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सड़कों की गलत इंजीनियरिंग से हो रहे हादसे
अमर उजाला, गाजियाबाद
Updated Mon, 17 Nov 2014 01:20 AM IST
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रोड एक्सीडेंट में हर साल करीब डेढ़ लाख लोगों की मौत हो रही है। एक्सीडेंट का मुख्य कारण वाहन चालकों का मानकर जागरूकता माह मनाया जा रहा है।
ओवरलोड, तेज स्पीड, रफ ड्राइविंग और सीट बेल्ट-हेलमेट न लगाने को हादसों और मौत का कारण मानकर अधिकारी इसमें सुधार की नसीहत दे रहे हैं।
जबकि हादसों का कारण सड़कों की गलत इंजीनियरिंग और जर्जर हालत भी है। अफसर यू-टर्न और रोड कट तक का निर्धारण नहीं कर पा रहे हैं।
सड़कों में ऐसे तीव्र मोड़ दे दिए गए हैं, जहां पर अक्सर हादसे होते हैं। ऐसे में वाहन चालकों को जागरूक कर हादसों में कमी तो लाई जा सकती है, लेकिन मानक स्तर तक कम करना असंभव है।
एसपी ट्रैफिक अमर सिंह के अनुसार रोड एक्सीडेंट का महत्वपूर्ण कारण सड़कों की गलत इंजीनियरिंग और इनकी जर्जर हालत है।
एक ओर जहां सड़क का टूटा किनारा और सड़क में बना गड्ढा सालों तक इसलिए मरम्मत नहीं किया जाता कि बजट नहीं है।
तब तक यह कई हादसों का कारण बन जाता है। इसके अलावा सड़कों का निर्माण और रखरखाव करने वाली एजेंसी ऐसे कई प्वाइंट छोड़ देती हैं, जो हादसों का कारण बनती हैं।
ये कमियां बन रहीं हादसों का कारण
डासना फ्लाईओवर का एचएच 24 में जुड़ाव हादसों का बड़ा कारण बन सकता है। एसपी ट्रैफिक ने इसके लिए अधिकारियों को पत्र भी लिखा है।
महामाया स्टेडियम पर एचएन 91 से एनएच 58 के लिए आने वाले वाहनों को बड़ा खतरा है, यहां काफी प्रयासों के बावजूद अभी फुल सेफ्टी नहीं हो पाई है।
नेहरूनगर आरओबी के चलते होली चाइल्ड चौराहे पर एक्सीडेंट का बड़ा खतरा बन गया है, यहां चारों साइड से एक साथ वाहन आते हैं।
नेहरूनगर आरओबी के नीचे कविनगर साइड में बने यू-टर्न हादसों का कारण बने हैं। यहां पर सेफ्टी सिग्नल तक नहीं लगाए गए हैं।
ठाकुरद्वारा फ्लाईओवर को अत्यंत छोटा बना दिया गया है। ऐसे में इनके अप-डाउन प्वाइंट पर हादसों का खतरा है।
शहर में दर्जनों ऐसे प्वाइंट हैं, जहां पर इंजीनियरिंग की गड़बड़ी से वाहन स्वामियों को परेशानी हो रहा है। ये बड़े हादसों का कारण बन सकते हैं।
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ओवरलोड, तेज स्पीड, रफ ड्राइविंग और सीट बेल्ट-हेलमेट न लगाने को हादसों और मौत का कारण मानकर अधिकारी इसमें सुधार की नसीहत दे रहे हैं।
जबकि हादसों का कारण सड़कों की गलत इंजीनियरिंग और जर्जर हालत भी है। अफसर यू-टर्न और रोड कट तक का निर्धारण नहीं कर पा रहे हैं।
सड़कों में ऐसे तीव्र मोड़ दे दिए गए हैं, जहां पर अक्सर हादसे होते हैं। ऐसे में वाहन चालकों को जागरूक कर हादसों में कमी तो लाई जा सकती है, लेकिन मानक स्तर तक कम करना असंभव है।
एसपी ट्रैफिक अमर सिंह के अनुसार रोड एक्सीडेंट का महत्वपूर्ण कारण सड़कों की गलत इंजीनियरिंग और इनकी जर्जर हालत है।
एक ओर जहां सड़क का टूटा किनारा और सड़क में बना गड्ढा सालों तक इसलिए मरम्मत नहीं किया जाता कि बजट नहीं है।
तब तक यह कई हादसों का कारण बन जाता है। इसके अलावा सड़कों का निर्माण और रखरखाव करने वाली एजेंसी ऐसे कई प्वाइंट छोड़ देती हैं, जो हादसों का कारण बनती हैं।
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ये कमियां बन रहीं हादसों का कारण
डासना फ्लाईओवर का एचएच 24 में जुड़ाव हादसों का बड़ा कारण बन सकता है। एसपी ट्रैफिक ने इसके लिए अधिकारियों को पत्र भी लिखा है।
महामाया स्टेडियम पर एचएन 91 से एनएच 58 के लिए आने वाले वाहनों को बड़ा खतरा है, यहां काफी प्रयासों के बावजूद अभी फुल सेफ्टी नहीं हो पाई है।
नेहरूनगर आरओबी के चलते होली चाइल्ड चौराहे पर एक्सीडेंट का बड़ा खतरा बन गया है, यहां चारों साइड से एक साथ वाहन आते हैं।
नेहरूनगर आरओबी के नीचे कविनगर साइड में बने यू-टर्न हादसों का कारण बने हैं। यहां पर सेफ्टी सिग्नल तक नहीं लगाए गए हैं।
ठाकुरद्वारा फ्लाईओवर को अत्यंत छोटा बना दिया गया है। ऐसे में इनके अप-डाउन प्वाइंट पर हादसों का खतरा है।
शहर में दर्जनों ऐसे प्वाइंट हैं, जहां पर इंजीनियरिंग की गड़बड़ी से वाहन स्वामियों को परेशानी हो रहा है। ये बड़े हादसों का कारण बन सकते हैं।