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कद्रदानों के लिए आज भी तरस रहा है ये राष्ट्रीय स्मारक

Tue, 17 Feb 2015 12:26 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, फरीदाबाद
ब्यूरो/अमर उजाला, फरीदाबाद Updated Tue, 17 Feb 2015 12:26 AM IST
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The national monument is still longing for tourisrts

एक तरफ सूरजकुंड अंतरराष्ट्रीय क्राफ्ट मेले में सैलानियों का तांता लगा रहा तो दूसरी ओर राष्ट्रीय स्मारक कुंड कद्रदानों को तरसता रहा। इसी के नाम पर यह मेला लगता है। मेले में जितने पर्यटक आए उनमें से एक फीसदी ने भी कुंड का रुख नहीं किया।

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विदेशियों के मामले में तो स्थिति बहुत ही खराब रही। सिर्फ 30 फीसदी लोगों ने ही टिकट खरीदी। मेला प्रशासन के मुताबिक इस वर्ष करीब 12 लाख पर्यटक आए हैं, जिनमें 1.60 लाख विदेशी सैलानी शामिल रहे। इसके विपरीत 15 दिन में मात्र 10 हजार लोग कुंड देखने गए। जबकि मेला प्रशासन ने दावा किया था इस बार हर टिकट काउंटर पर कुंड के बारे में बताया जाएगा। मेला खत्म होने के बाद जब हमने कुंड की व्यवस्था देखने वाले भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के प्रतिनिधियों से बात की तो उन्होंने कहा कि पर्यटकों को कुंड तक लाने के लिए कोई खास इंतजाम नहीं किया गया। कुंड के सामने वीआईपी गेट बनाया गया है इसलिए पर्यटक नहीं आ पाते।
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रोमन शैली के इस कुंड का निर्माण 10वीं सदी में तोमर वंश के शासक राजा सूरजपाल ने करवाया था। इसके पश्चिमी तट पर सूर्य मंदिर था। उस वक्त सूर्य की उपासना के साथ-साथ इसे दिल्ली की प्यास बुझाने के लिए भी बनवाया गया था। पर्यटन मंत्री रामबिलास शर्मा का कहना है कि इस कुंड को फिर से गुलजार करने के लिए राज्य सरकार केंद्र से बातचीत कर रही है।
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भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण हरियाणा रीजन के अधीक्षक एसी नौरियाल के मुताबिक नियमों के तहत सूरज डूबने के साथ ही हम राष्ट्रीय स्मारक को बंद कर देते हैं, ऐसे में ज्यादा दर्शक जा नहीं पाते। अलले वर्ष से हम विशेष अनुमति लेकर रात में लाइटिंग करके इसे जगमगाने की कोशिश करेंगे। नौरियाल के मुताबिक कुंड के आसपास के जलास्रोत सूख गए, इसलिए इसमें भी पानी नहीं रहा।

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