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Delhi NCR News: गुरु तेग बहादुर साहिब के बलिदान को याद किया
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अमर उजाला ब्यूरो
नई दिल्ली। गुरु तेग बहादुर साहिब की 350वीं शहीदी वर्षगांठ पर सोमवार को सृष्टि दी चादर संगोष्ठी आयोजित हुई। इस अवसर पर विभिन्न धर्मों के नेताओं और विद्वानों ने एक मंच पर आकर उनके बलिदान को याद किया। वक्ताओं ने बताया कि गुरु साहिब ने दूसरों की धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा के लिए अपना जीवन बलिदान किया।
संगोष्ठी का आयोजन आईएचए फाउंडेशन ने इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र और दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के सहयोग से किया। यह कार्यक्रम कॉन्स्टिट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया के मावलंकर हॉल में हुआ। दिल्ली के मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।
दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष हरमीत सिंह कालका और महासचिव जगदीप सिंह काहलों भी मौजूद थे। आईएचए फाउंडेशन के संस्थापक और अध्यक्ष सतनाम सिंह आहलूवालिया सहित कई प्रमुख हस्तियां उपस्थित थीं। मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा, गुरु तेग बहादुर साहिब ने दूसरों की धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा करके दुनिया को बताया कि किसी दूसरे व्यक्ति की आस्था और अंतरात्मा की आजादी का सम्मान करना पूरी मानवता की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि भारत की ताकत उसकी विविधता, आध्यात्मिक विरासत और आपसी सम्मान की परंपरा में है। सतनाम सिंह आहलूवालिया ने कहा, गुरु साहिब की शहादत पूरी मानवता की साझा विरासत है।
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नई दिल्ली। गुरु तेग बहादुर साहिब की 350वीं शहीदी वर्षगांठ पर सोमवार को सृष्टि दी चादर संगोष्ठी आयोजित हुई। इस अवसर पर विभिन्न धर्मों के नेताओं और विद्वानों ने एक मंच पर आकर उनके बलिदान को याद किया। वक्ताओं ने बताया कि गुरु साहिब ने दूसरों की धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा के लिए अपना जीवन बलिदान किया।
संगोष्ठी का आयोजन आईएचए फाउंडेशन ने इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र और दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के सहयोग से किया। यह कार्यक्रम कॉन्स्टिट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया के मावलंकर हॉल में हुआ। दिल्ली के मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।
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दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अध्यक्ष हरमीत सिंह कालका और महासचिव जगदीप सिंह काहलों भी मौजूद थे। आईएचए फाउंडेशन के संस्थापक और अध्यक्ष सतनाम सिंह आहलूवालिया सहित कई प्रमुख हस्तियां उपस्थित थीं। मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा, गुरु तेग बहादुर साहिब ने दूसरों की धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा करके दुनिया को बताया कि किसी दूसरे व्यक्ति की आस्था और अंतरात्मा की आजादी का सम्मान करना पूरी मानवता की जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि भारत की ताकत उसकी विविधता, आध्यात्मिक विरासत और आपसी सम्मान की परंपरा में है। सतनाम सिंह आहलूवालिया ने कहा, गुरु साहिब की शहादत पूरी मानवता की साझा विरासत है।
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