक बुलाई। ये गांववाले पिछले कुछ महीने से टापा नवनिर्माण अभियान के तहत लोगों को इस पंचायत के लिए जागरूक भी कर रहे हैं

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'राजनीतिक पार्टियां करती हैं लोकप्रियता के लिए काम'

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दिल्ली प्रदूषण - फोटो : self

इस मिशन में शुरु से ही आगे रहकर काम करने वाले दिवान सिंह ने कहा कि, 'लोगों को पता है कि राजनीतिक पार्टियां सिर्फ लोक‌‌‌प्रिय मुद्दों पर ही कार्य करती हैं। जबकि टापा सिस्टम पुराने समय से ही काफी प्रभावी रहा है और इसमें लोगों की निर्णय लेने में बढ़-चढ़कर भागीदारी होती है।'

इस बैठक में जिन गांवों की विशेष भागीदारी रही उनमें भरतल, धुलसिरस, ककरोला, पोचनपुर, छावला, अंबराही, नवादा, ख्याला, तातरपुर प्रमुख हैं। इसमें द्वारका सेक्टर 22 व 23 के लोग भी मौजूद थे।

इस मामले में एक बैठक फरवरी में भी हुई थी जो पर्यावरण संरक्षण से जुड़े मुद्दों को आगे ले जाने वाले अध्यक्ष के चुनाव के लिए थी।

मांगा था बायोडायवर्सिटी पार्क बना दिया अर्बन पार्क

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प्रदूषण - फोटो : amar ujala

5 सालों से बारिश का पानी यूं ही बर्बाद हो रहा है जिसे आसानी से जलाशयों में इकट्ठा करने के लिए भेजा जा सकता है.

दीवना सिंह का ये भी दावा है कि द्वारका के लोगों ने यहां एक बायोडायवर्सिटी पार्क की मांग की थी जिसकी जगह यहां शहरी पार्क बना दिया गया. रविवार को लोगों ने टापा के अध्यक्ष का चुनाव करने के लिए एक विशेष पंचायत रखी थी जिसमें ककरोला गांव के महेश कुमार को चुना गया.

महेश कुमार का कहना है कि टापा जैसी पुरानी प्रणाली से लोगों की बड़े फैसलों में सीधेतौर से भागीदारी बढ़ेगी. सरकारें तो लोग ही चुनते हैं लेकिन जब फैसला लेने की बारी आती है तो वो कहीं पीछे रह जाते हैं. यहां पर सभी की बात सुनी जाएगी जिससे समस्याओं का समाधान भी जल्द ही हो जाएगा.

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